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Siddharthnagar News: सरकारी कॉलेज न होने से भटक रहे विद्यार्थी
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फोटो-
-लोटन ब्लॉक में विज्ञान से नहीं है सरकारी कॉलेज
-गरीब परिवार की लड़कियों की पढ़ाई फीस के अभाव में हो जाती है बंद
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। लोटन ब्लॉक में राजकीय इंटर कॉलेज न होने के कारण छात्र-छात्राओं को पढ़ाई के लिए भटकना पड़ता है। कस्बे में एकमात्र प्राइवेट इंटर कॉलेज है, जिसमें पढ़ने के लिए दूर-दूराज के सैकड़ों छात्र आते हैं, लेकिन निजी विद्यालय की फीस अधिक होने से कई अभिभावक कक्षा आठ के बाद बच्चों की पढ़ाई बंद करा देते हैं।
विद्यार्थियों से लेकर अभिभावकों ने संबंधित अधिकारियों से कई बार सरकारी इंटर कॉलेज खुलवाने की मांग की, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। स्थानीय लोगों का कहना है कि कस्बा में विज्ञान वर्ग से एक ही इंटर कॉलेज है, ग्रामीण क्षेत्र से आने वाली कई बालिकाओं की पढ़ाई तो कक्षा आठ के बाद ही बंद हो जाती है। बालिका इंटर कॉलेज नहीं होने के कारण कुछ गरीब परिवार अपनी बच्चियों को प्राइवेट कॉलेजों में नहीं पढ़ा पाते।
अधिकांश लोगों की जीविका का साधन कृषि है। कोई इंटर कॉलेज न होने से दूरदराज से आने वाले विद्यार्थियों को परेशानी का सामना करना पड़ता है, इसलिए आठ के बाद ही पढ़ाई बंद हो जाती है। जबकि राजकीय कॉलेज में पढ़ाई करने के लिए छात्रों को 25 किमी दूर जिला मुख्यालय पर आना पड़ता है। वही बच्चियों को अकेले भेजने के डर से कई अभिभावक अपने छात्र की पढ़ाई बाधित करते है।
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सरकारी इंटर कॉलेज न होने से प्राइवेट कॉलेज में विद्यार्थियों की अधिक संख्या हो जाती है, एडमिशन लेने में दिक्कत होता है।
-नीरज कुमार, छात्र
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कोई इंटर कॉलेज न होने से अभिभावक कक्षा आठ के बाद उनकी पढ़ाई बंद करा देते हैं, इसलिए जीजीआईसी खुलना बेहद जरूरी है।
-निशा वरुण, छात्रा
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-लोटन ब्लॉक में विज्ञान से नहीं है सरकारी कॉलेज
-गरीब परिवार की लड़कियों की पढ़ाई फीस के अभाव में हो जाती है बंद
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। लोटन ब्लॉक में राजकीय इंटर कॉलेज न होने के कारण छात्र-छात्राओं को पढ़ाई के लिए भटकना पड़ता है। कस्बे में एकमात्र प्राइवेट इंटर कॉलेज है, जिसमें पढ़ने के लिए दूर-दूराज के सैकड़ों छात्र आते हैं, लेकिन निजी विद्यालय की फीस अधिक होने से कई अभिभावक कक्षा आठ के बाद बच्चों की पढ़ाई बंद करा देते हैं।
विद्यार्थियों से लेकर अभिभावकों ने संबंधित अधिकारियों से कई बार सरकारी इंटर कॉलेज खुलवाने की मांग की, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। स्थानीय लोगों का कहना है कि कस्बा में विज्ञान वर्ग से एक ही इंटर कॉलेज है, ग्रामीण क्षेत्र से आने वाली कई बालिकाओं की पढ़ाई तो कक्षा आठ के बाद ही बंद हो जाती है। बालिका इंटर कॉलेज नहीं होने के कारण कुछ गरीब परिवार अपनी बच्चियों को प्राइवेट कॉलेजों में नहीं पढ़ा पाते।
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अधिकांश लोगों की जीविका का साधन कृषि है। कोई इंटर कॉलेज न होने से दूरदराज से आने वाले विद्यार्थियों को परेशानी का सामना करना पड़ता है, इसलिए आठ के बाद ही पढ़ाई बंद हो जाती है। जबकि राजकीय कॉलेज में पढ़ाई करने के लिए छात्रों को 25 किमी दूर जिला मुख्यालय पर आना पड़ता है। वही बच्चियों को अकेले भेजने के डर से कई अभिभावक अपने छात्र की पढ़ाई बाधित करते है।
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सरकारी इंटर कॉलेज न होने से प्राइवेट कॉलेज में विद्यार्थियों की अधिक संख्या हो जाती है, एडमिशन लेने में दिक्कत होता है।
-नीरज कुमार, छात्र
कोई इंटर कॉलेज न होने से अभिभावक कक्षा आठ के बाद उनकी पढ़ाई बंद करा देते हैं, इसलिए जीजीआईसी खुलना बेहद जरूरी है।
-निशा वरुण, छात्रा