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Siddharthnagar News: कुत्तों का टीकाकरण न होता है पंजीकरण

Sat, 14 Jan 2023 11:27 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sat, 14 Jan 2023 11:27 PM IST
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Neither vaccination nor registration of dogs
कुत्तों का न टीकाकरण न ही पंजीकरण
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ठंड में बढ़ गईं कुत्तों के काटने की घटनाएं
प्रतिदिन जिला अस्पताल में 25-40 व्यक्ति पहुंच रहे एंटी रैबिज का इंजेक्शन लगवाने
जिले में 20 हजार से अधिक हैं पालतू और आवारा कुत्ते
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। जिले में न तो कुत्तों का पंजीकरण होता है और न ही उन्हें टीका लगाने का कोई प्रावधान है। ऐसे में घुमंतू कुत्ते लोगों के लिए घातक साबित हो रहे हैं। ठंड के मौसम में कुत्ते हमलावर हो गए हैं, उनके काटने की घटनाएं बढ़ गई हैं। लेकिन कुत्तों के नियंत्रण की जिले में कोई व्यवस्था नहीं है।
पशुओं में कुत्ता ऐसा जानवर है, जिसे लोग शौक के लिए पालते हैं। इसके साथ ही बड़ी संख्या में कुत्ते गांव और चौराहों पर घूम रहे हैं। पशु चिकित्सकों के मुताबिक, जीभ से पानी पीने वाले पशुओं में कुत्ते का जहर खतरनाक होता है। इसके काटने के बाद व्यक्ति मानसिक संतुलन खो देता है, उसी के जैसा भौंकने लगता है। पालतू कुत्तों को लोग समय-समय पर टीका लगवाते हैं, लेकिन महानगरों को छोड़ दिया जाए तो जनपदों में आवारा कुत्तों का ना तो पंजीकरण होता है न ही उन्हें टीका लगाने या बधिया करने की कोई योजना है।
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मौजूदा समय में कुत्तों के काटने की घटनाएं बढ़ गई हैं। प्रतिदिन माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज से संबद्ध जिला अस्पताल में एंटी रैबिज कक्ष में 25-40 मरीज पहुंचे रहे हैं।
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ठंड में हमलावर हो गए हैं कुत्ते
पशु चिकित्सकों के मुताबिक, ठंड में घुमंतू कुत्तों को कोई खाना नहीं देता है। भूख से परेशान कुत्ते के सामने जो पड़ता है या छेड़ता है, उसपर हमला कर देते हैं। दूसरा कारण है कि इस समय कुतिया भी बच्चों को जन्म दी हैं। कई बार लोग उनके बच्चों को छेड़ देते हैं या फिर मार देते हैं। इससे आक्रामक होकर कुत्ते काट ले रहे हैं।
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सर्वे के मुताबिक जिले में इतने कुत्ते
पशु चिकित्सा विभाग के मुताबिक कुछ साल पहले हुए सर्वे में 20 हजार से अधिक घुमंतू और पालतू कुत्ते चिह्नित किए गए थे। जिनका डाटा शासन को भेजा गया था, लेकिन उसके बाद न तो टीकाकरण की पहल की गई न ही उनके बधियाकरण की कोई प्रक्रिया शुरू हुई।
टीकाकरण का कोई नहीं
कुत्तों के पंजीकरण और टीकाकरण का यहां कोई प्रावधान नहीं है। जिन लोगों ने कुत्तों का पालन किया है, वे टीकाकरण करवाते हैं। घूमने वाले कुत्तों के टीकाकरण के लिए कोई योजना नहीं है। -डॉ. मेमपाल सिंह, सीवीओ सिद्धार्थनगर
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इंजेक्शन की कोई कमी नहीं
जिले के सभी सीएचस्री, पीएचसी और मेडिकल कॉलेज में पर्याप्त मात्रा में एंटीरैबिज इंजेक्शन है। सभी को निदेर्िशत किया गया है कि जरूरतमंदों को तत्काल इंजेक्शन लगाएं। -डॉ. बीके अग्रवाल, सीएमओ सिद्धार्थनगर

कुत्ता काटने पर न करें लापरवाही
कुत्ते और सियार के साथ ही बिल्ली भी घातक है। अगर ये काट लेते हैं तो तत्काल एंटी रैबिज इंजेक्शन लगवाएं। इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही ठीक नहीं है। इनका रैबिज कुछ साल बाद भी व्यक्ति के अंदर सक्रिय हो जाता है, जिससे व्यक्ति मानसिक संतुलन खो देता है, वह भी कुत्ते जैसी हरकतें करने लगता है।
-डॉ. मनोज कुमार त्रिपाठी, चिकित्सक माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज सिद्धार्थनगर
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