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Siddharthnagar News: भलाई और इंसाफ के रास्ते पर चलने की सीख देता है कुरान
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मोहर्रम की छठवीं तारीख पर हल्लौर के इमामबाड़ा और घरों पर आयोजित हुई मरसिया मजलिस
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। डुमरियागंज तहसील क्षेत्र के कस्बा हल्लौर में मोहर्रम को लेकर इमामबारगाह और लोगों के घरों पर मरसिया मजलिस का सिलसिला जारी है। मौलाना और जाकिर हजरत इमाम हुसैन के नेकी, भलाई के पैगाम और कर्बला की दास्तान पर विस्तार से रोशनी डाल रहे हैं। मजलिस में भारी संख्या में अकीदतमंद शामिल हो रहे हैं।
मोहर्रम की छठवीं तारीख पर मंगलवार सुबह इमामबाड़ा सेठ बाबा मरहूम में मजलिस-ए-अजा का आयोजन किया गया। जाकिर जमाल हैदर करबलाई ने कहा कि अगर इंसान और समाज मोहब्बत का असली मतलब समझ कर अमल करे तो आपसी मतभेद समाप्त हो जाएंगे। कुरान भी हमें यही सिखाती है। अल्लाह की इच्छा है कि आखिरी नबी के बताए रास्ते पर सब एक साथ चलें और मानवता के साथ-साथ धर्म और ईमान को सुरक्षित रखें।
उन्होंने कहा कि हमारा मजलिसों में जाना और अपने-अपने जरूरी कामों को छोड़कर धार्मिक चर्चा सुनने के लिए एकत्र होना। चाहे नौहे सलाम की शक्ल में हो या मजलिस और मर्सिया के रूप में। यह इस बात का सबूत है कि हम अहलेबैत की मोहब्बत को दिलों में और ज्यादा मजबूत करना चाहते हैं। जाकिर ने मजलिस के अंत में हजरत इमाम हसैन की शहादत को बयां किया। जिसे सुनकर सभी लोग रो पड़े। इस दौरान अकबर मेहंदी, मंजर इमाम, सैयद हसन एडवोकेट, काजिम करबलाई, फहीम हैदर, खुशत्तर मास्टर, जीशान हैदर आदि मौजूद रहे।
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संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। डुमरियागंज तहसील क्षेत्र के कस्बा हल्लौर में मोहर्रम को लेकर इमामबारगाह और लोगों के घरों पर मरसिया मजलिस का सिलसिला जारी है। मौलाना और जाकिर हजरत इमाम हुसैन के नेकी, भलाई के पैगाम और कर्बला की दास्तान पर विस्तार से रोशनी डाल रहे हैं। मजलिस में भारी संख्या में अकीदतमंद शामिल हो रहे हैं।
मोहर्रम की छठवीं तारीख पर मंगलवार सुबह इमामबाड़ा सेठ बाबा मरहूम में मजलिस-ए-अजा का आयोजन किया गया। जाकिर जमाल हैदर करबलाई ने कहा कि अगर इंसान और समाज मोहब्बत का असली मतलब समझ कर अमल करे तो आपसी मतभेद समाप्त हो जाएंगे। कुरान भी हमें यही सिखाती है। अल्लाह की इच्छा है कि आखिरी नबी के बताए रास्ते पर सब एक साथ चलें और मानवता के साथ-साथ धर्म और ईमान को सुरक्षित रखें।
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उन्होंने कहा कि हमारा मजलिसों में जाना और अपने-अपने जरूरी कामों को छोड़कर धार्मिक चर्चा सुनने के लिए एकत्र होना। चाहे नौहे सलाम की शक्ल में हो या मजलिस और मर्सिया के रूप में। यह इस बात का सबूत है कि हम अहलेबैत की मोहब्बत को दिलों में और ज्यादा मजबूत करना चाहते हैं। जाकिर ने मजलिस के अंत में हजरत इमाम हसैन की शहादत को बयां किया। जिसे सुनकर सभी लोग रो पड़े। इस दौरान अकबर मेहंदी, मंजर इमाम, सैयद हसन एडवोकेट, काजिम करबलाई, फहीम हैदर, खुशत्तर मास्टर, जीशान हैदर आदि मौजूद रहे।
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