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‘कागज का टुकड़ा नहीं, साधना का फल है उपाधि’
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सिद्धार्थनगर ः दीप प्रज्जवलित कर दीक्षांत समारोह का शुभारंभ करतीं राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, साथ म
- फोटो : SIDDHARTHNAGAR
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‘कागज का टुकड़ा नहीं, साधना का फल है उपाधि’
सिद्धार्थ विश्वविद्यालय कपिलवस्तु का चतुर्थ दीक्षांत समारोह आयोजित
34 छात्र-छात्राओं को राज्यपाल ने प्रदान की उपाधि
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। उपाधि सिर्फ कागज का टुकड़ा नहीं है। यह आपके साधना का फल है। आप सभी श्रेष्ठ नागरिक के दायित्व का निर्वहन करते हुए समाज व राष्ट्र के निर्माण में योगदान करें। ये बातें सिद्धार्थ विश्वविद्यालय कपिलवस्तु के चतुर्थ दीक्षांत समारोह में राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने बतौर मुख्य अतिथि कहीं।
राज्यपाल ने कहा कि सिद्धार्थ विश्वविद्यालय में भगवान बुद्ध की छाप दिखनी चाहिए। यहां अंतरराष्ट्रीय बौद्ध केंद्र स्थापित हो चुकी है, जिसमें दुनियाभर के विद्वान अध्ययन करने आएंगे। राज्यपाल ने भगवान बुद्ध के मानवता के संदेश का जिक्र करते हुए कहा कि चुनौतियों से निपटने के लिए सभी को बुद्ध बनना पड़ेगा। उन्होंने विश्वविद्यालय प्रबंधन से शिक्षा के साथ सामाजिक सरोकार के कार्य करने की उम्मीद जताई। महाविद्यालयों को एक-एक गांव गोद लेनी चाहिए। कहा कि लंबे समय के साथ शिक्षा नीति में बदलाव की जरूरत महसूस हो रही थी। उत्तर प्रदेश सरकार नई शिक्षा नीति को लागू करने में जुटी हुई है। अमृत महोत्सव के बारे में बताते हुए राज्यपाल ने कहा कि हमारा इतिहास भी तोड़ मरोड़कर लिखा गया है। आजादी की 75वीं वर्षगांठ पर हमें आंदोलन और शहादत को याद करने की जरूरत है। किताबों का अध्ययन, प्रतिस्पर्धा एवं शोध के माध्यम से आजादी के दीवानों को नमन करना चाहिए। कुलाधिपति ने 34 छात्र-छात्राओं को उपाधि प्रदान की। साथ ही 23 मिनट के अपने संबोधन में मेधावियों को अच्छे आचरण की सीख दी।
उप मुख्यमंत्री एवं उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. दिनेश शर्मा ने उच्च शिक्षा में सुधार की जानकारी देते हुए कहा कि रोजगार परक गुणवत्ता युक्त शिक्षा के लिए नई शिक्षा नीति लागू की गई है। पाठ्यक्रम का पुनर्गठन, ई-गंगा, शोध गंगा, ई-लर्निंग पार्क, ई-सुविधा केंद्र एवं डिजिटल लाइब्रेरी जैसे कार्य से शिक्षा का स्तर सुधरा है। विश्वविद्यालय के सेंटर फॉर एक्सीलेंस ऑफ बुद्धिज्म, हिंदूज्म एवं जैनिज्म में देश-विदेश के विद्यार्थियों को अध्ययन करने का अवसर प्राप्त होगा। शिक्षा सेवा चयन आयोग का गठन किया गया है। नेपाल के छात्र-छात्राएं भी यहां अध्ययन कर रहे हैं।
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बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार डॉ. सतीशचंद्र द्विवेदी ने कहा कि दीक्षांत समारोह भारतीय ज्ञान परंपरा का उत्कृष्ट आयोजन है। प्रदेश सरकार ने अव्यवस्थित मिले विश्वविद्यालय में काफी विकास कार्य किए हैं। कुलपति डॉ. सुरेंद्र दुबे ने एक वर्ष में विवि की उपलब्धियां गिनाईं। कहा कि विवि में 30 शिक्षक और 500 विद्यार्थी हैं। एनसीसी की बटालियन शुरू की गई है। पहली बार शोध पात्रता परीक्षा आयोजित की गई। शोध कार्य शुरू हो गया है। समारोह में आवास, छात्रावास और द्वार का लोकार्पण किया गया। दीक्षांत समारोह में कई जिलों के विद्यार्थियों ने उपाधि प्राप्त की। छात्राओं ने सरस्वती वंदना एवं कुलगीत गाया। आयोजन में पूर्व विधानसभा अध्यक्ष माता प्रसाद पांडेय, विधायक अमर सिंह चौधरी, श्यामधनी राही, शिक्षक विधायक ध्रुव कुमार त्रिपाठी उपस्थित रहे।
‘भगवान बुद्ध की धरती पर भेदभाव ठीक नहीं’
उपाधि वितरण के दौरान जब विश्वविद्यालय की एक छात्रा मंच पर पहुंचीं तो खूब तालियां बजीं, जबकि उससे पहले सन्नाटा था। संबोधन में राज्यपाल ने कहा कि भगवान बुद्ध की धरती पर शिक्षा में इस तरह का भेदभाव नहीं होना चाहिए। इस बात पर पंडाल में बैठे विद्या परिषद के सदस्यों ने ठहाका लगाया तो उन्होंने टोका।
‘फिर लड़कियां शादी से मना कर देंगी’
राज्यपाल ने कहा कि उपाधि प्राप्त करने वालों में 10 छात्र हैं और 24 छात्राएं हैं। बेटियों को शुभकामना, लेकिन ऐसा ही चलता रहा तो एक दिन आएगा जब लड़कियां शादी करने से मना करेंगी। इसलिए लड़कों को भी खूब मन लगाकर पढ़ना चाहिए।
विवि की स्थापना में मुख्य भूमिका निभाने वाले को भूले
सिद्धार्थ विवि की स्थापना कराने के प्रमुख भूमिका निभाने पूर्व विधानसभा अध्यक्ष माता प्रसाद पांडेय भी पंडाल में मौजूद थे, लेकिन वक्ताओं और संचालकों ने उनका नाम तक नहीं लिया। पूर्व विधानसभा अध्यक्ष ने बताया कि उन्हें कार्ड भेजकर बुलाया गया था और रजिस्ट्रार एवं कुलपति ने कार्यक्रम में शामिल होने का आग्रह भी किया था। मंच से जब नेताओं ने कहा कि विश्वविद्यालय में सिर्फ शिलापट्ट लगे थे तो वे दंग रह गए, क्योंकि उनके अनुसार विश्वविद्यालय के निर्माण एवं कक्षा संचालन का कार्य पूर्ववर्ती सरकार में पूर्ण हो गया था।
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सिद्धार्थ विश्वविद्यालय कपिलवस्तु का चतुर्थ दीक्षांत समारोह आयोजित
34 छात्र-छात्राओं को राज्यपाल ने प्रदान की उपाधि
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। उपाधि सिर्फ कागज का टुकड़ा नहीं है। यह आपके साधना का फल है। आप सभी श्रेष्ठ नागरिक के दायित्व का निर्वहन करते हुए समाज व राष्ट्र के निर्माण में योगदान करें। ये बातें सिद्धार्थ विश्वविद्यालय कपिलवस्तु के चतुर्थ दीक्षांत समारोह में राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने बतौर मुख्य अतिथि कहीं।
राज्यपाल ने कहा कि सिद्धार्थ विश्वविद्यालय में भगवान बुद्ध की छाप दिखनी चाहिए। यहां अंतरराष्ट्रीय बौद्ध केंद्र स्थापित हो चुकी है, जिसमें दुनियाभर के विद्वान अध्ययन करने आएंगे। राज्यपाल ने भगवान बुद्ध के मानवता के संदेश का जिक्र करते हुए कहा कि चुनौतियों से निपटने के लिए सभी को बुद्ध बनना पड़ेगा। उन्होंने विश्वविद्यालय प्रबंधन से शिक्षा के साथ सामाजिक सरोकार के कार्य करने की उम्मीद जताई। महाविद्यालयों को एक-एक गांव गोद लेनी चाहिए। कहा कि लंबे समय के साथ शिक्षा नीति में बदलाव की जरूरत महसूस हो रही थी। उत्तर प्रदेश सरकार नई शिक्षा नीति को लागू करने में जुटी हुई है। अमृत महोत्सव के बारे में बताते हुए राज्यपाल ने कहा कि हमारा इतिहास भी तोड़ मरोड़कर लिखा गया है। आजादी की 75वीं वर्षगांठ पर हमें आंदोलन और शहादत को याद करने की जरूरत है। किताबों का अध्ययन, प्रतिस्पर्धा एवं शोध के माध्यम से आजादी के दीवानों को नमन करना चाहिए। कुलाधिपति ने 34 छात्र-छात्राओं को उपाधि प्रदान की। साथ ही 23 मिनट के अपने संबोधन में मेधावियों को अच्छे आचरण की सीख दी।
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उप मुख्यमंत्री एवं उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. दिनेश शर्मा ने उच्च शिक्षा में सुधार की जानकारी देते हुए कहा कि रोजगार परक गुणवत्ता युक्त शिक्षा के लिए नई शिक्षा नीति लागू की गई है। पाठ्यक्रम का पुनर्गठन, ई-गंगा, शोध गंगा, ई-लर्निंग पार्क, ई-सुविधा केंद्र एवं डिजिटल लाइब्रेरी जैसे कार्य से शिक्षा का स्तर सुधरा है। विश्वविद्यालय के सेंटर फॉर एक्सीलेंस ऑफ बुद्धिज्म, हिंदूज्म एवं जैनिज्म में देश-विदेश के विद्यार्थियों को अध्ययन करने का अवसर प्राप्त होगा। शिक्षा सेवा चयन आयोग का गठन किया गया है। नेपाल के छात्र-छात्राएं भी यहां अध्ययन कर रहे हैं।
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बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार डॉ. सतीशचंद्र द्विवेदी ने कहा कि दीक्षांत समारोह भारतीय ज्ञान परंपरा का उत्कृष्ट आयोजन है। प्रदेश सरकार ने अव्यवस्थित मिले विश्वविद्यालय में काफी विकास कार्य किए हैं। कुलपति डॉ. सुरेंद्र दुबे ने एक वर्ष में विवि की उपलब्धियां गिनाईं। कहा कि विवि में 30 शिक्षक और 500 विद्यार्थी हैं। एनसीसी की बटालियन शुरू की गई है। पहली बार शोध पात्रता परीक्षा आयोजित की गई। शोध कार्य शुरू हो गया है। समारोह में आवास, छात्रावास और द्वार का लोकार्पण किया गया। दीक्षांत समारोह में कई जिलों के विद्यार्थियों ने उपाधि प्राप्त की। छात्राओं ने सरस्वती वंदना एवं कुलगीत गाया। आयोजन में पूर्व विधानसभा अध्यक्ष माता प्रसाद पांडेय, विधायक अमर सिंह चौधरी, श्यामधनी राही, शिक्षक विधायक ध्रुव कुमार त्रिपाठी उपस्थित रहे।
‘भगवान बुद्ध की धरती पर भेदभाव ठीक नहीं’
उपाधि वितरण के दौरान जब विश्वविद्यालय की एक छात्रा मंच पर पहुंचीं तो खूब तालियां बजीं, जबकि उससे पहले सन्नाटा था। संबोधन में राज्यपाल ने कहा कि भगवान बुद्ध की धरती पर शिक्षा में इस तरह का भेदभाव नहीं होना चाहिए। इस बात पर पंडाल में बैठे विद्या परिषद के सदस्यों ने ठहाका लगाया तो उन्होंने टोका।
‘फिर लड़कियां शादी से मना कर देंगी’
राज्यपाल ने कहा कि उपाधि प्राप्त करने वालों में 10 छात्र हैं और 24 छात्राएं हैं। बेटियों को शुभकामना, लेकिन ऐसा ही चलता रहा तो एक दिन आएगा जब लड़कियां शादी करने से मना करेंगी। इसलिए लड़कों को भी खूब मन लगाकर पढ़ना चाहिए।
विवि की स्थापना में मुख्य भूमिका निभाने वाले को भूले
सिद्धार्थ विवि की स्थापना कराने के प्रमुख भूमिका निभाने पूर्व विधानसभा अध्यक्ष माता प्रसाद पांडेय भी पंडाल में मौजूद थे, लेकिन वक्ताओं और संचालकों ने उनका नाम तक नहीं लिया। पूर्व विधानसभा अध्यक्ष ने बताया कि उन्हें कार्ड भेजकर बुलाया गया था और रजिस्ट्रार एवं कुलपति ने कार्यक्रम में शामिल होने का आग्रह भी किया था। मंच से जब नेताओं ने कहा कि विश्वविद्यालय में सिर्फ शिलापट्ट लगे थे तो वे दंग रह गए, क्योंकि उनके अनुसार विश्वविद्यालय के निर्माण एवं कक्षा संचालन का कार्य पूर्ववर्ती सरकार में पूर्ण हो गया था।