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1359 फसली खसरे के लिए मुस्लिम लगा रहे दौड़
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1359 फसली खसरे के लिए मुस्लिम लगा रहे दौड़
नागरिकता रजिस्टर के लिए भी तहसीलों में मारा-मारी
अमर उजाला ब्यूरो
सिद्धार्थनगर। नागरिकता संशोधन कानून के विरोध के बीच अब मुस्लिम 1359 फसली खसरे के लिए तहसीलों का दौड़ लगा रहे हैं। नागरिकता रजिस्टर के लिए भी तहसीलों में मारामारी मची हुई है। मामले में अवैध वसूली की बातें भी सामने आ रही है। इसके बाद भी प्रशासन ऐसे लोगों को यह समझा नहीं पा रहा है कि नागरिकता कानून संशोधन देश हित में है। मामले की जानकारी डीएम दीपक मीणा तक पहुंच गई है। उन्होंने मामले में जागरूकता कार्यक्रम कराने के साथ ही तहसीलों में इससे संबंधित पंफ्लेट लगवाने को कहा है।
नागरिकता संशोधन कानून का विरोध पूर्वोत्तर राज्यों के बाद प्रदेश में भी पहुंच गई है। अलीगढ़ सहित लखनऊ और मऊ में हुए बवाल के बाद जिले में भी धारा 144 लागू हो चुका है। इन सबके बाद भी प्रशासन जिलेवासियों को यह नहीं समझा पा रहा है कि यह कानून देश हित में है। इसका नुकसान देश में रहने वाले किसी भी नागरिक को नहीं है। अगर ऐसा प्रशासन कर लिया होता तो शायद मुस्लिम समुदाय के लोगों को 1359 फसली खसरे की जरूरत नहीं पड़ती। मौजूदा समय में पांचों तहसीलों में मुस्लिम समुदाय के लोग इस खसरे के लिए परेशान हैं। इसके लिए वह प्रति व्यक्ति दो से तीन हजार रुपये तहसील कर्मियों पर खर्च कर रहे हैं। इसके अलावा नागरिकता रजिस्टर के लिए भी भागदौड़ मची है। सबसे अधिक नेपाल सीमा पर रहने वाले मुस्लिम गांव के लोग तहसीलों में खसरे के लिए परेशान है।
क्या है 1359 फसली खसरा
तहसील के रिकार्ड में यह खसरा बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। बताया जाता है कि 1359 फसली खसरे में जाति का जिक्र होता है। ऐसे में नागरिकता के तौर पर सबसे पुख्ता प्रमाण मांगे जाते हैं। इसके अलावा नागरिकता रजिस्टर भी नागरिकता के प्रमाण हैं। दूसरी ओर, मौजूदा समय में जो खसरा लेखपाल बनाते हैं, उसमें जाति का जिक्र बिल्कुल नहीं होता है। केवल खेत के गाटों की संख्या का जिक्र रहता है।
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सोशल मीडिया पर न करें कोई टिप्पणी
डीएम दीपक मीणा और एसपी विजय ढुल ने बुधवार को साझा प्रेस कांफ्रेंस करते हुए कहा है कि नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ सोशल मीडिया पर कोई टिप्पणी बिल्कुल न करें। अगर कोई ऐसा कर रहा है, इसकी सूचना प्रशासन को दें। प्रशासन उस पर सख्ती से कार्रवाई करेगा। कहा कि जिले में धारा 144 लागू है, ऐसे में कोई भी जुलूस व धरना-प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी जाएगी।
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नागरिकता रजिस्टर के लिए भी तहसीलों में मारा-मारी
अमर उजाला ब्यूरो
सिद्धार्थनगर। नागरिकता संशोधन कानून के विरोध के बीच अब मुस्लिम 1359 फसली खसरे के लिए तहसीलों का दौड़ लगा रहे हैं। नागरिकता रजिस्टर के लिए भी तहसीलों में मारामारी मची हुई है। मामले में अवैध वसूली की बातें भी सामने आ रही है। इसके बाद भी प्रशासन ऐसे लोगों को यह समझा नहीं पा रहा है कि नागरिकता कानून संशोधन देश हित में है। मामले की जानकारी डीएम दीपक मीणा तक पहुंच गई है। उन्होंने मामले में जागरूकता कार्यक्रम कराने के साथ ही तहसीलों में इससे संबंधित पंफ्लेट लगवाने को कहा है।
नागरिकता संशोधन कानून का विरोध पूर्वोत्तर राज्यों के बाद प्रदेश में भी पहुंच गई है। अलीगढ़ सहित लखनऊ और मऊ में हुए बवाल के बाद जिले में भी धारा 144 लागू हो चुका है। इन सबके बाद भी प्रशासन जिलेवासियों को यह नहीं समझा पा रहा है कि यह कानून देश हित में है। इसका नुकसान देश में रहने वाले किसी भी नागरिक को नहीं है। अगर ऐसा प्रशासन कर लिया होता तो शायद मुस्लिम समुदाय के लोगों को 1359 फसली खसरे की जरूरत नहीं पड़ती। मौजूदा समय में पांचों तहसीलों में मुस्लिम समुदाय के लोग इस खसरे के लिए परेशान हैं। इसके लिए वह प्रति व्यक्ति दो से तीन हजार रुपये तहसील कर्मियों पर खर्च कर रहे हैं। इसके अलावा नागरिकता रजिस्टर के लिए भी भागदौड़ मची है। सबसे अधिक नेपाल सीमा पर रहने वाले मुस्लिम गांव के लोग तहसीलों में खसरे के लिए परेशान है।
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क्या है 1359 फसली खसरा
तहसील के रिकार्ड में यह खसरा बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। बताया जाता है कि 1359 फसली खसरे में जाति का जिक्र होता है। ऐसे में नागरिकता के तौर पर सबसे पुख्ता प्रमाण मांगे जाते हैं। इसके अलावा नागरिकता रजिस्टर भी नागरिकता के प्रमाण हैं। दूसरी ओर, मौजूदा समय में जो खसरा लेखपाल बनाते हैं, उसमें जाति का जिक्र बिल्कुल नहीं होता है। केवल खेत के गाटों की संख्या का जिक्र रहता है।
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सोशल मीडिया पर न करें कोई टिप्पणी
डीएम दीपक मीणा और एसपी विजय ढुल ने बुधवार को साझा प्रेस कांफ्रेंस करते हुए कहा है कि नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ सोशल मीडिया पर कोई टिप्पणी बिल्कुल न करें। अगर कोई ऐसा कर रहा है, इसकी सूचना प्रशासन को दें। प्रशासन उस पर सख्ती से कार्रवाई करेगा। कहा कि जिले में धारा 144 लागू है, ऐसे में कोई भी जुलूस व धरना-प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी जाएगी।