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Siddharthnagar News: 21 अगस्त को बुधित्व योग में मनेगी नागपंचमी
Sat, 12 Aug 2023 12:46 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Sat, 12 Aug 2023 12:46 AM IST
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सिद्धार्थनगर। नाग देवता की उपासना का पर्व नाग पंचमी 21 अगस्त को मनाई जाएगी। इस अवसर पर महानगर के सभी छोटे-बड़े शिवालयों में भक्त विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर भगवान शिव और नाग देवता को प्रसन्न करेंगे।
वाराणसी से प्रकाशित हृषिकेश पंचांग के अनुसार, इस दिन सावन मास के शुक्ल पंचमी तिथि का मान संपूर्ण दिन और रात को नौ बजकर 54 मिनट तक है। इस दिन चित्रा नक्षत्र भी संपूर्ण दिन और रात्रि शेष तीन बजकर 47 मिनट तक है। इस दिन शुभ योग है। चंद्रमा की स्थिति कन्या और तुला दोनों राशियों पर रहेगी। सूर्योदय के समय बुधादित्य योग बन रहा है। बुदित्य योग सूर्य और बुध के उच्च स्थिति पर बनता है। इस योग में पूजन-अर्चन से विद्यार्थियों को विद्या की प्राप्ति होगी। वहीं बौद्धिक क्षमता में वृद्धि होने के साथ ही व्यापार भी अच्छा होगा।
ज्योतिर्विद योगेश पांडेय के अनुसार, दूध को चंद्रमा का प्रतीक माना गया है। इसके साथ ही भगवान शिव के मस्तक पर भी चंद्रमा विराजमान हैं। बताया कि ज्योतिष शास्त्र में चंद्रमा को मन का कारक ग्रह बताया गया है। मन को शिव के प्रति समर्पण के उद्देश्य से भी नागपंचमी पर नाग को दूध पिलाया जाता है। ज्योतिषाचार्य अच्युत्य रामानुचार्य के अनुसार, हिंदू धर्म में नाग को भगवान शिव के गले का हार और भगवान विष्णु की शैय्या कहा गया है। ऐसे में माना जाता है कि नाग की पूजा करने से भगवान शिव और भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं।
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नाग पंचमी की पूजन-विधि
पंडित सदाशिव मिश्र के अनुसार, इस व्रत के एक दिन पूर्व यानि चतुर्थी को एक समय भोजन कर पंचमी तिथि को उपवास रखें। गरुड़ पुराण के अनुसार, व्रती अपने घर के दोनों ओर नागों को चित्रित करके उनकी विधि पूर्वक पूजा करें। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, पंचमी तिथि के स्वामी नाग हैं, इसलिए भक्तिभाव के साथ गंध, पुष्प, धूप, कच्चा दूध, खीर, भीगा हुआ बाजरा और घी से नाग देवता का पूजन करें। उन्हें लावा और दूध अर्पण करें।
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वाराणसी से प्रकाशित हृषिकेश पंचांग के अनुसार, इस दिन सावन मास के शुक्ल पंचमी तिथि का मान संपूर्ण दिन और रात को नौ बजकर 54 मिनट तक है। इस दिन चित्रा नक्षत्र भी संपूर्ण दिन और रात्रि शेष तीन बजकर 47 मिनट तक है। इस दिन शुभ योग है। चंद्रमा की स्थिति कन्या और तुला दोनों राशियों पर रहेगी। सूर्योदय के समय बुधादित्य योग बन रहा है। बुदित्य योग सूर्य और बुध के उच्च स्थिति पर बनता है। इस योग में पूजन-अर्चन से विद्यार्थियों को विद्या की प्राप्ति होगी। वहीं बौद्धिक क्षमता में वृद्धि होने के साथ ही व्यापार भी अच्छा होगा।
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ज्योतिर्विद योगेश पांडेय के अनुसार, दूध को चंद्रमा का प्रतीक माना गया है। इसके साथ ही भगवान शिव के मस्तक पर भी चंद्रमा विराजमान हैं। बताया कि ज्योतिष शास्त्र में चंद्रमा को मन का कारक ग्रह बताया गया है। मन को शिव के प्रति समर्पण के उद्देश्य से भी नागपंचमी पर नाग को दूध पिलाया जाता है। ज्योतिषाचार्य अच्युत्य रामानुचार्य के अनुसार, हिंदू धर्म में नाग को भगवान शिव के गले का हार और भगवान विष्णु की शैय्या कहा गया है। ऐसे में माना जाता है कि नाग की पूजा करने से भगवान शिव और भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं।
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नाग पंचमी की पूजन-विधि
पंडित सदाशिव मिश्र के अनुसार, इस व्रत के एक दिन पूर्व यानि चतुर्थी को एक समय भोजन कर पंचमी तिथि को उपवास रखें। गरुड़ पुराण के अनुसार, व्रती अपने घर के दोनों ओर नागों को चित्रित करके उनकी विधि पूर्वक पूजा करें। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, पंचमी तिथि के स्वामी नाग हैं, इसलिए भक्तिभाव के साथ गंध, पुष्प, धूप, कच्चा दूध, खीर, भीगा हुआ बाजरा और घी से नाग देवता का पूजन करें। उन्हें लावा और दूध अर्पण करें।