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नारद और भगवान विष्णु की लीला देख भावविभोर हुए श्रद्धालु
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शोहरतगढ क्षेत्र के टडिया वैष्णो मंदिर परिसर में रामलीला के छठे दिन मंचन करते कलाकार। संवाद
- फोटो : SIDDHARTHNAGAR
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नारद और भगवान विष्णु की लीला देख भावविभोर हुए श्रद्धालु
पकड़ी बाजार। क्षेत्र के टडिया वैष्णो मंदिर परिसर में आयोजित रामलीला के छठे दिन शनिवार रात कलाकारों ने देवर्षि नारद एवं भगवान श्रीविष्णु की लीला का मंचन किया। मंचन से श्रद्धालु मंत्रमुग्ध हो गए।
रामलीला में दिखाया कि कामदेव पर विजय प्राप्त करने के लिए देवर्षि नारद तपस्या करने लगते हैं। उनकी तपस्या को भंग करने के लिए कामदेव प्रयास करते हैं, पर सफल नहीं हो पाते हैं। इसके बाद नारद कैलाश पर्वत पर पहुंचे और भगवान भोले नाथ से कहते हैं कि प्रभु! मैंने कामदेव पर विजय प्राप्त कर ली है। भगवान भोले नाथ नारद जी को समझाते हैं कि यह बात विष्णु से मत बताना नहीं तो तुम मुसीबत में पड़ सकते हो। पर, नारद जी से रहा नहीं गया। नारद विष्णु से मिलने पहुंच गए और उनको सारी बात बता दी।
भगवान विष्णु ने शील नगर का निर्माण किया। नारद जी घूमते हुए शील नगर पहुंचते हैं। उनको देखकर वहां के राजा अपनी पुत्री विश्वमोहिनी को आशीर्वाद देने के लिए अपने दरबार में ले जाते हैं। नारद जी उनकी पुत्री पर मोहित हो जाते हैं। उनके मन में विश्वमोहिनी से विवाह की इच्छा जागृत हो जाती है। वह विष्णु भगवान के पास पहुंचते हैं और उनसे अपने जैसा सुंदर रूप मांगते हैं। भगवान विष्णु उनको बंदर (हरि) का मुख प्रदान करते हैं। नारद जी अपने इस रूप को लेकर स्वयंवर में पहुंचते हैं। बंदर का मुख देखकर वहां बैठे लोग नारद की हंसी उड़ाते हैं और इस तरह इनका अपमान होता है। भगवान विष्णु स्वयं वहां पर पहुंच कर विश्वमोहिनी से विवाह कर लेते हैं।
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इस दौरान मेला समिति के अध्यक्ष मेजर सिंह चौहान, शिवा चौहान, राधिका सिंह चौहान, सुरेंद्र मौजूद रहे।
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पकड़ी बाजार। क्षेत्र के टडिया वैष्णो मंदिर परिसर में आयोजित रामलीला के छठे दिन शनिवार रात कलाकारों ने देवर्षि नारद एवं भगवान श्रीविष्णु की लीला का मंचन किया। मंचन से श्रद्धालु मंत्रमुग्ध हो गए।
रामलीला में दिखाया कि कामदेव पर विजय प्राप्त करने के लिए देवर्षि नारद तपस्या करने लगते हैं। उनकी तपस्या को भंग करने के लिए कामदेव प्रयास करते हैं, पर सफल नहीं हो पाते हैं। इसके बाद नारद कैलाश पर्वत पर पहुंचे और भगवान भोले नाथ से कहते हैं कि प्रभु! मैंने कामदेव पर विजय प्राप्त कर ली है। भगवान भोले नाथ नारद जी को समझाते हैं कि यह बात विष्णु से मत बताना नहीं तो तुम मुसीबत में पड़ सकते हो। पर, नारद जी से रहा नहीं गया। नारद विष्णु से मिलने पहुंच गए और उनको सारी बात बता दी।
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भगवान विष्णु ने शील नगर का निर्माण किया। नारद जी घूमते हुए शील नगर पहुंचते हैं। उनको देखकर वहां के राजा अपनी पुत्री विश्वमोहिनी को आशीर्वाद देने के लिए अपने दरबार में ले जाते हैं। नारद जी उनकी पुत्री पर मोहित हो जाते हैं। उनके मन में विश्वमोहिनी से विवाह की इच्छा जागृत हो जाती है। वह विष्णु भगवान के पास पहुंचते हैं और उनसे अपने जैसा सुंदर रूप मांगते हैं। भगवान विष्णु उनको बंदर (हरि) का मुख प्रदान करते हैं। नारद जी अपने इस रूप को लेकर स्वयंवर में पहुंचते हैं। बंदर का मुख देखकर वहां बैठे लोग नारद की हंसी उड़ाते हैं और इस तरह इनका अपमान होता है। भगवान विष्णु स्वयं वहां पर पहुंच कर विश्वमोहिनी से विवाह कर लेते हैं।
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इस दौरान मेला समिति के अध्यक्ष मेजर सिंह चौहान, शिवा चौहान, राधिका सिंह चौहान, सुरेंद्र मौजूद रहे।