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Siddharthnagar News: सरकारी बसें जितना गड़गड़ाती हैं, उतनी ही दौड़ती हैं निजी बसें
Mon, 19 Jun 2023 01:24 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Mon, 19 Jun 2023 01:24 AM IST
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रोडवेज सिद्धार्थनगर के गैराज में खड़ी जर्जर बसें। संवाद
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सिद्धार्थनगर। टूटी खिड़कियां, जाम शीशा, फटा सीट कवर और खड़खड़ाती आवाज ही रोडवेज बसों की पहचान हो गई है, जिससे यात्री इन बसों पर बैठने से कतराते है। वहीं बेहतर सुविधा के चलते निजी बसों में यात्रियों की भीड़ रहती है। यात्रियों का कहना है कि रोडवेज ने किराया बढ़ाया लेकिन सुविधाएं नहीं बढ़ाईं। इससे अब निजी बसों से ही यात्रा करना मुफीद लगता है।
सिद्धार्थनगर डिपो के बेड़े में वर्तमान में 52 बसें शामिल है। इनमें आठ नईं बसें शामिल हुई हैं, इसके बावजूद सरकारी बसें जितनी गड़गड़ाती हैं, निजी बसें उतनी ज्यादा दौड़ती हैं। लिहाजा उनकी मोटी कमाई भी होती है। रोडवेज के बेड़े में जो बसें हैं उनमें ज्यादातर पुरानी हो चुकी हैं। कई बसों की खिड़कियां टूटी हुई हैं और शीशे जाम रहते हैं। यात्री उमाशंकर का कहना है कि गोरखपुर से बढनी तक रोडवेज बस से यात्रा के दौरान उड़ रही धूल से बचने के लिए शीशा बंद करना चाहा तो जाम होने के कारण बंद नहीं कर सके। जिससे पूरे रास्ते धूल और धूप झेलते हुए यात्रा करनी पड़ी। वहीं यहां से चाहे लखनऊ जाना हो या कानपुर, दिल्ली हो या जयपुर सभी जगहों के लिए निजी बसें बांसी और डुमरियागंज चौराहे से मिल रही हैं। इन निजी बसों की सीट बेहतर होने के साथ ही अन्य सुविधाएं भी ठीक होती है। जिससे इनको प्रतिदिन सवारी मिलने में कोई दिक्कत नहीं होती है।
रोडवेज बस से बस्ती से आने के दौरान सड़क दुरुस्त होने के बावजूद पूरे रास्ते तेज आवाज होती रही जिससे यात्रा के दौरान परेशानी हो रही थी। जबकि इसके पहले निजी बस से यहां आने में कोई दिक्कत नहीं हुई थी।
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- नीरज, यात्री
निजी बसों में बेहतर सुविधा होने के कारण अक्सर उसी से यात्रा करते है, सरकारी से गोरखपुर अथवा कही भी यात्रा करने में असुविधा होती है। सरकार को रोडवेज बसों में यात्री सुविधाएं बढ़ानी चाहिए।
- डब्लू, यात्री
फायदा उठा रहे निजी बस संचालक
रोडवेज बसों में बेहतर सुविधा नहीं होने का फायदा निजी बस संचालक उठा रहे है। इस कारण बांसी एवं डुमरियागंज के साथ ही बढ़नी से निजी बस महंगे किराया लेने के बावजूद यात्री सुविधाएं दे रहे हैं। इससे उनको फायदा हो रहा है। यात्री कहते है कि रोडवेज की बसें आरामदायक नहीं होती हैं और समय भी ज्यादा लगाती हैं। जबकि निजी बसों में कई सुविधाएं अच्छी होती है।
रोडवेज बसों में यात्री सुविधाएं बढ़ाने के लिए उच्चाधिकारियों को अवगत कराया गया है, साथ ही इनकी मरम्मत भी कराई जा रही है, जिससे यात्रियों को कोई दिक्कत न हो।
- जगदीश, एआरएम, रोडवेज सिद्धार्थनगर
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सिद्धार्थनगर डिपो के बेड़े में वर्तमान में 52 बसें शामिल है। इनमें आठ नईं बसें शामिल हुई हैं, इसके बावजूद सरकारी बसें जितनी गड़गड़ाती हैं, निजी बसें उतनी ज्यादा दौड़ती हैं। लिहाजा उनकी मोटी कमाई भी होती है। रोडवेज के बेड़े में जो बसें हैं उनमें ज्यादातर पुरानी हो चुकी हैं। कई बसों की खिड़कियां टूटी हुई हैं और शीशे जाम रहते हैं। यात्री उमाशंकर का कहना है कि गोरखपुर से बढनी तक रोडवेज बस से यात्रा के दौरान उड़ रही धूल से बचने के लिए शीशा बंद करना चाहा तो जाम होने के कारण बंद नहीं कर सके। जिससे पूरे रास्ते धूल और धूप झेलते हुए यात्रा करनी पड़ी। वहीं यहां से चाहे लखनऊ जाना हो या कानपुर, दिल्ली हो या जयपुर सभी जगहों के लिए निजी बसें बांसी और डुमरियागंज चौराहे से मिल रही हैं। इन निजी बसों की सीट बेहतर होने के साथ ही अन्य सुविधाएं भी ठीक होती है। जिससे इनको प्रतिदिन सवारी मिलने में कोई दिक्कत नहीं होती है।
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रोडवेज बस से बस्ती से आने के दौरान सड़क दुरुस्त होने के बावजूद पूरे रास्ते तेज आवाज होती रही जिससे यात्रा के दौरान परेशानी हो रही थी। जबकि इसके पहले निजी बस से यहां आने में कोई दिक्कत नहीं हुई थी।
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- नीरज, यात्री
निजी बसों में बेहतर सुविधा होने के कारण अक्सर उसी से यात्रा करते है, सरकारी से गोरखपुर अथवा कही भी यात्रा करने में असुविधा होती है। सरकार को रोडवेज बसों में यात्री सुविधाएं बढ़ानी चाहिए।
- डब्लू, यात्री
फायदा उठा रहे निजी बस संचालक
रोडवेज बसों में बेहतर सुविधा नहीं होने का फायदा निजी बस संचालक उठा रहे है। इस कारण बांसी एवं डुमरियागंज के साथ ही बढ़नी से निजी बस महंगे किराया लेने के बावजूद यात्री सुविधाएं दे रहे हैं। इससे उनको फायदा हो रहा है। यात्री कहते है कि रोडवेज की बसें आरामदायक नहीं होती हैं और समय भी ज्यादा लगाती हैं। जबकि निजी बसों में कई सुविधाएं अच्छी होती है।
रोडवेज बसों में यात्री सुविधाएं बढ़ाने के लिए उच्चाधिकारियों को अवगत कराया गया है, साथ ही इनकी मरम्मत भी कराई जा रही है, जिससे यात्रियों को कोई दिक्कत न हो।
- जगदीश, एआरएम, रोडवेज सिद्धार्थनगर