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Siddharthnagar News: स्टेशन पहुंचे तो पता चला ट्रेन निरस्त, निजी वाहन चालकों ने वसूला ढाई गुना किराया
Fri, 13 Oct 2023 11:18 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Fri, 13 Oct 2023 11:18 PM IST
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रेलवे स्टेशन सिद्धार्थनगर पर ट्रेन की इंतजार में बैठे यात्री। संवाद
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गोरखपुर-लखनऊ के बीच चलने वाली कई ट्रेनें निरस्त हैं, रोडवेज और निजी स्टैंड तक लगाने पड़े चक्कर
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। गोरखपुर-गोंडा वाया लखनऊ को जाने वाली नकहा जंगल-गोमतीनगर एक्सप्रेस शुक्रवार दोपहर में निरस्त हो गई। सिद्धार्थनगर रेलवे स्टेशन से यात्रा करने वाले यात्रियों को जानकारी हुई तो वे परेशान हो गए। यात्री काउंटर और स्टेशन अधीक्षक के पास जाकर जानकारी लेते हुए दिखे। वहीं, ट्रेन के निरस्त होने की जानकारी निजी वाहन चालकों को पहले से थी। इन्होंने सवारियों से ढाई गुना अधिक किराया लिया।
ट्रेन निरस्त होने की सूचना पर लखनऊ की यात्रा करने वाले यात्री रोडवेज चले गए। वहीं, गोंडा के बीच यात्रा करने वाले निजी वाहनों से जाते हुए दिखे। सिद्धार्थनगर रेलवे स्टेशन की पड़ताल गई तो पता चला कि कोई नेपाल से आया था तो कई महराजगंज से। बच्चों और महिलाओं को लेकर लोग परेशान रहे। विवश होकर प्राइवेट वाहन चालकों को मुंहमांगा किराया देकर आगे बढ़े।
हालांकि, रेलवे प्रशासन की ओर से पहले ही इस संबंध में सूचना दे दी गई थी। लेकिन इस सूचना की जानकारी तो समाचार पत्र पढ़ने वाले ही जान सके। बाकी 50 प्रतिशत यात्री आकस्मिक यात्रा वाले होते हैं, जो इस बात से अनजान थे और उन्हें परेशान होना पड़ा।
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गोंडा-लखनऊ रेलखंड पर स्थित बुढ़वल जंक्शन के पास ट्रैक पर कार्य हो रहा है। इस कार्य को देखते हुए शेड्यूल बनाकर गोरखपुर से सिद्धानगर बढ़नी के रास्ते गोंडा और लखनऊ जाने वाली कई ट्रेनें 13 से 19 अक्तूबर के बीच निरस्त कर दी गई हैं।
तय शेड्यूल के हिसाब से ट्रेनों को बंद किया जा रहा है। दोपहर में नकहा जंगल से गोमतीनगर जाने वाली ट्रेन निरस्त रही। ट्रेन के समय को देखते हुए गोंडा और लखनऊ तक यात्रा करने वाले यात्री सिद्धार्थनगर रेलवे स्टेशन पर पहुंच रहे थे।
पड़ताल में पाया गया कि रेलवे की ओर से दीवार पर ट्रेन के निरस्त होने का नोटिस चस्पा किया गया था। यात्रियों का आना शुरू हो गया था। परिसर में बैठा एक व्यक्ति यात्रा करने के लिए आने वालों से यह पूछ रहा था कि कहां की यात्रा करनी है। जैसे यात्री बोले कि लखनऊ जाने वाली ट्रेन से यात्रा करनी है तो व्यक्ति बता रहा था कि ट्रेन निरस्त है। यात्रा करनी है तो रोडवेज जाइए।
यह सुनने के बाद कुछ लोग तो बिना सवाल के घूम जा रहे थे तो कुछ लोग पूछताछ केंद्र और स्टेशन अधीक्षक के पास चक्कर लगा रहे थे। वहीं, पहले से मुंह बाए खड़े निजी वाहन वाले बढ़नी तक यात्रा करने वाले यात्रियों को मुंहमांगे किराये पर बैठा रहे थे। साथ ही उनसे यह भी कहते दिखे कि उससे आगे की यात्रा का भी हम बंदोबस्त कर देंगे।
कोई नेपाल से आया था तो कोई महराजगंज और जनपद के किसी अन्य कोने से। हर किसी को ढाई गुना किराया देकर यात्रा करनी पड़ी। यात्रियों का कहना था कि अगर पता होता तो आते ही नहीं। एकाएक ट्रेन बंद नहीं करना चाहिए।
प्राइवेट वाहनों की हो गई चांदी
लखनऊ जाने वाली ट्रेन से बढ़नी और से जिला मुख्यालय पर इलाज कराने, न्यायालय और अन्य कार्य करने के लिए आने वाले 90 प्रतिशत लोग ट्रेन से आते हैं। काम करने के बाद उन्हें नकहा जंगल- गोमतीनगर एक्सप्रेस से जाने में सहूलियत मिल जाती है। महज 30 रुपये में वह बढ़नी पहुंच जाते हैं। वहीं, प्राइवेट वाहन अगर बढ़नी तक का मिला तो 70 रुपये नहीं तो शोहरतगढ़ से फिर बदले तो 90 रुपये एक व्यक्ति का एक तरफ का किराया लग जाता है। जैसा कि शुक्रवार को प्राइवेट वाहन चालक मांगते दिखे। वहीं, ट्रेन से जहां 95 रुपये में गोमतीनगर तक यात्री पहुंच जाता है। उसको रोडवेज से 480 रुपये तक किराया भरना पड़ा। हालांकि, लखनऊ के लिए प्राइवेट बस बांसी से चलती है।
पता होता तो रात में ही निकल गए होते
लखनऊ के मोहनलालगंज निवासी धर्मेंद्र और अनिल कुमार सिद्धार्थनगर में किसी स्थान पर ठेकेदार के साथ कार्य करते हैं। रेलवे स्टेशन से लौटकर रोडवेज पहुंचे। उन्होंने बताया कि 95 रुपये में ट्रेन से लखनऊ पहुंच जाते और समय से पहुंचते। लेकिन ट्रेन निरस्त है। अब रोडवेज से सफर करना पड़ रहा है। पहुंचने का समय निर्धारित नहीं है, किराया भी अधिक लगेगा। अगर जानकारी होती तो रात में ही निकल गए होते। जितने में जाएंगे, उतने किराये में दोबार आते और चले जाते।
सुबह ट्रेन से आई थी, स्टेशन पर पहुंची तो पता चला कि बंद है
बढ़नी निवासी महिला ने बताया कि उसकी बच्ची शिवानी का पैर टूट गया था। उसका इलाज कराने के लिए जिला अस्पताल में सुबह ट्रेन से आई थी। सोचा था कि दोपहर में आराम से चले जाएंगे। स्टेशन पहुंची तो पता चला कि बढ़नी जाने वाली ट्रेन नहीं जाएगी। टेंपो वाले 80 रुपये मांग रहे हैं। रोडवेज की बस पांच बजे है। किराया भी अधिक लगेगा और रात में घर पहुंचेगे। ट्रेन बंद होने से बड़ी समस्या हो गई है।
बच्चों को लेकर नेपाल से आ गई
नेपाल के पतरोपा से आई अजीरुनिशा के साथ उनके तीन बच्चे दो बैग और एक बोरी का बोझ था। उन्हें गोंडा तक जाना था। उन्होंने बताया कि तय समय पर स्टेशन पहुंचने के लिए वह बांसी तिराहे पर पहुंची। यहां से 30 रुपये देकर रेलवे स्टेशन पहुंची। यहां पता चला कि ट्रेन ही नहीं जाएगी। उन्होंने कहा कि अब सामान और बच्चों को लेकर कैसे रोडवेज तक जाएं। समझ में नहीं आ रहा है। रोडवेज से बस भी मिली तो रात में स्टेशन पर ही गुजारना पड़ेगा। ऐसा ही दर्द अन्य यात्रियों का भी रहा है।
बोले जिम्मेदार
ट्रेन के निरस्त होने की तिथिवार सूचना समाचार पत्र के जरिए देने के साथ ही पहले से ही नोटिस चस्पा करा दिया गया था। ताकि यात्रियों को यह जानकारी हो जाए कि 13-19 अक्तूबर के बीच कौन-कौन ट्रेनें निरस्त हुई हैं।
-डीके उपाध्याय, स्टेशन अधीक्षक सिद्धार्थनगर
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गोरखपुर-लखनऊ के बीच चलने वाली कई ट्रेनें निरस्त हैं, रोडवेज और निजी स्टैंड तक लगाने पड़े चक्कर
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। गोरखपुर-गोंडा वाया लखनऊ को जाने वाली नकहा जंगल-गोमतीनगर एक्सप्रेस शुक्रवार दोपहर में निरस्त हो गई। सिद्धार्थनगर रेलवे स्टेशन से यात्रा करने वाले यात्रियों को जानकारी हुई तो वे परेशान हो गए। यात्री काउंटर और स्टेशन अधीक्षक के पास जाकर जानकारी लेते हुए दिखे। वहीं, ट्रेन के निरस्त होने की जानकारी निजी वाहन चालकों को पहले से थी। इन्होंने सवारियों से ढाई गुना अधिक किराया लिया।
ट्रेन निरस्त होने की सूचना पर लखनऊ की यात्रा करने वाले यात्री रोडवेज चले गए। वहीं, गोंडा के बीच यात्रा करने वाले निजी वाहनों से जाते हुए दिखे। सिद्धार्थनगर रेलवे स्टेशन की पड़ताल गई तो पता चला कि कोई नेपाल से आया था तो कई महराजगंज से। बच्चों और महिलाओं को लेकर लोग परेशान रहे। विवश होकर प्राइवेट वाहन चालकों को मुंहमांगा किराया देकर आगे बढ़े।
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हालांकि, रेलवे प्रशासन की ओर से पहले ही इस संबंध में सूचना दे दी गई थी। लेकिन इस सूचना की जानकारी तो समाचार पत्र पढ़ने वाले ही जान सके। बाकी 50 प्रतिशत यात्री आकस्मिक यात्रा वाले होते हैं, जो इस बात से अनजान थे और उन्हें परेशान होना पड़ा।
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गोंडा-लखनऊ रेलखंड पर स्थित बुढ़वल जंक्शन के पास ट्रैक पर कार्य हो रहा है। इस कार्य को देखते हुए शेड्यूल बनाकर गोरखपुर से सिद्धानगर बढ़नी के रास्ते गोंडा और लखनऊ जाने वाली कई ट्रेनें 13 से 19 अक्तूबर के बीच निरस्त कर दी गई हैं।
तय शेड्यूल के हिसाब से ट्रेनों को बंद किया जा रहा है। दोपहर में नकहा जंगल से गोमतीनगर जाने वाली ट्रेन निरस्त रही। ट्रेन के समय को देखते हुए गोंडा और लखनऊ तक यात्रा करने वाले यात्री सिद्धार्थनगर रेलवे स्टेशन पर पहुंच रहे थे।
पड़ताल में पाया गया कि रेलवे की ओर से दीवार पर ट्रेन के निरस्त होने का नोटिस चस्पा किया गया था। यात्रियों का आना शुरू हो गया था। परिसर में बैठा एक व्यक्ति यात्रा करने के लिए आने वालों से यह पूछ रहा था कि कहां की यात्रा करनी है। जैसे यात्री बोले कि लखनऊ जाने वाली ट्रेन से यात्रा करनी है तो व्यक्ति बता रहा था कि ट्रेन निरस्त है। यात्रा करनी है तो रोडवेज जाइए।
यह सुनने के बाद कुछ लोग तो बिना सवाल के घूम जा रहे थे तो कुछ लोग पूछताछ केंद्र और स्टेशन अधीक्षक के पास चक्कर लगा रहे थे। वहीं, पहले से मुंह बाए खड़े निजी वाहन वाले बढ़नी तक यात्रा करने वाले यात्रियों को मुंहमांगे किराये पर बैठा रहे थे। साथ ही उनसे यह भी कहते दिखे कि उससे आगे की यात्रा का भी हम बंदोबस्त कर देंगे।
कोई नेपाल से आया था तो कोई महराजगंज और जनपद के किसी अन्य कोने से। हर किसी को ढाई गुना किराया देकर यात्रा करनी पड़ी। यात्रियों का कहना था कि अगर पता होता तो आते ही नहीं। एकाएक ट्रेन बंद नहीं करना चाहिए।
प्राइवेट वाहनों की हो गई चांदी
लखनऊ जाने वाली ट्रेन से बढ़नी और से जिला मुख्यालय पर इलाज कराने, न्यायालय और अन्य कार्य करने के लिए आने वाले 90 प्रतिशत लोग ट्रेन से आते हैं। काम करने के बाद उन्हें नकहा जंगल- गोमतीनगर एक्सप्रेस से जाने में सहूलियत मिल जाती है। महज 30 रुपये में वह बढ़नी पहुंच जाते हैं। वहीं, प्राइवेट वाहन अगर बढ़नी तक का मिला तो 70 रुपये नहीं तो शोहरतगढ़ से फिर बदले तो 90 रुपये एक व्यक्ति का एक तरफ का किराया लग जाता है। जैसा कि शुक्रवार को प्राइवेट वाहन चालक मांगते दिखे। वहीं, ट्रेन से जहां 95 रुपये में गोमतीनगर तक यात्री पहुंच जाता है। उसको रोडवेज से 480 रुपये तक किराया भरना पड़ा। हालांकि, लखनऊ के लिए प्राइवेट बस बांसी से चलती है।
पता होता तो रात में ही निकल गए होते
लखनऊ के मोहनलालगंज निवासी धर्मेंद्र और अनिल कुमार सिद्धार्थनगर में किसी स्थान पर ठेकेदार के साथ कार्य करते हैं। रेलवे स्टेशन से लौटकर रोडवेज पहुंचे। उन्होंने बताया कि 95 रुपये में ट्रेन से लखनऊ पहुंच जाते और समय से पहुंचते। लेकिन ट्रेन निरस्त है। अब रोडवेज से सफर करना पड़ रहा है। पहुंचने का समय निर्धारित नहीं है, किराया भी अधिक लगेगा। अगर जानकारी होती तो रात में ही निकल गए होते। जितने में जाएंगे, उतने किराये में दोबार आते और चले जाते।
सुबह ट्रेन से आई थी, स्टेशन पर पहुंची तो पता चला कि बंद है
बढ़नी निवासी महिला ने बताया कि उसकी बच्ची शिवानी का पैर टूट गया था। उसका इलाज कराने के लिए जिला अस्पताल में सुबह ट्रेन से आई थी। सोचा था कि दोपहर में आराम से चले जाएंगे। स्टेशन पहुंची तो पता चला कि बढ़नी जाने वाली ट्रेन नहीं जाएगी। टेंपो वाले 80 रुपये मांग रहे हैं। रोडवेज की बस पांच बजे है। किराया भी अधिक लगेगा और रात में घर पहुंचेगे। ट्रेन बंद होने से बड़ी समस्या हो गई है।
बच्चों को लेकर नेपाल से आ गई
नेपाल के पतरोपा से आई अजीरुनिशा के साथ उनके तीन बच्चे दो बैग और एक बोरी का बोझ था। उन्हें गोंडा तक जाना था। उन्होंने बताया कि तय समय पर स्टेशन पहुंचने के लिए वह बांसी तिराहे पर पहुंची। यहां से 30 रुपये देकर रेलवे स्टेशन पहुंची। यहां पता चला कि ट्रेन ही नहीं जाएगी। उन्होंने कहा कि अब सामान और बच्चों को लेकर कैसे रोडवेज तक जाएं। समझ में नहीं आ रहा है। रोडवेज से बस भी मिली तो रात में स्टेशन पर ही गुजारना पड़ेगा। ऐसा ही दर्द अन्य यात्रियों का भी रहा है।
बोले जिम्मेदार
ट्रेन के निरस्त होने की तिथिवार सूचना समाचार पत्र के जरिए देने के साथ ही पहले से ही नोटिस चस्पा करा दिया गया था। ताकि यात्रियों को यह जानकारी हो जाए कि 13-19 अक्तूबर के बीच कौन-कौन ट्रेनें निरस्त हुई हैं।
-डीके उपाध्याय, स्टेशन अधीक्षक सिद्धार्थनगर