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एमसीएच विंग में भर्ती होंगे मरीज, नहीं होगी बेड की किल्लत
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एमसीएच विंग में भर्ती होंगे मरीज, नहीं होगी बेड की किल्लत
सिद्धार्थनगर। माधव प्रसाद त्रिपाठी से संबद्ध महिला अस्पताल में अब बेड की किल्लत नहीं होगी। केएमसीएच विंग में मरीजों को भर्ती करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। मौसम में उतार-चढ़ाव या अन्य वजहों मरीजों की संख्या बढ़ने पर एक बेड पर दो-दो मरीजों को भर्ती करने की अब नौबत नहीं आएगी। मरीजों को इलाज में कठिनाई का सामना नहीं करना पड़ेगा। केएमसीएच विंग में वार्ड शुरू हो जाने से इलाज में आसानी की उम्मीद है।
एमसीएच विंग को जच्चा-बच्चा वार्ड बनाया जाएगा। स्त्री एवं प्रसूति रोग और शिशु रोग वार्ड एमसीएच विंग में शिफ्ट हो रहा है। इससे जिला अस्पताल के मुख्य भवन में मरीजों को भर्ती करने के लिए बेड की संख्या बढ़ जाएगी। जिले के लोगों को सेहतमंद रखने का जिम्मा संभाल रहे दो सौ बेड के जिला अस्पताल में मौसमी बीमारियां शुरू होने पर मरीजों को भर्ती करने में कठिनाई होती थी। बेड नहीं मिल पाते थे। कभी-कभी एक बेड पर दो मरीजों को लिटाकर ड्रिप लगानी पड़ती थी। अकसर देखा जाता था कि एक बेड पर कम उम्र के दो मरीजों को भर्ती कर दिया जाता था। इससे मरीजों को तो दिक्कत होती ही थी, चिकित्सक को भी परेशानी होती थी। अगर जाने-अनजाने में मरीज किसी संक्रामक बीमारी से पीड़ित है तो संक्रमण बढ़ने का खतरा रहता था। लेकिन अब यह मरीजों की यह समस्या दूर हो रही है। माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज से जिला अस्पताल के संबद्ध होने के बाद लगातार व्यवस्थाओं का विस्तार हो रहा है। मरीजों की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए खाली पड़े महिला अस्पताल एमसीएच विंग को सक्रिय कर दिया गया है। वार्ड में मरीजों को भर्ती करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। मरीजों की संख्या बढ़ने पर उन्हें भर्ती किया जाएगा। सभी सुविधाओं से लैस अस्पताल में भर्ती रोगियों को अब कोई खास दिक्कत नहीं होगी। स्वास्थ्य विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार, यह अस्पताल 500 बेड का है। ऐसे में इसके शुरू किए जाने से लोगों को सहूलियत मिलेगी।
जिला अस्पताल में बेड की स्थिति
एसएनसीयू वार्ड 22 बेड, पीआईसीयू वार्ड 15 बेड, सर्जिकल वार्ड 20 बेड का है। इसके लिए अलावा बर्न वार्ड, इमरजेंसी, जनरल वार्ड और लेबर रूम में महिलाओं के भर्ती करने के लिए बेड उपलब्ध हैं। अब तक अस्पताल में दो सौ बेड हैं। जरूरत पड़ने पर बेड की संख्या बढ़ा दी जाती है।
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अस्पताल में भर्ती किए जाने वाले गंभीर रोगियों की संख्या बढ़ने के बाद बेड की समस्या उत्पन्न हो जाती है। मरीजों को परेशानी न हो, इसके लिए एमसीएच विंग को सक्रिय कर दिया गया है। यहां पर मरीजों की भर्ती शुरू हो गई है। -डॉ. सलिल कुमार श्रीवास्तव, प्राचार्य डॉ. माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज सिद्धार्थनगर
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सिद्धार्थनगर। माधव प्रसाद त्रिपाठी से संबद्ध महिला अस्पताल में अब बेड की किल्लत नहीं होगी। केएमसीएच विंग में मरीजों को भर्ती करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। मौसम में उतार-चढ़ाव या अन्य वजहों मरीजों की संख्या बढ़ने पर एक बेड पर दो-दो मरीजों को भर्ती करने की अब नौबत नहीं आएगी। मरीजों को इलाज में कठिनाई का सामना नहीं करना पड़ेगा। केएमसीएच विंग में वार्ड शुरू हो जाने से इलाज में आसानी की उम्मीद है।
एमसीएच विंग को जच्चा-बच्चा वार्ड बनाया जाएगा। स्त्री एवं प्रसूति रोग और शिशु रोग वार्ड एमसीएच विंग में शिफ्ट हो रहा है। इससे जिला अस्पताल के मुख्य भवन में मरीजों को भर्ती करने के लिए बेड की संख्या बढ़ जाएगी। जिले के लोगों को सेहतमंद रखने का जिम्मा संभाल रहे दो सौ बेड के जिला अस्पताल में मौसमी बीमारियां शुरू होने पर मरीजों को भर्ती करने में कठिनाई होती थी। बेड नहीं मिल पाते थे। कभी-कभी एक बेड पर दो मरीजों को लिटाकर ड्रिप लगानी पड़ती थी। अकसर देखा जाता था कि एक बेड पर कम उम्र के दो मरीजों को भर्ती कर दिया जाता था। इससे मरीजों को तो दिक्कत होती ही थी, चिकित्सक को भी परेशानी होती थी। अगर जाने-अनजाने में मरीज किसी संक्रामक बीमारी से पीड़ित है तो संक्रमण बढ़ने का खतरा रहता था। लेकिन अब यह मरीजों की यह समस्या दूर हो रही है। माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज से जिला अस्पताल के संबद्ध होने के बाद लगातार व्यवस्थाओं का विस्तार हो रहा है। मरीजों की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए खाली पड़े महिला अस्पताल एमसीएच विंग को सक्रिय कर दिया गया है। वार्ड में मरीजों को भर्ती करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। मरीजों की संख्या बढ़ने पर उन्हें भर्ती किया जाएगा। सभी सुविधाओं से लैस अस्पताल में भर्ती रोगियों को अब कोई खास दिक्कत नहीं होगी। स्वास्थ्य विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार, यह अस्पताल 500 बेड का है। ऐसे में इसके शुरू किए जाने से लोगों को सहूलियत मिलेगी।
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जिला अस्पताल में बेड की स्थिति
एसएनसीयू वार्ड 22 बेड, पीआईसीयू वार्ड 15 बेड, सर्जिकल वार्ड 20 बेड का है। इसके लिए अलावा बर्न वार्ड, इमरजेंसी, जनरल वार्ड और लेबर रूम में महिलाओं के भर्ती करने के लिए बेड उपलब्ध हैं। अब तक अस्पताल में दो सौ बेड हैं। जरूरत पड़ने पर बेड की संख्या बढ़ा दी जाती है।
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अस्पताल में भर्ती किए जाने वाले गंभीर रोगियों की संख्या बढ़ने के बाद बेड की समस्या उत्पन्न हो जाती है। मरीजों को परेशानी न हो, इसके लिए एमसीएच विंग को सक्रिय कर दिया गया है। यहां पर मरीजों की भर्ती शुरू हो गई है। -डॉ. सलिल कुमार श्रीवास्तव, प्राचार्य डॉ. माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज सिद्धार्थनगर