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Siddharthnagar News: 20 हजार आबादी के बीच एक पीएचसी, वहां भी डॉक्टर नहीं
Wed, 11 Dec 2024 09:45 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Wed, 11 Dec 2024 09:45 AM IST
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प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र घोसियारी में मरीज के स्वास्थ्य की जानकारी लेते फार्मासिस्ट नूरुल हसन
घोसियारी। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र घोसियारी में स्वास्थ्य सेवा बदहाल हैं। चार माह से चिकित्सक की तैनाती न होने से 20 हजार की आबादी इलाज के लिए भटक रही है। फार्मासिस्ट इलाज कर रहे हैं।
वहीं, गंभीर समस्या होने पर बांसी और सामुदायिक स्वास्थ्य केंंद्र खेसरहा जाना पड़ता है। जहां जाने में समय तो लगता ही है, इसके साथ ही खर्च भी लग रहा है। डॉक्टर की तैनाती की लोग मांग भी कर चुके हैं, लेकिन जिम्मेदार इससे बेखबर हैं। बांसी तहसील के घोसियारी में 22 वर्ष पूर्व प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बनवाया गया, जिससे क्षेत्रीय लोगों में इसका लाभ मिल सके। लेकिन लगभग चार माह पूर्व अस्पताल पर तैनात चिकित्सक का स्थानांतरण हो जाने के कारण मरीजों के इलाज का जिम्मा फार्मासिस्ट पर आ गया है।
अस्पताल पर तैनात फार्मासिस्ट नूरूल हसन का कहना है कि 35 से 40 मरीज अस्पताल पर इलाज के लिए आते हैं। इस समय उल्टी, दस्त, बुखार, चर्मरोग के मरीज ज्यादा आ रहे हैं। इनका इलाज तो हो जा रहा है, लेकिन गंभीर समस्या वाले मरीजों को बांसी और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जाने को मजबूर हैं। बड़ी संख्या में क्षेत्र के लोगों को चिकित्सक न होने से बस्ती, सिद्धार्थनगर इलाज के लिए जाना पड़ रहा है। इलाज के लिए रुपए के साथ इधर-उधर भटकना पड़ रहा।
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वहीं, गंभीर समस्या होने पर बांसी और सामुदायिक स्वास्थ्य केंंद्र खेसरहा जाना पड़ता है। जहां जाने में समय तो लगता ही है, इसके साथ ही खर्च भी लग रहा है। डॉक्टर की तैनाती की लोग मांग भी कर चुके हैं, लेकिन जिम्मेदार इससे बेखबर हैं। बांसी तहसील के घोसियारी में 22 वर्ष पूर्व प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बनवाया गया, जिससे क्षेत्रीय लोगों में इसका लाभ मिल सके। लेकिन लगभग चार माह पूर्व अस्पताल पर तैनात चिकित्सक का स्थानांतरण हो जाने के कारण मरीजों के इलाज का जिम्मा फार्मासिस्ट पर आ गया है।
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अस्पताल पर तैनात फार्मासिस्ट नूरूल हसन का कहना है कि 35 से 40 मरीज अस्पताल पर इलाज के लिए आते हैं। इस समय उल्टी, दस्त, बुखार, चर्मरोग के मरीज ज्यादा आ रहे हैं। इनका इलाज तो हो जा रहा है, लेकिन गंभीर समस्या वाले मरीजों को बांसी और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जाने को मजबूर हैं। बड़ी संख्या में क्षेत्र के लोगों को चिकित्सक न होने से बस्ती, सिद्धार्थनगर इलाज के लिए जाना पड़ रहा है। इलाज के लिए रुपए के साथ इधर-उधर भटकना पड़ रहा।
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