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‘न्याय दिलाने के लिए अफसर सजग रहें’
Mon, 04 Mar 2019 11:07 PM IST
राकेश पांडेय
siddharthnagar
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Published by: राकेश पांडेय
Updated Mon, 04 Mar 2019 11:07 PM IST
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बजहा में पहुंचे पूर्व डीजीपी।
- फोटो : amar ujala
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सिद्धार्थनगर। अनुसूचित जाति, जनजाति के मामलों को गंभीरता से लेने की आवश्यकता है। अनावश्यक रूप से प्रताड़ित करने की शिकायत मिली तो जांच के बाद दोषी के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। न्याय दिलाने के लिए अफसरों को सजग रहने की जरूरत है। उपरोक्त बातें उत्तर प्रदेश आयोग के अध्यक्ष व प्रदेश के पूर्व डीजीपी बृज लाल ने कहीं। वह सोमवार को नेपाल सीमा से सटे शोहरतगढ़ विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत बजहा स्थित प्राथमिक विद्यालय में आयोजित समीक्षा बैठक, चौपाल कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि अनुसूचित जाति, जनजाति के हक व अधिकार दिलाने के लिए योगी सरकार कृत संकल्पित है। इस कार्य में किसी भी स्तर पर कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उनके लिए लागू योजनाओं व कार्यक्रमों का शत-प्रतिशत क्रियान्वयन के लिए दृढ़ संकल्प के साथ अधिकारियों को तत्पर होना पड़ेगा। कहा कि शिकायत मिलने के बाद त्वरित निदान के लिए अविलंब निस्ताण करने की प्रक्रिया तेज की जाए। आयोग के अध्यक्ष ने प्राथमिक विद्यालय बजहा के रंगरोगन, स्लोगन व अन्य व्यवस्था की तारीफ की। इसके अलावा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक जिला-एक उत्पाद के तहत इस जनपद में काला नमक चावल को चुना है। इसके संरक्षण, संवर्धन के लिए प्रयास शुरू किए गए हैं। आने वाले दिनों में एक बार फिर इस चावल की खुशबू देश ही नहीं विदेशों में भी महकेगी। इससे पूर्व इस क्षेत्र में दलित से जुड़े मामलों की समीक्षा की। बाद में कुछ खामियों पर अफसरों को हिदायत भी दी। ग्राम प्रधान मो. इब्राहिम ने स्वागत करते हुए विकास से संबंधित प्रस्ताव भी दिए। इस मौके पर पूर्व डीजीपी की धर्मपत्नी सरोज समेत जिला प्रोबेशन अधिकारी सतीश चन्द्र, खंड विकास अधिकारी बर्डपुर पुष्पा वर्मा, अधिवक्ता नजीर अहमद मलिक, सेवानिवृत्त कर्मी कमरूद्दीन मलिक, जेडए मलिक, सिद्धार्थ गौतम, जहूर खां, महेश गुप्ता, इश्तियाक अहमद, मो. यूनुस, इजहार अहमद, विजय जायसवाल, इसलावती वर्मा, मीरा वर्मा, हकीकुल्लाह, रमेश कुमार, विजय चौरसिया, शमसुलहक, रामदीन, वीरू यादव, राम प्यारे, इफ्तेखार अहमद, विजय शंकर मिश्रा आदि की उपस्थिति रही।
विवाद के कारण नहीं हो सका शिलान्यास
बजहा में बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए मलिक आयशा मेमोरियल गर्ल्स कॉलेज का शिलान्यास कार्यक्रम भी था। मुख्य अतिथि व पूर्व डीजीपी बृजलाल के पहुंचने से पहले ही चिह्नित भूमि को लेकर विवाद खड़ा हो गया। ग्रामीणों ने उस जमीन को कब्रिस्तान बताते हुए विरोध जताया। इस संबंध में प्रबंधक और अधिवक्ता नजीर अहमद मलिक ने आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए बताया कि उक्त जमीन स्वयं की है। लिहाजा विवाद को देखते हुए शिलान्यास कार्यक्रम टाल दिया गया। पैमाइश के बाद ही शिलान्यास कराने का निर्णय लिया गया।
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उन्होंने कहा कि अनुसूचित जाति, जनजाति के हक व अधिकार दिलाने के लिए योगी सरकार कृत संकल्पित है। इस कार्य में किसी भी स्तर पर कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उनके लिए लागू योजनाओं व कार्यक्रमों का शत-प्रतिशत क्रियान्वयन के लिए दृढ़ संकल्प के साथ अधिकारियों को तत्पर होना पड़ेगा। कहा कि शिकायत मिलने के बाद त्वरित निदान के लिए अविलंब निस्ताण करने की प्रक्रिया तेज की जाए। आयोग के अध्यक्ष ने प्राथमिक विद्यालय बजहा के रंगरोगन, स्लोगन व अन्य व्यवस्था की तारीफ की। इसके अलावा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक जिला-एक उत्पाद के तहत इस जनपद में काला नमक चावल को चुना है। इसके संरक्षण, संवर्धन के लिए प्रयास शुरू किए गए हैं। आने वाले दिनों में एक बार फिर इस चावल की खुशबू देश ही नहीं विदेशों में भी महकेगी। इससे पूर्व इस क्षेत्र में दलित से जुड़े मामलों की समीक्षा की। बाद में कुछ खामियों पर अफसरों को हिदायत भी दी। ग्राम प्रधान मो. इब्राहिम ने स्वागत करते हुए विकास से संबंधित प्रस्ताव भी दिए। इस मौके पर पूर्व डीजीपी की धर्मपत्नी सरोज समेत जिला प्रोबेशन अधिकारी सतीश चन्द्र, खंड विकास अधिकारी बर्डपुर पुष्पा वर्मा, अधिवक्ता नजीर अहमद मलिक, सेवानिवृत्त कर्मी कमरूद्दीन मलिक, जेडए मलिक, सिद्धार्थ गौतम, जहूर खां, महेश गुप्ता, इश्तियाक अहमद, मो. यूनुस, इजहार अहमद, विजय जायसवाल, इसलावती वर्मा, मीरा वर्मा, हकीकुल्लाह, रमेश कुमार, विजय चौरसिया, शमसुलहक, रामदीन, वीरू यादव, राम प्यारे, इफ्तेखार अहमद, विजय शंकर मिश्रा आदि की उपस्थिति रही।
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विवाद के कारण नहीं हो सका शिलान्यास
बजहा में बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए मलिक आयशा मेमोरियल गर्ल्स कॉलेज का शिलान्यास कार्यक्रम भी था। मुख्य अतिथि व पूर्व डीजीपी बृजलाल के पहुंचने से पहले ही चिह्नित भूमि को लेकर विवाद खड़ा हो गया। ग्रामीणों ने उस जमीन को कब्रिस्तान बताते हुए विरोध जताया। इस संबंध में प्रबंधक और अधिवक्ता नजीर अहमद मलिक ने आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए बताया कि उक्त जमीन स्वयं की है। लिहाजा विवाद को देखते हुए शिलान्यास कार्यक्रम टाल दिया गया। पैमाइश के बाद ही शिलान्यास कराने का निर्णय लिया गया।
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