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Siddharthnagar News: धुंध की चादर दे रही हवा में बढ़ते प्रदूषण की गवाही
Tue, 07 Nov 2023 01:11 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Tue, 07 Nov 2023 01:11 AM IST
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शहर के एनएच 28 के ओवर ब्रिज पर छाया धुंध। संवाद
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-बदलते मौसम में शहर पर छा जा रही है, नहीं होती है प्रदूषण की जांच, अफसर भी अनजान
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। शहर की हवा में प्रदूषण का रंग और गाढ़ा होता जा रहा है। इसकी गवाही दे रही है शहर के ऊपर छाई धूल और धुंध की चादर। नमी के कारण पाल्यूटेंट भारी होकर ऊपर नहीं उठ पा रहे हैं। इससे दिनभर धुंध छाई रह रही है। ऐसे में सजग नहीं रहेंगे तो बीमार होना तय है।
शहर में सोमवार की सुबह और शाम धुंध की चादर से शहर ढका रहा। सबसे ज्यादा असर खजुरिया रोड और रेलवे स्टेशन के पास सोहांस रोड पर दिखा। यहां उड़ती धूल, धुआं और आसमान से आ रहा कुहासा धुंध में बदल रहा है। इससे लोगों को सांस लेने में तकलीफ हो रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि नमी बढ़ने से धूल-धुआं के कारण धुंध छा रही है। जाड़े के मौसम में तापमान गिरने से नमी बढ़ जाती है। इस वजह से हवा में पाल्यूटेंट (प्रदूषण फैलाने वाले कारकों) का प्रसार धीमा हो जाता है। इससे उनका घनत्व बढ़ जाता है। उनके वायुमंडल की ऊपरी सतह में नहीं जा पाने के कारण हवा प्रदूषित होती जाती है। निर्माण कार्यों से उड़ने वाली धूल के अलावा वाहनों का धुआं, आग जलाने सहित अन्य कारणों से प्रदूषण बढ़ जाता है। इसका असर शहर में नजर आ रहा है।
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टहलने से करें परहेज
आसमान में धुंध होने से बादलों जैसा अहसास हो रहा था। पहले तो लोगों को लगा कि मौसम का मिजाज बिगड़ रहा है। फिर पता चला कि धूल और धुएं से उठे प्रदूषण की वजह से फिजां बदली है। विशेषज्ञों का कहना प्रदूषण वायुमंडल निचले स्तर पर है। शहर के डॉ. एमपी कसौधन ने बताया कि धुंध की स्थिति में सुबह-सवेरे टहलने जाने में स्वास्थ्य को लाभ पहुंचने के बजाय नुकसान हो सकता है।
धुंध से निपटने के दिए गए हैं निर्देश
शहरों में एयर क्वालिटी मॉनीटरिंग के निर्देश अपर मुख्य सचिव मनोज कुमार सिंह ने तीन नवंबर को जारी किए थे। उन्होंने गोरखपुर समेत 17 शहरों में धुंध बढ़ाने के कारणों की समीक्षा करके इस पर निगरानी रखने के लिए कहा था। ताकि लोगों को वायु प्रदूषण से बचाया जा सके।
पास भी कुछ नजर नहीं आया
सोमवार को शहर के रिहायशी इलाकों में धुंध कम रही। लेकिन जमुआर घाट के आसपास भरपूर असर दिखा। सुबह 8:00 बजे जमुआर घाट और पिठनी पुल के किनारे कुछ भी नजर नहीं आ रहा था। इमारतें छिप गई थीं। विशेषज्ञों ने बताया कि नवंबर और दिसंबर महीने में ऐसी स्थिति रहती है। वातावरण में नमी होने की वजह से प्रदूषण फैलाने वाले कारकों का आकार बढ़ जा रहा है। इससे परदा बन जा रहा है। इससे दृश्यता कम हो जा रही है। ताल के ऊपर खाली जगह है। यहां पर पानी से भी वाष्प उठता है। इस कारण नमी (आर्द्रता) शहर के अन्य हिस्सों की अपेक्षा यहां ज्यादा हो जाती है। इससे धुंध की स्थिति है। दिन में सूर्य की तपिश भी कम हुई है। इससे नमी सूख नहीं पा रही है। यह स्थिति आगे भी बनी रहेगी। इसी प्रकार शहर में अशोक मार्ग, उसका रोड एवं सोहांस रोड पर धुंध नजर आ रही है।
वातावरण में नमी के कारण एयर पॉल्यूटेंट बड़े आकार के हो जा रहे हैं। ये ऊपर नहीं उठ पा रहे हैं। इससे एक परत बन जा रही है। इसका घनत्व बढ़ने से अदृश्यता की स्थिति बन जाती है। जहां खाली स्थान और नमी है, वहां धुंध अधिक बनती है। अन्य जगहों पर सुबह और शाम को इसका असर नजर आ रहा है। नवंबर से लेकर दिसंबर तक ऐसे हालात बने रह सकते हैं।
- डॉ. टीएन सिंह, क्षेत्रीय प्रदूषण अधिकारी
शहर में नहीं बनती है एक्यूआई की रिपोर्ट
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के बस्ती कार्यालय में लैब नहीं है। इस कारण मंडल के तीनों जिलों सहित बलरामपुर में हवा और पानी के प्रदूषण की जांच नहीं हो रही है। क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी डॉ. टीएन सिंह ने बताया कि प्रयोगशाला बनाने के लिए प्रस्ताव भेजा गया है। प्रयोगशाला बनने के बाद जांच शुरू होगी। राज्य कृषि मौसम केंद्र के प्रभारी अतुल कुमार सिंह ने बताया कि कृषि विज्ञान केंद्र सोहना में स्थापित ऑटोमेटिक वेदर स्टेशन में एक्यूआई की रिपोर्ट नहीं तैयार होती है।
अस्थमा के रोगी रहे सावधान
फोटो--
धूल और धुएं के कारण जो धुंध छा रही है, वह अस्थमा रोगियों के लिए हानिकारक है। ऐसे मौसम में अस्थमा का अटैक आना सामान्य बात है। इसलिए अस्थमा के मरीज धुंध व धूल से बचें और अपनी नियमित दवाएं लेते रहें।
-डॉ. एमएन पाठक, मेडिसिन
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-बदलते मौसम में शहर पर छा जा रही है, नहीं होती है प्रदूषण की जांच, अफसर भी अनजान
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। शहर की हवा में प्रदूषण का रंग और गाढ़ा होता जा रहा है। इसकी गवाही दे रही है शहर के ऊपर छाई धूल और धुंध की चादर। नमी के कारण पाल्यूटेंट भारी होकर ऊपर नहीं उठ पा रहे हैं। इससे दिनभर धुंध छाई रह रही है। ऐसे में सजग नहीं रहेंगे तो बीमार होना तय है।
शहर में सोमवार की सुबह और शाम धुंध की चादर से शहर ढका रहा। सबसे ज्यादा असर खजुरिया रोड और रेलवे स्टेशन के पास सोहांस रोड पर दिखा। यहां उड़ती धूल, धुआं और आसमान से आ रहा कुहासा धुंध में बदल रहा है। इससे लोगों को सांस लेने में तकलीफ हो रही है।
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विशेषज्ञों का कहना है कि नमी बढ़ने से धूल-धुआं के कारण धुंध छा रही है। जाड़े के मौसम में तापमान गिरने से नमी बढ़ जाती है। इस वजह से हवा में पाल्यूटेंट (प्रदूषण फैलाने वाले कारकों) का प्रसार धीमा हो जाता है। इससे उनका घनत्व बढ़ जाता है। उनके वायुमंडल की ऊपरी सतह में नहीं जा पाने के कारण हवा प्रदूषित होती जाती है। निर्माण कार्यों से उड़ने वाली धूल के अलावा वाहनों का धुआं, आग जलाने सहित अन्य कारणों से प्रदूषण बढ़ जाता है। इसका असर शहर में नजर आ रहा है।
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टहलने से करें परहेज
आसमान में धुंध होने से बादलों जैसा अहसास हो रहा था। पहले तो लोगों को लगा कि मौसम का मिजाज बिगड़ रहा है। फिर पता चला कि धूल और धुएं से उठे प्रदूषण की वजह से फिजां बदली है। विशेषज्ञों का कहना प्रदूषण वायुमंडल निचले स्तर पर है। शहर के डॉ. एमपी कसौधन ने बताया कि धुंध की स्थिति में सुबह-सवेरे टहलने जाने में स्वास्थ्य को लाभ पहुंचने के बजाय नुकसान हो सकता है।
धुंध से निपटने के दिए गए हैं निर्देश
शहरों में एयर क्वालिटी मॉनीटरिंग के निर्देश अपर मुख्य सचिव मनोज कुमार सिंह ने तीन नवंबर को जारी किए थे। उन्होंने गोरखपुर समेत 17 शहरों में धुंध बढ़ाने के कारणों की समीक्षा करके इस पर निगरानी रखने के लिए कहा था। ताकि लोगों को वायु प्रदूषण से बचाया जा सके।
पास भी कुछ नजर नहीं आया
सोमवार को शहर के रिहायशी इलाकों में धुंध कम रही। लेकिन जमुआर घाट के आसपास भरपूर असर दिखा। सुबह 8:00 बजे जमुआर घाट और पिठनी पुल के किनारे कुछ भी नजर नहीं आ रहा था। इमारतें छिप गई थीं। विशेषज्ञों ने बताया कि नवंबर और दिसंबर महीने में ऐसी स्थिति रहती है। वातावरण में नमी होने की वजह से प्रदूषण फैलाने वाले कारकों का आकार बढ़ जा रहा है। इससे परदा बन जा रहा है। इससे दृश्यता कम हो जा रही है। ताल के ऊपर खाली जगह है। यहां पर पानी से भी वाष्प उठता है। इस कारण नमी (आर्द्रता) शहर के अन्य हिस्सों की अपेक्षा यहां ज्यादा हो जाती है। इससे धुंध की स्थिति है। दिन में सूर्य की तपिश भी कम हुई है। इससे नमी सूख नहीं पा रही है। यह स्थिति आगे भी बनी रहेगी। इसी प्रकार शहर में अशोक मार्ग, उसका रोड एवं सोहांस रोड पर धुंध नजर आ रही है।
वातावरण में नमी के कारण एयर पॉल्यूटेंट बड़े आकार के हो जा रहे हैं। ये ऊपर नहीं उठ पा रहे हैं। इससे एक परत बन जा रही है। इसका घनत्व बढ़ने से अदृश्यता की स्थिति बन जाती है। जहां खाली स्थान और नमी है, वहां धुंध अधिक बनती है। अन्य जगहों पर सुबह और शाम को इसका असर नजर आ रहा है। नवंबर से लेकर दिसंबर तक ऐसे हालात बने रह सकते हैं।
- डॉ. टीएन सिंह, क्षेत्रीय प्रदूषण अधिकारी
शहर में नहीं बनती है एक्यूआई की रिपोर्ट
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के बस्ती कार्यालय में लैब नहीं है। इस कारण मंडल के तीनों जिलों सहित बलरामपुर में हवा और पानी के प्रदूषण की जांच नहीं हो रही है। क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी डॉ. टीएन सिंह ने बताया कि प्रयोगशाला बनाने के लिए प्रस्ताव भेजा गया है। प्रयोगशाला बनने के बाद जांच शुरू होगी। राज्य कृषि मौसम केंद्र के प्रभारी अतुल कुमार सिंह ने बताया कि कृषि विज्ञान केंद्र सोहना में स्थापित ऑटोमेटिक वेदर स्टेशन में एक्यूआई की रिपोर्ट नहीं तैयार होती है।
अस्थमा के रोगी रहे सावधान
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धूल और धुएं के कारण जो धुंध छा रही है, वह अस्थमा रोगियों के लिए हानिकारक है। ऐसे मौसम में अस्थमा का अटैक आना सामान्य बात है। इसलिए अस्थमा के मरीज धुंध व धूल से बचें और अपनी नियमित दवाएं लेते रहें।
-डॉ. एमएन पाठक, मेडिसिन