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Siddharthnagar News: 70 करोड़ मजदूरी बकाया... भटक रहे डेढ़ लाख जाॅब कार्डधारक

Sat, 23 Mar 2024 11:40 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर Updated Sat, 23 Mar 2024 11:40 PM IST
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One and a half lakh job card holders are wandering
सिद्धार्थनगर। मनरेगा के तहत जिले में दो माह के अंदर हुए 2500 निर्माण कार्यों पर 70 करोड़ रुपये से अधिक मजदूरी का भुगतान नहीं हो पाया है। इससे जहां वह विकास कार्य अधूरे पड़े है, वहीं अन्य निर्माण कार्य भी ठप हो गए है। मजदूरी नहीं मिलने पर जाॅब कार्ड धारकों के तकादा से ग्राम पंचायतों में प्रधान व सचिव के साथ ही विभागीय अधिकारी परेशान है। कई गांवों में बकाया मजदूरी के चलते मनरेगा से सड़क, नाली व अन्य निर्माण कार्य बंद करा दिया गया है।
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मनरेगा के तहत 2023-24 वित्तीय वर्ष में जिले में 264.5 करोड़ खर्च कर विकास कार्य कराने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। इससे 115 लाख मानव दिवस सृजन करते हुए जिले के सभी 347978 जाॅबकार्ड धारकों को रोजगार देने का भी लक्ष्य निर्धारित था। इसके तहत जिले में 28 हजार निर्माण कार्यों की परियोजना तैयार की गई थी। वर्तमान में इनमें 2500 परियोजनाओं पर जनवरी 2024 से चल रहे निर्माण कार्य के तहत 3043478 मानव दिवस सृजित हुआ है। जिसके सापेक्ष यहां कार्य करने वाले डेढ़ लाख मनरेगा जाॅबकार्ड धारकों का 70 करोड़ रुपये मजदूरी की धनराशि बकाया है। इन परियोजनाओं पर कार्य करने वाले मनरेगा श्रमिकों का अब तक मजदूरी भुगतान नहीं होने से एक तरफ जहां श्रमिक परेशान है वहीं कार्यदाई संस्थाएं भी सांसत में है। जिससे कार्यदाई संस्थाओं ने निर्मित होने वाले सड़क, नाली व अन्य निर्माण कार्य बंद कर दिया है। जबकि मनरेगा श्रमिक भुगतान पाने के लिए संबंधित प्रधान एवं कार्यदाई संस्था के अधिकारियों के पास गुहार लगाते दिख रहे है।
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मनरेगा का फीका रहेगा रंगों का होली पर्व
जिले में सक्रिय चल रहे 291224 मनरेगा जाॅबकार्ड धारक में वर्तमान में डेढ़ लाख से अधिक श्रमिक इन कार्यों पर मजदूरी किए है। जिसका भुगतान नहीं होने पर उनके सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। होली त्योहार नजदीक होने के कारण भी उन पर परिवार का भी दबाव है। जोगिया क्षेत्र के मनरेगा जाब कार्ड धारक किशुन व रामचरन का कहना है कि होली में बच्चों ने पिचकारी, रंग और पत्नी ने मिठाई खरीदने को कहा था, लेकिन मजदूरी नहीं मिलने से यह संभव नहीं दिख रहा है। वहीं खेसरहा के बुद्धु और राकेश का कहना था कि होली में बच्चों को कपड़ा खरीदना था, लेकिन मजदूरी नहीं मिलने से त्योहार फीका रहेगा।
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तो रुक जाएंगे बांध व कटान स्थलों के मरम्मत
मनरेगा के तहत जिले में पांच सौ किमी लंबे 39 बंधों एव नदियों के कटान स्थलों पर भी बचाव एवं मरम्मत कार्य कराए जा रहे है। दो माह से मजदूरी भुगतान नहीं होने से मनरेगा के तहत हो रहे यह निर्माण कार्य बंद होने के कगार पर पहुंच गए है। जबकि जून माह से ही मानसून की शुरूआत होने से बारिश के कारण जिले में बाढ़ का खतरा रहता है। जिसमें मात्र दो माह शेष बचे है। बीते वर्ष बाढ़ से जिले में भयावह तबाही मची थी और पांच बांध टूटने से कई गांव जलमग्न हो गए थे। इस वर्ष भी जर्जर बांधों का मरम्मत नहीं होने से बारिश के मौसम में बाढ़ से तबाही का खतरा मंडरा रहा है।
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1136 गांवों में ठप पड़ गए है निर्माण कार्य
मनरेगा मजदूरी भुगतान नहीं होने से जिले के सभी 14 ब्लॉकों के 1136 ग्राम पंचायतों में सड़क, नाली, पोखरों का सुदंरीकरण समेत अन्य निर्माण कार्य ठप हो गए है। उसका ब्लॉक में मंझरिया, छितरापार, कुआहाटा, तिघरा, चुरिहारी व महुलानी समेत कई गांवों में मजदूरी नहीं मिलने के कारण मनरेगा जाॅबकार्ड धारक कार्य करने से कतराने लगे है। वह प्रधान और संबंधित ग्राम सचिव के घर मजदूरी के लिए चक्कर लगाते दिख रहे है। इससे परेशान प्रधान व सचिव अन्य निर्माण कार्य में हाथ नहीं डाल रहे है, उनका कहना है कि जब तक पुराने कार्य का मजदूरी भुगतान नहीं होता, तब तक दूसरा कार्य नहीं हो सकेगा।

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मनरेगा कार्य करने के बाद भी अब तक मजदूरी नहीं मिली, जबकि दो दिन बाद ही होली त्योहार है, आर्थिक तंगी के कारण त्योहार फीका रहेगा।
झिनकन, सेमरा बनकसिया


उम्मीद थी कि त्योहार के पहले मजदूरी मिल जाएगा तो परिवार व बच्चों के साथ होली अच्छे से मनाएंगे, लेकिन भुगतान नहीं होने से निराशा है।
त्रिभुवन, सेमरा बनकसिया
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मनरेगा श्रमिकों के मजदूरी भुगतान के लिए डीएम एवं सीडीओ के माध्यम से शासन से पत्राचार करने के अलावा नियमानुसार विभागीय प्रक्रिया की जा रही है। अब तक 18 जनवरी तक की मजदूरी के फीडिंग की जानकारी है, जल्द सभी मनरेगा जाॅबकार्ड धारकों के मजदूरी का भुगतान हो जाएगा।
रविशंकर पांडेय, डीसी मनरेगा
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