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Siddharthnagar News: निगलिहवा में मिला अरघा युक्त मध्यकालीन शिवलिंग
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सीमा से सटे नेपाल के कपिलवस्तु जिले के निगलीहवा में एक तालाब से मिट्टी हटाते समय मिला शिवलिंग।
-सीमा से सटे नेपाल में मिला है शिवलिंग, मध्यकाल का होने का जानकार लगा रहे कयास
संवाद न्यूज एजेंसी
खुनुवां। सीमा से सटे नेपाल के कपिलवस्तु के निगलीहवा में एक तालाब से मिट्टी हटाते समय अर्घा (जल अर्पण) सहित एक मध्यकालीन शिवलिंग मिला है। ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व वाले इस शिवलिंग की प्रतिमा कपिलवस्तु नगर पालिका- नंबर के निगलीहवागांव के उत्तर में स्थित एक पुराने तालाब से मिट्टी खोदते समय मिली है।
स्थानीय निवासी बीरेंद्र कुमार उपाध्याय ने बताया कि तालाब से मिट्टी निकालकर खेत में डालते समय यह शिवलिंग मिला। उन्होंने बताया कि इस बात पर चर्चा चल रही है कि शिवलिंग को पुरातत्व विभाग को सौंप दिया जाए या स्थानीय लोगों को इसे संरक्षित करने दिया जाए। स्थानीय रामदत्त कुर्मी ने कहा शिवलिंग के ऐतिहासिक महत्व को ध्यान में रखते हुए ऐसा लगता है कि इसे संरक्षित किया जाना चाहिए और इसकी गहन जांच की जानी चाहिए। पुरातत्व विभाग और संबंधित निकायों को जल्द से जल्द अध्ययन और संरक्षण की प्रक्रिया शुरू करनी चाहिए।
कपिलवस्तु संग्रहालय की प्रमुख शांति शर्मा के अनुसार अनुमान है कि स्थानीय लोगों द्वारा तालाब से मिट्टी निकालते समय पाया गया शिवलिंग संभवतः मध्यकालीन काल का है। शिवलिंग और उसके साथ मिले अर्घा से पता चलता है कि मध्यकाल में उस स्थान पर मंदिर रहा होगा। उन्होंने कहा कि शिवलिंग को संरक्षित करने के लिए स्थानीय लोगों से चर्चा चल रही है। माना जाता है कि जिस तालाब में शिवलिंग मिला था। वह धीरे-धीरे मिट्टी से भर रहा गया होगा और दब गया है। इसलिए संभव है कि उसके नीचे कोई पुरातात्विक संरचना दबी हो। प्राप्त शिवलिंग की संरचना यह है कि अर्घा सहित निचला भाग पांच फीट छह इंच व्यास का है, दूसरा भाग 45 इंच व्यास का है तथा ऊपरी और निचले भाग के बीच का अंतर तीन इंच है।
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संग्रहालय प्रमुख शांति सेरमा ने बताया कि शिवलिंग (ऊपरी भाग) की ऊंचाई 16.5 इंच है और फिसलन वाले भाग की परिधि 5.5 इंच है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
खुनुवां। सीमा से सटे नेपाल के कपिलवस्तु के निगलीहवा में एक तालाब से मिट्टी हटाते समय अर्घा (जल अर्पण) सहित एक मध्यकालीन शिवलिंग मिला है। ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व वाले इस शिवलिंग की प्रतिमा कपिलवस्तु नगर पालिका- नंबर के निगलीहवागांव के उत्तर में स्थित एक पुराने तालाब से मिट्टी खोदते समय मिली है।
स्थानीय निवासी बीरेंद्र कुमार उपाध्याय ने बताया कि तालाब से मिट्टी निकालकर खेत में डालते समय यह शिवलिंग मिला। उन्होंने बताया कि इस बात पर चर्चा चल रही है कि शिवलिंग को पुरातत्व विभाग को सौंप दिया जाए या स्थानीय लोगों को इसे संरक्षित करने दिया जाए। स्थानीय रामदत्त कुर्मी ने कहा शिवलिंग के ऐतिहासिक महत्व को ध्यान में रखते हुए ऐसा लगता है कि इसे संरक्षित किया जाना चाहिए और इसकी गहन जांच की जानी चाहिए। पुरातत्व विभाग और संबंधित निकायों को जल्द से जल्द अध्ययन और संरक्षण की प्रक्रिया शुरू करनी चाहिए।
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कपिलवस्तु संग्रहालय की प्रमुख शांति शर्मा के अनुसार अनुमान है कि स्थानीय लोगों द्वारा तालाब से मिट्टी निकालते समय पाया गया शिवलिंग संभवतः मध्यकालीन काल का है। शिवलिंग और उसके साथ मिले अर्घा से पता चलता है कि मध्यकाल में उस स्थान पर मंदिर रहा होगा। उन्होंने कहा कि शिवलिंग को संरक्षित करने के लिए स्थानीय लोगों से चर्चा चल रही है। माना जाता है कि जिस तालाब में शिवलिंग मिला था। वह धीरे-धीरे मिट्टी से भर रहा गया होगा और दब गया है। इसलिए संभव है कि उसके नीचे कोई पुरातात्विक संरचना दबी हो। प्राप्त शिवलिंग की संरचना यह है कि अर्घा सहित निचला भाग पांच फीट छह इंच व्यास का है, दूसरा भाग 45 इंच व्यास का है तथा ऊपरी और निचले भाग के बीच का अंतर तीन इंच है।
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संग्रहालय प्रमुख शांति सेरमा ने बताया कि शिवलिंग (ऊपरी भाग) की ऊंचाई 16.5 इंच है और फिसलन वाले भाग की परिधि 5.5 इंच है।