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मानसून की आहट से 1693 गांवों में दहशत
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मानसून की आहट से 1693 गांवों में दहशत
राप्ती, बूढ़ी राप्ती, कूड़ा, बाणगंगा नदियां बारिश में मचाती हैं तबाही
कटान स्थलों पर तीन वर्षों से नहीं हुए बचाव कार्य, मैरूंड रहते हैं 1053 गांव
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। बांधों की मरम्मत नहीं होने और कटान स्थलों पर पक्के बचाव कार्य नहीं होने से बाढ़ प्रभावित 1693 गांवों के लोग मानसून की आहट से ही दहशत में है। प्रत्येक वर्ष बाढ़ और कटान की त्रासदी झेलने वाले जिले के 1053 गांव मैरूंड (चारों ओर पानी से घिर जाना) हो जाते हैं। वहीं विभाग को बचाव और मरम्मत के लिए धन का इंतजार है।
जिले के लोगों ने पिछले वर्षों में आई बाढ़ से काफी तबाही झेली है। बाढ़ से बचाव के लिए बने जिले में 454 किमी लंबाई के 39 बांध रैन कट और रैट होल से जर्जर होने के बाद भी मरम्मत नहीं हो सके हैं। जिले में राप्ती, बूढ़ी राप्ती, कूड़ा घोघी, बाणगंगा आदि नदियों के संवेदनशील और अति संवेदनशील कटान स्थलों पर पक्के बचाव कार्य नहीं होने कटान के निकटवर्ती गांवों में दहशत है। राप्ती नदी के अति संवेदनशील कटान स्थल सिंगारजोत, बेतनार, सतवाढ़ी, डेंगहर, बूढ़ी राप्ती के तनेजवा, भुतहिया, कूड़ा नदी के सेमरा, इमिलिहा कटान स्थलों के पास के गांवों में बचाव कार्य नहीं होने से दहशत व्याप्त है। बूढ़ी राप्ती नदी के किनारे स्थित हथिवड़ताल गांव के तिवारी टोले के निवासी राधेश्याम का कहना है कि पिछले वर्षों में कटान से 15 लोगों के घर नदी में विलीन हो चुके है और कई घर कटान के मुहाने पर है, लेकिन प्रशासन के तरफ से कोई भी बचाव कार्य नहीं कराया गया है।
1998 में आई बाढ़ ने मचाई थी तबाही
वर्ष 1998 में आई बाढ़ ने जिले में तबाही मचा दी थी। इससे जिले के कई बांध टूट गए थे, जिले के 2545 राजस्व गांवों में 1693 गांव प्रभावित हुए और एक हजार से अधिक गांव पानी से चारो तरफ से घिर गए थे। इस दौरान 52 मनुष्यों और 481 पशुओं की मौत होने के साथ ही 1.26 लाख हेक्टेयर फसल नष्ट हो गई थी।
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शासन से बांधों की मरम्मत के लिए 70 लाख रुपये आवंटित हुए हैं, इसमें 303 किमी बांध मरम्मत कराने के साथ ही 40 प्रतिशत धन बाढ़ की आपदा के दौरान त्वरित बचाव कार्य के लिए सुरक्षित रखने का निर्देश मिला है। साथ ही तीन कटान स्थलों पर बचाव कार्य कराए जा रहे है।
- आरके सिंह, अधिशासी अभियंता, निर्माण खंड सिंचाई
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राप्ती, बूढ़ी राप्ती, कूड़ा, बाणगंगा नदियां बारिश में मचाती हैं तबाही
कटान स्थलों पर तीन वर्षों से नहीं हुए बचाव कार्य, मैरूंड रहते हैं 1053 गांव
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। बांधों की मरम्मत नहीं होने और कटान स्थलों पर पक्के बचाव कार्य नहीं होने से बाढ़ प्रभावित 1693 गांवों के लोग मानसून की आहट से ही दहशत में है। प्रत्येक वर्ष बाढ़ और कटान की त्रासदी झेलने वाले जिले के 1053 गांव मैरूंड (चारों ओर पानी से घिर जाना) हो जाते हैं। वहीं विभाग को बचाव और मरम्मत के लिए धन का इंतजार है।
जिले के लोगों ने पिछले वर्षों में आई बाढ़ से काफी तबाही झेली है। बाढ़ से बचाव के लिए बने जिले में 454 किमी लंबाई के 39 बांध रैन कट और रैट होल से जर्जर होने के बाद भी मरम्मत नहीं हो सके हैं। जिले में राप्ती, बूढ़ी राप्ती, कूड़ा घोघी, बाणगंगा आदि नदियों के संवेदनशील और अति संवेदनशील कटान स्थलों पर पक्के बचाव कार्य नहीं होने कटान के निकटवर्ती गांवों में दहशत है। राप्ती नदी के अति संवेदनशील कटान स्थल सिंगारजोत, बेतनार, सतवाढ़ी, डेंगहर, बूढ़ी राप्ती के तनेजवा, भुतहिया, कूड़ा नदी के सेमरा, इमिलिहा कटान स्थलों के पास के गांवों में बचाव कार्य नहीं होने से दहशत व्याप्त है। बूढ़ी राप्ती नदी के किनारे स्थित हथिवड़ताल गांव के तिवारी टोले के निवासी राधेश्याम का कहना है कि पिछले वर्षों में कटान से 15 लोगों के घर नदी में विलीन हो चुके है और कई घर कटान के मुहाने पर है, लेकिन प्रशासन के तरफ से कोई भी बचाव कार्य नहीं कराया गया है।
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1998 में आई बाढ़ ने मचाई थी तबाही
वर्ष 1998 में आई बाढ़ ने जिले में तबाही मचा दी थी। इससे जिले के कई बांध टूट गए थे, जिले के 2545 राजस्व गांवों में 1693 गांव प्रभावित हुए और एक हजार से अधिक गांव पानी से चारो तरफ से घिर गए थे। इस दौरान 52 मनुष्यों और 481 पशुओं की मौत होने के साथ ही 1.26 लाख हेक्टेयर फसल नष्ट हो गई थी।
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शासन से बांधों की मरम्मत के लिए 70 लाख रुपये आवंटित हुए हैं, इसमें 303 किमी बांध मरम्मत कराने के साथ ही 40 प्रतिशत धन बाढ़ की आपदा के दौरान त्वरित बचाव कार्य के लिए सुरक्षित रखने का निर्देश मिला है। साथ ही तीन कटान स्थलों पर बचाव कार्य कराए जा रहे है।
- आरके सिंह, अधिशासी अभियंता, निर्माण खंड सिंचाई