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ताबूत देखकर नम हो गईं अकीदतमंदों की आंखें
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हल्लौर में निकाले गए 72 ताबूत के जुलूस में मातम करते अकीदतमंद।
- फोटो : SIDDHARTHNAGAR
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ताबूत देखकर नम हो गईं अकीदतमंदों की आंखें
डुमरियागंज। ‘सलाम कर्बला वालों, हम हुसैनी उठाते हैं 72 ताबूत...’ जैसी सदाओं के बीच सोमवार की दोपहर कर्बला के 72 शहीदों की याद में शिया बाहुल्य कस्बा हल्लौर के दरगाह चौक से अलम, ताबूत और जुलजनाह का जुलूस निकाला गया। एक साथ निकाले गए 72 ताबूत को देखकर अकीदतमंदों की आंखें नम हो र्गइं। पूरा माहौल गमगीन बना रहा।
हल्लौर कस्बा स्थित इमामबाड़े कला के दरगाह चौक पर सोमवार की दोपहर 2:30 बजे मरसिया मजलिस आयोजित की गई। जाकिर जमाल हैदर रिजवी ने 10 मोहर्रम सन 61 हिजरी को कर्बला के मैदान में हक, इंसाफ और इंसानियत और दीन-ए-इस्लाम की हिफाजत के लिए अपनी शहादत देने वाले कर्बला के 72 शहीदों का एक-एक कर फजायल और मसायब को बयां किया। जमाल ने कहा कि इमाम हुसैन ने हक, सच्चाई और ईमान की लड़ाई लड़ी, जिसमें उन्होंने अपने पूरे कुनबे के साथ-साथ अपने छह माह के दुधमुंहे अली असगर की शहादत देकर दुनिया को बता दिया कि जीत जुल्मों-सितम को सहते हुए हक सच्चाई और इंसाफ के रास्ते पर चलने वालों की ही होती है।
ताबूत का जुलूस इमामबाड़े कला से दरगाह हजरत अब्बास, जन्नतुल बकी होता हुआ देर शाम को कर्बला पर पहुंच कर समाप्त हो गया। वही कर्बला से 72 ताबूत को जन्नतुलबकी के प्रांगण में लाकर रख दिया गया, जहां पर ताबूत की जियारत के लिए महिलाओं का हुजूम उमड़ पड़ा। जुलूस में नफीस हल्लौरी, सावन, सज्जाद, शकील गुड्डू, अरमान आरजू, आले रजा, खुलूस, हांनी, कामयाब बबलू, मुमताज, हसन जमाल, मेराज अरमान, हैदर सब्लू आदि ने कर्बला के शहीदों की शहादत को बयां करने वाला नौहा पढ़ा।
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इस दौरान शब्बीर हसन, डॉ. फखरुल हसन, डॉ. नायाब, मुख्तार अहमद, खेसाल, बेचन, बदलू, इंतखाब हैदर, काजिम मेहंदी, अख्तर रजा, वजीर हैदर, कसीम रिजवी, सलमान मेहंदी, जलाल हैदर, अहमद अब्बास, काजिम रजा, तसबीब हसन, सरवर मेहंदी, कमर काजमी, जानशीन अहमद, लल्लन मैनेजर अकबर मेहंदी, ताकीब रिजवी, शहजाद, शाहनवाज, मुराद आदि भारी संख्या में अकीदतमंद मौजूद रहे।
दूर से भी आए थे अकीदतमंद
मोमनीन हल्लौर के तत्वाधान में सोमवार को निकाले गए 72 ताबूत के जुलूस में बस्ती, गोरखपुर, फैजाबाद, गोंडा उतरौला, बलरामपुर आदि जनपदों से भी भारी संख्या में महिलाएं और पुरुष जुलूस में शामिल होने के लिए हल्लौर आए हुए थे। बाहर से आए जायरीनों की सुविधा के लिए उचित प्रबंध किया गया था।
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डुमरियागंज। ‘सलाम कर्बला वालों, हम हुसैनी उठाते हैं 72 ताबूत...’ जैसी सदाओं के बीच सोमवार की दोपहर कर्बला के 72 शहीदों की याद में शिया बाहुल्य कस्बा हल्लौर के दरगाह चौक से अलम, ताबूत और जुलजनाह का जुलूस निकाला गया। एक साथ निकाले गए 72 ताबूत को देखकर अकीदतमंदों की आंखें नम हो र्गइं। पूरा माहौल गमगीन बना रहा।
हल्लौर कस्बा स्थित इमामबाड़े कला के दरगाह चौक पर सोमवार की दोपहर 2:30 बजे मरसिया मजलिस आयोजित की गई। जाकिर जमाल हैदर रिजवी ने 10 मोहर्रम सन 61 हिजरी को कर्बला के मैदान में हक, इंसाफ और इंसानियत और दीन-ए-इस्लाम की हिफाजत के लिए अपनी शहादत देने वाले कर्बला के 72 शहीदों का एक-एक कर फजायल और मसायब को बयां किया। जमाल ने कहा कि इमाम हुसैन ने हक, सच्चाई और ईमान की लड़ाई लड़ी, जिसमें उन्होंने अपने पूरे कुनबे के साथ-साथ अपने छह माह के दुधमुंहे अली असगर की शहादत देकर दुनिया को बता दिया कि जीत जुल्मों-सितम को सहते हुए हक सच्चाई और इंसाफ के रास्ते पर चलने वालों की ही होती है।
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ताबूत का जुलूस इमामबाड़े कला से दरगाह हजरत अब्बास, जन्नतुल बकी होता हुआ देर शाम को कर्बला पर पहुंच कर समाप्त हो गया। वही कर्बला से 72 ताबूत को जन्नतुलबकी के प्रांगण में लाकर रख दिया गया, जहां पर ताबूत की जियारत के लिए महिलाओं का हुजूम उमड़ पड़ा। जुलूस में नफीस हल्लौरी, सावन, सज्जाद, शकील गुड्डू, अरमान आरजू, आले रजा, खुलूस, हांनी, कामयाब बबलू, मुमताज, हसन जमाल, मेराज अरमान, हैदर सब्लू आदि ने कर्बला के शहीदों की शहादत को बयां करने वाला नौहा पढ़ा।
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इस दौरान शब्बीर हसन, डॉ. फखरुल हसन, डॉ. नायाब, मुख्तार अहमद, खेसाल, बेचन, बदलू, इंतखाब हैदर, काजिम मेहंदी, अख्तर रजा, वजीर हैदर, कसीम रिजवी, सलमान मेहंदी, जलाल हैदर, अहमद अब्बास, काजिम रजा, तसबीब हसन, सरवर मेहंदी, कमर काजमी, जानशीन अहमद, लल्लन मैनेजर अकबर मेहंदी, ताकीब रिजवी, शहजाद, शाहनवाज, मुराद आदि भारी संख्या में अकीदतमंद मौजूद रहे।
दूर से भी आए थे अकीदतमंद
मोमनीन हल्लौर के तत्वाधान में सोमवार को निकाले गए 72 ताबूत के जुलूस में बस्ती, गोरखपुर, फैजाबाद, गोंडा उतरौला, बलरामपुर आदि जनपदों से भी भारी संख्या में महिलाएं और पुरुष जुलूस में शामिल होने के लिए हल्लौर आए हुए थे। बाहर से आए जायरीनों की सुविधा के लिए उचित प्रबंध किया गया था।