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सड़क बचा न खेत-खलिहान, सिर्फ पानी ही पानी

Thu, 28 Jul 2016 12:05 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला ,सिद्धार्थनगर
ब्यूरो/अमर उजाला ,सिद्धार्थनगर Updated Thu, 28 Jul 2016 12:05 AM IST
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Roads not deliver farm-barn, the water just water
बाढ़ से लोग परेशान। - फोटो : अमर उजाला
1998 जैसी भयावह मंजर की कल्पना से कांप उठे लोग
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 लोगों में बाढ़ की दहशत 1998 जैसी थी। लहलहाते धान के खेत डूब गए थे। गांवों में सैकड़ों कच्चे मकान जमींदोज हो गए थे। चारे के लिए पशु बेहाल थे तो कई घरों में चूल्हे बुझे हुए थे। महामारी तो कई दिनों तक डेरा डाले हुए थी। कहना न होगा कि पिछले 24 घंटे में आई बाढ़ डेढ़ दशक पूर्व की भयावह याद को ताजा कर दी। सड़क से लेकर गांव और खेत-खलिहान,हर ओर पानी ही पानी। अचानक आ पड़ी इस आपदा के वक्त प्रशासन की लाचारी देखने लायक थी। 
सैलाब से घिरे मकानों की छतों पर सैकड़ों लोग फंसे हुए हैं। 24 घंटे बाद भी उन तक मदद नहीं पहुंच पाई है। भूख-प्यास से इन ग्रामीणों का हाल-बेहाल है। प्रशासनिक तंत्र निरीह बना हुआ है। बुधवार की दोपहर तक प्रशासन के पास इन परिवारों तक पहुंचने के लिए स्टीमर उपलब्ध नहीं हो पाए थे। बाढग़्रस्त इलाकों के बाहर के लोग अपनों की चिंता में छटपटा रहे थे। कोई यह बताने वाला नहीं है कि स्थिति कब तक सामान्य होगी।
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मंगलवार को शोहरतगढ़ में बानगंगा पर बांध टूटने के 24 घंटे बाद बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों की यही स्थिति रही। आपदा प्रबंधन के समुचित इंतजाम न होने के कारण प्रशासनिक तंत्र हर मोर्चे पर फेल नजर आया। न पीड़ितों तक राहत सामग्री पहुंचाने की व्यवस्था थी और न ही उन्हें शरण देने के लिए कोई इंतजाम किया गया था। हालात के आगे अफसर खुद को बेबस बताते रहे। ऐसे में बाढ़ में फंसे लोगों के पास सिर्फ उनकी जीवटता साथ बची थी, जिसके बूते वह सैलाब से जूझते रहे। बाढ़ से शोहरतगढ़ तहसील क्षेत्र के तीन दर्जन गांव प्रभावित हैं। तौलिहवां, बालानगर, कचरिहवा, फुलवरिया सहित करीब एक दर्जन गांवों में अपराह्न तीन बजे तक प्रशासन का कोई नुमाइंदा नहीं पहुंच सका था। बानगंगा के बीच से होकर इन गांवों तक पहुंचने के लिए स्टीमर की दरकार थी, जो प्रशासन के पास उपलब्ध नहीं था। इन गांवों में फंसे लोग बार-बार अफसरों, जनप्रतिनिधियों के नंबरों पर फंोन कर मदद की गुहार लगाते रहे और बदले में उन्हें सिर्फ आश्वासन की घुट्टियां मिलती रही। गनेशपुर, कोटिया, कपसिहवा, सुर्जी, अलगा, अर्री, लाला बढ़नी, पैकी, जोबकुंडा, चरिगवा, लोहटी, सिसवा, कोटिया बाजार, मोहनकोला, धनधरा, धनधरी आदि गांवों से एनडीआरएफ की टीम ने कई लोगों को बाहर निकाला, लेकिन सैकड़ों लोग अब भी गांव में फंसे हुए है। 
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30 घंटे बाद भी नहीं शुरू हुआ बौद्ध परिपथ
 बाढ़ के कारण शोहरतगढ़-बढनी राष्ट्रीय राजमार्ग-730 पर आवागमन मंगलवार की दोपहर से ही बंद है। इस मार्ग को बौद्ध परिपथ कहते हैं। तीस घंटे बाद भी हलौरा से गनेशपुर तक सड़क पानी में डूबी रही। हाईवे पर एक से दो फीट तक पानी चल रहा है। इसके चलते आवागमन पूरी तरह ठप रहा। जगह-जगह वाहनों की लंबी कतारें लगी रहीं। ट्रेन सेवा भी बंद होने से यात्रियों को फजीहत झेलनी पड़ी। नेपाल जाने वाले कई यात्री बीच रास्ते में फंसे रहे। उन्हें वापस शोहरतगढ़ भेज दिया गया। ट्रेन गोरखपुर से शोहरतगढ़ तक और उधर गाेंडा से बढ़नी तक ही आ रही है। यह स्थिति कब तक रहेगी कोई भी जिम्मेदार बताने की स्थिति में नहीं है। 
 
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