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Siddharthnagar News: सीजन से पहले नेपाल खाद का स्टॉक बढ़ाने में जुटा

Sat, 12 Sep 2026 11:13 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sat, 12 Sep 2026 11:13 PM IST
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Nepal gears up to build fertilizer stocks ahead of the season.
कपिलवस्तु। खरीफ सीजन में खाद की किल्लत के बाद नेपाल ने रबी की तैयारी तेज कर दी है। गेहूं की बुवाई शुरू होने से पहले ही नेपाल सरकार भारत से यूरिया और डीएपी मंगाकर स्टॉक कर रहा है। भारत से खाद की खेप पहुंचने से भैरहवा समेत सिद्धार्थनगर से सटे नेपाली क्षेत्र में किसानों को समय से खाद मिलने की उम्मीद है।
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स्थानीय स्तर पर पर्याप्त उपलब्धता होने पर सीमा पार से भारतीय खाद की मांग और इसकी अवैध आवाजाही का दबाव भी कम हो सकता है। नेपाल सरकार ने गवर्नमेंट-टू-गवर्नमेंट व्यवस्था के तहत भारत से 30 हजार टन यूरिया और 30 हजार टन डीएपी खरीदा है। एग्रीकल्चरल मटीरियल कंपनी के मधेश प्रांतीय कार्यालय के अनुसार बीरगंज के सिरसिया ड्राई पोर्ट पर डीएपी के दो और यूरिया का एक रैक पहुंच चुका है।
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एक रैक में करीब 2500 टन खाद होती है। पोर्ट पर पहुंची खाद को गोदामों तक भेजने और भंडारण की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। बीरगंज और भैरहवा प्रांतीय कार्यालय के हिस्से की खाद बीरगंज के सिरसिया ड्राई पोर्ट के रास्ते पहुंचेगी, जबकि विराटनगर कार्यालय के हिस्से की खाद विराटनगर बॉर्डर से आएगी।
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बीरगंज प्रांतीय कार्यालय को यूरिया और डीएपी की 11-11 हजार टन मात्रा मिलने की जानकारी है। शेष खाद भैरहवा और विराटनगर प्रांतीय कार्यालयों को दी जाएगी।
भैरहवा में खाद की आपूर्ति बढ़ने का सीधा असर सिद्धार्थनगर से सटे सीमा क्षेत्र पर पड़ सकता है। रबी सीजन में गेहूं की बुवाई के दौरान नेपाली किसानों को यदि स्थानीय बाजार और सरकारी वितरण केंद्रों से पर्याप्त यूरिया-डीएपी मिलती है तो भारत से खाद ले जाने की जरूरत घट सकती है।
इससे सीमा के रास्ते खाद की अवैध रूप से आवाजाही रोकने में भी सुरक्षा एजेंसियों को मदद मिलने की उम्मीद है।
खरीफ सीजन में खाद की मांग बढ़ने पर सीमा क्षेत्र में भी इसका दबाव देखने को मिलता है। नेपाल में उपलब्धता कम होने पर सीमावर्ती इलाकों से खाद की मांग बढ़ जाती है। यही स्थिति अवैध तरीके से खाद ले जाने वालों के लिए भी अवसर पैदा करती है। रबी से पहले नेपाल की ओर से बड़े पैमाने पर स्टॉक तैयार करने को इसी दबाव को कम करने की तैयारी के तौर पर देखा जा रहा है।
भारत-नेपाल सीमा पर खाद की आवाजाही को लेकर सुरक्षा और संबंधित विभागों की निगरानी भी महत्वपूर्ण होगी। नेपाल में पर्याप्त स्टॉक तैयार होने के बावजूद यदि वितरण व्यवस्था कमजोर रही या किसानों तक समय से खाद नहीं पहुंची तो सीमा पार मांग दोबारा बढ़ सकती है। ऐसे में केवल आयात बढ़ाना ही नहीं, बल्कि स्थानीय स्तर पर समय से वितरण सुनिश्चित करना भी चुनौती होगी।
नेपाल के अधिकारियों के अनुसार भारत से खरीदी गई खाद को गेहूं की खेती के सीजन को ध्यान में रखकर चरणबद्ध तरीके से मंगाया जा रहा है। उद्देश्य बुवाई के समय किसानों को यूरिया और डीएपी की उपलब्धता सुनिश्चित करना है। खरीफ में हुई किल्लत के बाद इस बार नेपाल सरकार ने बुवाई से पहले ही पर्याप्त स्टॉक तैयार करने पर जोर दिया है।

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सीमावर्ती जिलों के लिए राहत की उम्मीद
जून से सितंबर के बीच सिद्धार्थनगर सीमा क्षेत्र में खाद की तस्करी से जुड़े मामले सामने आए। जून में यूरिया के साथ तस्कर पकड़ा गया। जुलाई में बाइक पर चार बोरी खाद ले जाने का मामला सामने आया और सितंबर में फिर यूरिया के साथ तस्कर की गिरफ्तारी हुई। इससे साफ है कि नेपाल में खाद की मांग का असर सीमा पर भी पड़ रहा है। अब नेपाल सरकार भारत से बड़े पैमाने पर यूरिया और डीएपी मंगाकर स्टॉक कर रही है। यदि यह खाद समय से भैरहवा और सीमावर्ती नेपाली बाजारों तक पहुंचती है तो भारतीय खाद की मांग घट सकती है। इससे सिद्धार्थनगर समेत सीमावर्ती जिलों में खाद की उपलब्धता पर दबाव कम होने और तस्करी की घटनाओं में कमी आने की उम्मीद है।
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