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शासन के रडार पर बॉर्डर क्षेत्र के धार्मिक स्थल
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शासन के रडार पर बॉर्डर क्षेत्र के धार्मिक स्थल
सिद्धार्थनगर। देश में बढ़ते हुए आतंकी खतरे और टेरर फंडिंग के जरिए किए जा रहे देश विरोध कार्य को लेकर शासन सख्त है। आतंकी गतिविधियों को लेकर सुर्खियों में रहने वाली भारत-नेपाल सीमा शासन के रडार पर है। सीमावर्ती क्षेत्रों में हवाला व फंडिंग के जरिए हाल ही में बनने वाले धार्मिक स्थल के बारे में शासन ने जानकारी मांगी है। नेपाल सीमा से लगने वाले आठ जनपदों से सूचना मांगी गई है। इसके बाद शासन स्तर से कार्रवाई की जाएगी।
भारत-नेपाल की खुली सीमा आंतकी गतिविधियों को लेकर संवदेनशीन रहा है। देश विरोधी तत्व खुली सीमा का लाभ उठा देकर देश नापाक हरकत करने की कोशिश करते हुए पकड़े जा चुके हैं। हाल के दिनों में सीमावर्ती क्षेत्र के कुछ गांवों में बिना अनुमति के धार्मिक स्थलों के निर्माण होने का काम तेजी से चला है। वहीं, कई ऐसे धार्मिक स्थलों का निर्माण हो चुका है। इनके निर्माण में विदेशी फंडिंग की भी बात सामने आना पाया गया है। फंडिंग और चंदा के रूप में मिले धन से इनका निर्माण किया गया है। भारत-नेपाल सीमा पर स्थित कुछ गांवों लगभग एक दर्जन धार्मिक स्थल बन चुके हैं और कुछ निर्माणाधीन भी है। इसमें देश विरोधी गतिविधि संचालित होने का भी अंदेशा है। ऐसा रिपोर्ट एक एजेंसी के जरिए भेजे जाने की सूचना है। मामले को गंभीरता से लेते हुए और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए अपर मुख्य सचिव गृह ने ऐसे धार्मिक स्थलों की सूची तत्काल प्रभाव से उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। जारी आदेश में सीमावर्ती क्षेत्र के आठ जिलों से विशेष निगरानी करते हुए आख्या देने का निर्देश हुआ है। इस संबंध में जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी विजय प्रताप यादव ने बताया कि शासन से रिपोर्ट मांगी गई थी। रिपोर्ट भेज दिया गया है। शासन की ओर से नेपाल सीमा से लगे कुशीनगर, महराजगंज, सिद्धार्थनगर, बलरामपुर, श्रावस्ती, बहराइच, लखीमपुरखीरी, पीलीभीत जिले से रिपोर्ट मांगा गया है।
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सिद्धार्थनगर। देश में बढ़ते हुए आतंकी खतरे और टेरर फंडिंग के जरिए किए जा रहे देश विरोध कार्य को लेकर शासन सख्त है। आतंकी गतिविधियों को लेकर सुर्खियों में रहने वाली भारत-नेपाल सीमा शासन के रडार पर है। सीमावर्ती क्षेत्रों में हवाला व फंडिंग के जरिए हाल ही में बनने वाले धार्मिक स्थल के बारे में शासन ने जानकारी मांगी है। नेपाल सीमा से लगने वाले आठ जनपदों से सूचना मांगी गई है। इसके बाद शासन स्तर से कार्रवाई की जाएगी।
भारत-नेपाल की खुली सीमा आंतकी गतिविधियों को लेकर संवदेनशीन रहा है। देश विरोधी तत्व खुली सीमा का लाभ उठा देकर देश नापाक हरकत करने की कोशिश करते हुए पकड़े जा चुके हैं। हाल के दिनों में सीमावर्ती क्षेत्र के कुछ गांवों में बिना अनुमति के धार्मिक स्थलों के निर्माण होने का काम तेजी से चला है। वहीं, कई ऐसे धार्मिक स्थलों का निर्माण हो चुका है। इनके निर्माण में विदेशी फंडिंग की भी बात सामने आना पाया गया है। फंडिंग और चंदा के रूप में मिले धन से इनका निर्माण किया गया है। भारत-नेपाल सीमा पर स्थित कुछ गांवों लगभग एक दर्जन धार्मिक स्थल बन चुके हैं और कुछ निर्माणाधीन भी है। इसमें देश विरोधी गतिविधि संचालित होने का भी अंदेशा है। ऐसा रिपोर्ट एक एजेंसी के जरिए भेजे जाने की सूचना है। मामले को गंभीरता से लेते हुए और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए अपर मुख्य सचिव गृह ने ऐसे धार्मिक स्थलों की सूची तत्काल प्रभाव से उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। जारी आदेश में सीमावर्ती क्षेत्र के आठ जिलों से विशेष निगरानी करते हुए आख्या देने का निर्देश हुआ है। इस संबंध में जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी विजय प्रताप यादव ने बताया कि शासन से रिपोर्ट मांगी गई थी। रिपोर्ट भेज दिया गया है। शासन की ओर से नेपाल सीमा से लगे कुशीनगर, महराजगंज, सिद्धार्थनगर, बलरामपुर, श्रावस्ती, बहराइच, लखीमपुरखीरी, पीलीभीत जिले से रिपोर्ट मांगा गया है।
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