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Siddharthnagar News: पीआईसीयू की सुरक्षा बढ़ी, अब खुले तारों से नहीं रहेगा हादसे का खतरा
Sun, 14 Jun 2026 12:26 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Sun, 14 Jun 2026 12:26 AM IST
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मेडिकल कॉलेज में 24 बेड यूनिट की बिजली व्यवस्था हुई अपग्रेड, अंडरग्राउंड की गई वायरिंग
सिद्धार्थनगर। गंभीर रूप से बीमार बच्चों के इलाज के लिए संचालित माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज की 24 बेड वाली पीडियाट्रिक इंटेंसिव केयर यूनिट (पीआईसीयू) को आधुनिक सुरक्षा मानकों के अनुरूप पूरी तरह अपग्रेड कर दिया गया है। लंबे समय से वार्ड में चली आ रही बिजली की अव्यवस्था और खुले तारों की समस्या को अब खत्म कर दिया गया है। सभी पुराने ओपन वायरिंग सिस्टम को हटाकर अंडरग्राउंड बिजली व्यवस्था लागू की गई है, जिससे स्पार्किंग और आग लगने जैसी संभावित घटनाओं पर काफी हद तक रोक लग सकेगी।
मेडिकल कॉलेज प्रशासन के अनुसार पीआईसीयू में नवजात शिशुओं और गंभीर रूप से बीमार बच्चों का निरंतर इलाज किया जाता है। यहां वेंटिलेटर, मल्टी-पैरामीटर मॉनिटर, ऑक्सीजन सपोर्ट सिस्टम सहित कई जीवन रक्षक उपकरण 24 घंटे सक्रिय रहते हैं। ऐसे में बिजली आपूर्ति में किसी भी तरह की बाधा सीधे मरीजों के जीवन के लिए खतरा बन सकती है।
पहले इस वार्ड में खुले तारों और पुरानी वायरिंग के कारण कई बार स्पार्किंग, तार जलने और धुआं निकलने जैसी घटनाएं सामने आ चुकी थीं। बारिश के मौसम में यह समस्या और भी गंभीर हो जाती थी, जिससे न केवल मरीजों बल्कि परिजनों और स्वास्थ्यकर्मियों में भी चिंता और दहशत का माहौल बन जाता था।
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इन्हीं समस्याओं को देखते हुए मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने पूरे पीआईसीयू की बिजली व्यवस्था को अपग्रेड करने का निर्णय लिया। इस दौरान पुराने और जर्जर तारों को हटाया गया और नई सुरक्षित वायरिंग को अंडरग्राउंड किया गया। इसके अलावा आवश्यक स्थानों पर आधुनिक सुरक्षा उपकरण भी लगाए गए हैं ताकि किसी भी तकनीकी खराबी की स्थिति में तत्काल नियंत्रण संभव हो सके।
प्रशासन का मानना है कि इस सुधार कार्य से वार्ड में न केवल सुरक्षा बढ़ेगी बल्कि इलाज की प्रक्रिया भी अधिक निर्बाध और सुचारु रूप से चल सकेगी। बिजली से जुड़ी किसी भी संभावित बाधा का प्रभाव अब सीधे मरीजों की देखभाल पर नहीं पड़ेगा।
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पीआईसीयू की पूरी वायरिंग को अंडरग्राउंड कर दिया गया है, जिससे स्पार्किंग जैसी घटनाओं की संभावना लगभग समाप्त हो जाएगी। भविष्य में अस्पताल के अन्य संवेदनशील वार्डों में भी इसी तरह के सुरक्षा सुधार कार्य किए जाएंगे ताकि मरीजों को और अधिक सुरक्षित एवं आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं मिल सकें।
- डॉ. राजेश मोहन, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज
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सिद्धार्थनगर। गंभीर रूप से बीमार बच्चों के इलाज के लिए संचालित माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज की 24 बेड वाली पीडियाट्रिक इंटेंसिव केयर यूनिट (पीआईसीयू) को आधुनिक सुरक्षा मानकों के अनुरूप पूरी तरह अपग्रेड कर दिया गया है। लंबे समय से वार्ड में चली आ रही बिजली की अव्यवस्था और खुले तारों की समस्या को अब खत्म कर दिया गया है। सभी पुराने ओपन वायरिंग सिस्टम को हटाकर अंडरग्राउंड बिजली व्यवस्था लागू की गई है, जिससे स्पार्किंग और आग लगने जैसी संभावित घटनाओं पर काफी हद तक रोक लग सकेगी।
मेडिकल कॉलेज प्रशासन के अनुसार पीआईसीयू में नवजात शिशुओं और गंभीर रूप से बीमार बच्चों का निरंतर इलाज किया जाता है। यहां वेंटिलेटर, मल्टी-पैरामीटर मॉनिटर, ऑक्सीजन सपोर्ट सिस्टम सहित कई जीवन रक्षक उपकरण 24 घंटे सक्रिय रहते हैं। ऐसे में बिजली आपूर्ति में किसी भी तरह की बाधा सीधे मरीजों के जीवन के लिए खतरा बन सकती है।
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पहले इस वार्ड में खुले तारों और पुरानी वायरिंग के कारण कई बार स्पार्किंग, तार जलने और धुआं निकलने जैसी घटनाएं सामने आ चुकी थीं। बारिश के मौसम में यह समस्या और भी गंभीर हो जाती थी, जिससे न केवल मरीजों बल्कि परिजनों और स्वास्थ्यकर्मियों में भी चिंता और दहशत का माहौल बन जाता था।
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इन्हीं समस्याओं को देखते हुए मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने पूरे पीआईसीयू की बिजली व्यवस्था को अपग्रेड करने का निर्णय लिया। इस दौरान पुराने और जर्जर तारों को हटाया गया और नई सुरक्षित वायरिंग को अंडरग्राउंड किया गया। इसके अलावा आवश्यक स्थानों पर आधुनिक सुरक्षा उपकरण भी लगाए गए हैं ताकि किसी भी तकनीकी खराबी की स्थिति में तत्काल नियंत्रण संभव हो सके।
प्रशासन का मानना है कि इस सुधार कार्य से वार्ड में न केवल सुरक्षा बढ़ेगी बल्कि इलाज की प्रक्रिया भी अधिक निर्बाध और सुचारु रूप से चल सकेगी। बिजली से जुड़ी किसी भी संभावित बाधा का प्रभाव अब सीधे मरीजों की देखभाल पर नहीं पड़ेगा।
पीआईसीयू की पूरी वायरिंग को अंडरग्राउंड कर दिया गया है, जिससे स्पार्किंग जैसी घटनाओं की संभावना लगभग समाप्त हो जाएगी। भविष्य में अस्पताल के अन्य संवेदनशील वार्डों में भी इसी तरह के सुरक्षा सुधार कार्य किए जाएंगे ताकि मरीजों को और अधिक सुरक्षित एवं आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं मिल सकें।
- डॉ. राजेश मोहन, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज