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Siddharthnagar News: ‘श्रीराम के आदर्शों पर चलने से रामराज की होगी स्थापना’
Sat, 08 Mar 2025 11:01 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Sat, 08 Mar 2025 11:01 PM IST
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- पथरा क्षेत्र के सेहरी सेवक गांव में श्रीविष्णु महायज्ञ और राम कथा आयोजित
पथरा। क्षेत्र के सेवक सेहरी गांव में आयोजित श्रीविष्णु महायज्ञ और रामकथा में कथावाचक हरिवेंद्र त्रिपाठी ने बताया कि श्रीराम के आदर्शों पर चलने से ही रामराज की स्थापना होगी।
उन्होंने कहा कि श्रीराम के आदर्शों पर चलने से समाज को लाभ मिलेगा। श्रीराम जैसा पुत्र, भाई और मित्र संसार में कोई नहीं हुआ। भगवान राम पिता दशरथ के एक बार कहने पर अयोध्या त्याग कर वन में चले गए। छोटे भाई भरत को अयोध्या का राजा बनाना चाहते थे। श्रीराम ने सुग्रीव और विभीषण से मित्रता की तो उसका निर्वहन करते हुए किष्किंधा और लंका को जीतने के बाद भी सुग्रीव को किष्किंधा और विभीषण को लंका का राजा बना दिया।
आगे बताया कि श्रीराम का गुणगान उनका शत्रु रावण भी करने के लिए विवश हो गया। लंका के सब समरांगण में जब श्रीराम और रावण के बीच युद्ध का अंतिम चरण चल रहा था उस समय रावण की संपूर्ण सेना मारी जा चुकी थी। श्रीराम के बाण से रावण मूर्छित होकर समरांगण में गिर पड़ा। जब उसे चेतना आई तो देखा कि श्रीराम सामने खड़े हैं और बड़े प्रेम से कह रहे हैं लंकेश तुम अपने महल में जाओ और विश्राम करो कल पूरी ताकत के साथ युद्ध करने आना। कथा के दौरान बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।
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पथरा। क्षेत्र के सेवक सेहरी गांव में आयोजित श्रीविष्णु महायज्ञ और रामकथा में कथावाचक हरिवेंद्र त्रिपाठी ने बताया कि श्रीराम के आदर्शों पर चलने से ही रामराज की स्थापना होगी।
उन्होंने कहा कि श्रीराम के आदर्शों पर चलने से समाज को लाभ मिलेगा। श्रीराम जैसा पुत्र, भाई और मित्र संसार में कोई नहीं हुआ। भगवान राम पिता दशरथ के एक बार कहने पर अयोध्या त्याग कर वन में चले गए। छोटे भाई भरत को अयोध्या का राजा बनाना चाहते थे। श्रीराम ने सुग्रीव और विभीषण से मित्रता की तो उसका निर्वहन करते हुए किष्किंधा और लंका को जीतने के बाद भी सुग्रीव को किष्किंधा और विभीषण को लंका का राजा बना दिया।
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आगे बताया कि श्रीराम का गुणगान उनका शत्रु रावण भी करने के लिए विवश हो गया। लंका के सब समरांगण में जब श्रीराम और रावण के बीच युद्ध का अंतिम चरण चल रहा था उस समय रावण की संपूर्ण सेना मारी जा चुकी थी। श्रीराम के बाण से रावण मूर्छित होकर समरांगण में गिर पड़ा। जब उसे चेतना आई तो देखा कि श्रीराम सामने खड़े हैं और बड़े प्रेम से कह रहे हैं लंकेश तुम अपने महल में जाओ और विश्राम करो कल पूरी ताकत के साथ युद्ध करने आना। कथा के दौरान बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।
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