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किसानों के लिए बेकार साबित हो रहा रडार सिस्टम
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किसानों के लिए बेकार साबित हो रहा रडार सिस्टम
सिद्धार्थनगर। ज्यादा बारिश के कारण खेती में पिछड़ चुके किसानों को रबी की फसल के लिए मौसम की सटीक जानकारी नहीं मिल पा रही है। कभी धूप हो रही है तो कभी बादल मंडरा रहे हैं। ऐसी स्थिति में किसानों को निर्णय करने में असमंजस की स्थिति का सामना करना पड़ रहा है। कृषि विज्ञान केंद्र सोहाना के रडार सिस्टम से अब किसानों को मौसम में परिवर्तन का पूर्वानुमान का पता नहीं चल पा रहा है।
आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय कुमारगंज अयोध्या की ओर से संचालित कृषि विज्ञान केंद्र सोहाना में भारत मौसम विज्ञान एवं पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय की ओर से कृषि मौसम इकाई परियोजना संचालित की जाती है। बीते 22 सितंबर से जिले एवं आसपास के जिलों के किसानों को रडार सिस्टम से जानकारी मिलने लगी थी, लेकिन तीन दिन से इस सिस्टम से मौसम की रिपोर्ट नहीं प्राप्त होने पर किसानों की परेशानी बढ़ गई है। रबी सीजन में गेहूं, चना, मटर, मसूर, आलू एवं सब्जियों की बुवाई के समय में मौसम की जानकारी नहीं मिल रही है।
इससे कृषि क्षेत्र में नुकसान का जोखिम बढ़ गया है। बताया जा रहा है कि वर्ष 2019 से एक विषय वस्तु विशेषज्ञ (कृषि मौसम विशेषज्ञ) एवं एक मौसम पर्यवेक्षक की तैनाती की गई है। आचार्य नरेंद्र देव कृषि विश्वविद्यालय ने दोनों पदों पर नियुक्ति की थी, लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन ने इन पदों पर नई नियुक्ति के लिए विज्ञापन प्रकाशित कर दिया है। उसके बाद मौसम वैज्ञानिक एवं पर्यवेक्षक ने मौसम की रिपोर्ट किसानों में शेयर नहीं कर रहे हैं, क्योंकि वह खुद को अधिकृत नहीं मान रहे हैं। इस मामले को सुलझाने में विश्वविद्यालय के अधिकारी रुचि नहीं ले रहे हैं। कृषि विज्ञान केंद्र सोहाना के अध्यक्ष एवं वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. ओपी वर्मा ने कहा कि मौसम विज्ञान विभाग में तैनात कर्मियों को निकाल दिया गया है। इस मामले में विश्वविद्यालय प्रशासन को निर्णय करना है।
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जुड़े हैं 8000 किसान
कृषि विज्ञान केंद्र सोहाना से जिले के अलावा सीमावर्ती जनपद संतकबीरनगर, बस्ती, बलरामपुर और गोरखपुर के किसानों को भी फायदा मिल रहा था। 55 ग्रुपों के माध्यम से 8000 किसानों को जानकारी भेजी जा रही थी, जबकि प्रगतिशील किसान टेलीफोन के माध्यम से मौसम के अनुसार खेती करते थे। बुवाई के सीजन में कदम आगे बढ़ाने से किसान हिचक रहे हैं, क्योंकि उन्हें बारिश का पूर्वानुमान नहीं मिल पा रहा है।
प्रभावित हैं सात जिले
आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय कुमारगंज अयोध्या के अंतर्गत सात कृषि विज्ञान केंद्रों में ग्रामीण कृषि मौसम सेवा परियोजना जारी है। इनमें प्रदेश के गोरखपुर, आजमगढ़, चंदौली, बलरामपुर, जौनपुर, सिद्धार्थनगर एवं सोनभद्र जिला शामिल है। दो वर्ष तक प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले मौसम विशेषज्ञ एवं पर्यवेक्षक के पदों पर नई नियुक्ति के विज्ञापन जारी होने के बाद मौसम की जानकारी देने का कार्य अचानक बाधित हो गया है।
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सिद्धार्थनगर। ज्यादा बारिश के कारण खेती में पिछड़ चुके किसानों को रबी की फसल के लिए मौसम की सटीक जानकारी नहीं मिल पा रही है। कभी धूप हो रही है तो कभी बादल मंडरा रहे हैं। ऐसी स्थिति में किसानों को निर्णय करने में असमंजस की स्थिति का सामना करना पड़ रहा है। कृषि विज्ञान केंद्र सोहाना के रडार सिस्टम से अब किसानों को मौसम में परिवर्तन का पूर्वानुमान का पता नहीं चल पा रहा है।
आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय कुमारगंज अयोध्या की ओर से संचालित कृषि विज्ञान केंद्र सोहाना में भारत मौसम विज्ञान एवं पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय की ओर से कृषि मौसम इकाई परियोजना संचालित की जाती है। बीते 22 सितंबर से जिले एवं आसपास के जिलों के किसानों को रडार सिस्टम से जानकारी मिलने लगी थी, लेकिन तीन दिन से इस सिस्टम से मौसम की रिपोर्ट नहीं प्राप्त होने पर किसानों की परेशानी बढ़ गई है। रबी सीजन में गेहूं, चना, मटर, मसूर, आलू एवं सब्जियों की बुवाई के समय में मौसम की जानकारी नहीं मिल रही है।
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इससे कृषि क्षेत्र में नुकसान का जोखिम बढ़ गया है। बताया जा रहा है कि वर्ष 2019 से एक विषय वस्तु विशेषज्ञ (कृषि मौसम विशेषज्ञ) एवं एक मौसम पर्यवेक्षक की तैनाती की गई है। आचार्य नरेंद्र देव कृषि विश्वविद्यालय ने दोनों पदों पर नियुक्ति की थी, लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन ने इन पदों पर नई नियुक्ति के लिए विज्ञापन प्रकाशित कर दिया है। उसके बाद मौसम वैज्ञानिक एवं पर्यवेक्षक ने मौसम की रिपोर्ट किसानों में शेयर नहीं कर रहे हैं, क्योंकि वह खुद को अधिकृत नहीं मान रहे हैं। इस मामले को सुलझाने में विश्वविद्यालय के अधिकारी रुचि नहीं ले रहे हैं। कृषि विज्ञान केंद्र सोहाना के अध्यक्ष एवं वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. ओपी वर्मा ने कहा कि मौसम विज्ञान विभाग में तैनात कर्मियों को निकाल दिया गया है। इस मामले में विश्वविद्यालय प्रशासन को निर्णय करना है।
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जुड़े हैं 8000 किसान
कृषि विज्ञान केंद्र सोहाना से जिले के अलावा सीमावर्ती जनपद संतकबीरनगर, बस्ती, बलरामपुर और गोरखपुर के किसानों को भी फायदा मिल रहा था। 55 ग्रुपों के माध्यम से 8000 किसानों को जानकारी भेजी जा रही थी, जबकि प्रगतिशील किसान टेलीफोन के माध्यम से मौसम के अनुसार खेती करते थे। बुवाई के सीजन में कदम आगे बढ़ाने से किसान हिचक रहे हैं, क्योंकि उन्हें बारिश का पूर्वानुमान नहीं मिल पा रहा है।
प्रभावित हैं सात जिले
आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय कुमारगंज अयोध्या के अंतर्गत सात कृषि विज्ञान केंद्रों में ग्रामीण कृषि मौसम सेवा परियोजना जारी है। इनमें प्रदेश के गोरखपुर, आजमगढ़, चंदौली, बलरामपुर, जौनपुर, सिद्धार्थनगर एवं सोनभद्र जिला शामिल है। दो वर्ष तक प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले मौसम विशेषज्ञ एवं पर्यवेक्षक के पदों पर नई नियुक्ति के विज्ञापन जारी होने के बाद मौसम की जानकारी देने का कार्य अचानक बाधित हो गया है।