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Siddharthnagar News: ऑनलाइन शुल्क जमा करने के लिए भटकते रहे लोग, कई रजिस्ट्रियां अटकीं
Mon, 12 Jan 2026 10:37 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Mon, 12 Jan 2026 10:37 PM IST
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शहर के अशोक मार्ग पर उप निबंधक कार्यालय नौगढ़ सदर। संवाद
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- 20 हजार रुपये से अधिक की रजिस्ट्रेशन फीस ऑनलाइन जमा करना अनिवार्य
- दफ्तरों में रहा अव्यवस्था का माहौल, ग्रामीण इलाकों से आने वाले लोगों को हुई दिक्कत
- प्रतिदिन सौ से अधिक रजिस्ट्री, करीब 50 लाख रुपये जमा होता है राजस्व
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। रजिस्ट्री शुल्क को डिजिटल करने के सरकारी आदेश का असर पहले ही दिन उप निबंधक कार्यालयों में साफ दिखाई दिया। सोमवार से 20 हजार से अधिक की रजिस्ट्रेशन फीस को अनिवार्य रूप से ऑनलाइन जमा करने की व्यवस्था लागू होते ही जमीन की रजिस्ट्री कराने पहुंचे लोग असमंजस में पड़ गए। नकद भुगतान की उम्मीद लेकर पहुंचे ग्रामीणों को जब मौके पर ऑनलाइन अनिवार्यता की जानकारी मिली, तो कई रजिस्ट्रियां बीच में ही अटक गईं और दफ्तरों में अव्यवस्था का माहौल बन गया।
सोमवार को सिद्धार्थनगर उप निबंधक कार्यालय में रजिस्ट्री के लिए पहुंचे दर्जनों लोग काउंटर के बाहर खड़े नजर आए। किसी को ऑनलाइन भुगतान की प्रक्रिया समझ नहीं आ रही थी तो कोई साइबर कैफे की तलाश में बाहर निकलता दिखा। छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों में डिजिटल भुगतान की सीमित आदत के चलते नई व्यवस्था शुरुआती दौर में परेशानी का कारण बन रही है।
ग्रामीण क्षेत्रों से आए लोगों के लिए यह आदेश झटके जैसा साबित हुआ। स्मार्टफोन न होना, यूपीआई की जानकारी का अभाव और नेटवर्क की समस्या ने प्रक्रिया को और उलझा दिया। बुजुर्ग और पहली बार जमीन की रजिस्ट्री कराने आए लोग सबसे ज्यादा परेशान दिखे। कुछ लोगों ने साफ कहा कि अगर पहले से जानकारी होती, तो वे तैयारी करके आते।
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विभागीय कर्मचारियों ने बताया कि नई व्यवस्था का असर केवल आम नागरिकों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि रजिस्ट्री दफ्तरों में कामकाज की रफ्तार भी प्रभावित हुई है। कर्मचारियों को लगातार भुगतान प्रक्रिया समझानी पड़ रही है, जिससे पहले से सीमित स्टाफ पर दबाव बढ़ा है। नेटवर्क फेल होने और ऑनलाइन ट्रांजैक्शन अटकने के कारण भी कई मामलों में रजिस्ट्री आगे खिसकाई गई।
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यह हुआ बदलाव
- नई ऑनलाइन व्यवस्था संपत्ति लेनदेन को पारदर्शी, सुरक्षित और भ्रष्टाचार मुक्त बनाने के लिए जरूरी कदम है। विभागीय सूत्रों के मुताबिक डिजिटल भुगतान से सभी लेनदेन रिकॉर्ड में होंगे, जिससे अवैध वसूली की गुंजाइश कम होगी और पारिवारिक संपत्ति के बंटवारे जैसी प्रक्रियाएं सरल होंगी। इसके अलावा किरायानामा पर छूट और बिल्डर-क्रेता समझौते में स्पष्ट भुगतान नियम भी लागू किए गए हैं, ताकि लंबी अवधि में आम नागरिकों को लाभ मिले। सिद्धार्थनगर में सोमवार से यह व्यवस्था लागू की गई है।
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क्यों हुई परेशानी
- ग्रामीण इलाके से आने वाले लोग और बुजुर्ग ऑनलाइन भुगतान की प्रक्रिया समझ नहीं पा रहे हैं।
- मोबाइल, इंटरनेट और यूपीआई की जानकारी न होने के कारण कई रजिस्ट्रियां बीच में ही अटकी रहीं।
- साइबर कैफे की तलाश, नेटवर्क फेल और तकनीकी दिक्कतों से दफ्तरों में रहा अफरा-तफरी का माहौल।
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जिले में औसतन 100 रजिस्ट्री प्रतिदिन हो रही है। जिसमें करीब 50 लाख रुपये राजस्व प्रतिदिन जमा हो रहे हैं। एक प्रतिशत शुल्क को विभागीय खाते में जमा करने के बाद रजिस्ट्री की जा रही है। नई व्यवस्था से ज्यादा पारदर्शिता आएगी।
- ज्ञानेंद्र कुमार सिंह, एआईजी स्टांप
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- दफ्तरों में रहा अव्यवस्था का माहौल, ग्रामीण इलाकों से आने वाले लोगों को हुई दिक्कत
- प्रतिदिन सौ से अधिक रजिस्ट्री, करीब 50 लाख रुपये जमा होता है राजस्व
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। रजिस्ट्री शुल्क को डिजिटल करने के सरकारी आदेश का असर पहले ही दिन उप निबंधक कार्यालयों में साफ दिखाई दिया। सोमवार से 20 हजार से अधिक की रजिस्ट्रेशन फीस को अनिवार्य रूप से ऑनलाइन जमा करने की व्यवस्था लागू होते ही जमीन की रजिस्ट्री कराने पहुंचे लोग असमंजस में पड़ गए। नकद भुगतान की उम्मीद लेकर पहुंचे ग्रामीणों को जब मौके पर ऑनलाइन अनिवार्यता की जानकारी मिली, तो कई रजिस्ट्रियां बीच में ही अटक गईं और दफ्तरों में अव्यवस्था का माहौल बन गया।
सोमवार को सिद्धार्थनगर उप निबंधक कार्यालय में रजिस्ट्री के लिए पहुंचे दर्जनों लोग काउंटर के बाहर खड़े नजर आए। किसी को ऑनलाइन भुगतान की प्रक्रिया समझ नहीं आ रही थी तो कोई साइबर कैफे की तलाश में बाहर निकलता दिखा। छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों में डिजिटल भुगतान की सीमित आदत के चलते नई व्यवस्था शुरुआती दौर में परेशानी का कारण बन रही है।
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ग्रामीण क्षेत्रों से आए लोगों के लिए यह आदेश झटके जैसा साबित हुआ। स्मार्टफोन न होना, यूपीआई की जानकारी का अभाव और नेटवर्क की समस्या ने प्रक्रिया को और उलझा दिया। बुजुर्ग और पहली बार जमीन की रजिस्ट्री कराने आए लोग सबसे ज्यादा परेशान दिखे। कुछ लोगों ने साफ कहा कि अगर पहले से जानकारी होती, तो वे तैयारी करके आते।
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विभागीय कर्मचारियों ने बताया कि नई व्यवस्था का असर केवल आम नागरिकों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि रजिस्ट्री दफ्तरों में कामकाज की रफ्तार भी प्रभावित हुई है। कर्मचारियों को लगातार भुगतान प्रक्रिया समझानी पड़ रही है, जिससे पहले से सीमित स्टाफ पर दबाव बढ़ा है। नेटवर्क फेल होने और ऑनलाइन ट्रांजैक्शन अटकने के कारण भी कई मामलों में रजिस्ट्री आगे खिसकाई गई।
यह हुआ बदलाव
- नई ऑनलाइन व्यवस्था संपत्ति लेनदेन को पारदर्शी, सुरक्षित और भ्रष्टाचार मुक्त बनाने के लिए जरूरी कदम है। विभागीय सूत्रों के मुताबिक डिजिटल भुगतान से सभी लेनदेन रिकॉर्ड में होंगे, जिससे अवैध वसूली की गुंजाइश कम होगी और पारिवारिक संपत्ति के बंटवारे जैसी प्रक्रियाएं सरल होंगी। इसके अलावा किरायानामा पर छूट और बिल्डर-क्रेता समझौते में स्पष्ट भुगतान नियम भी लागू किए गए हैं, ताकि लंबी अवधि में आम नागरिकों को लाभ मिले। सिद्धार्थनगर में सोमवार से यह व्यवस्था लागू की गई है।
क्यों हुई परेशानी
- ग्रामीण इलाके से आने वाले लोग और बुजुर्ग ऑनलाइन भुगतान की प्रक्रिया समझ नहीं पा रहे हैं।
- मोबाइल, इंटरनेट और यूपीआई की जानकारी न होने के कारण कई रजिस्ट्रियां बीच में ही अटकी रहीं।
- साइबर कैफे की तलाश, नेटवर्क फेल और तकनीकी दिक्कतों से दफ्तरों में रहा अफरा-तफरी का माहौल।
जिले में औसतन 100 रजिस्ट्री प्रतिदिन हो रही है। जिसमें करीब 50 लाख रुपये राजस्व प्रतिदिन जमा हो रहे हैं। एक प्रतिशत शुल्क को विभागीय खाते में जमा करने के बाद रजिस्ट्री की जा रही है। नई व्यवस्था से ज्यादा पारदर्शिता आएगी।
- ज्ञानेंद्र कुमार सिंह, एआईजी स्टांप