{"_id":"611555bf8ebc3ef4162f5d34","slug":"majlis-held-in-the-memory-of-shaheed-e-karbala-in-hallaur-town-siddharthnagar-news-gkp4053801156","type":"story","status":"publish","title_hn":"हल्लौर कस्बे में शहीद-ए-कर्बला की याद में हुई मजलिस","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
हल्लौर कस्बे में शहीद-ए-कर्बला की याद में हुई मजलिस
विज्ञापन
हल्लौर कस्बे में शहीद-ए-कर्बला की याद में हुई मजलिस
हल्लौर। कर्बला में 72 साथियों के साथ शहादत देने वाले हजरत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम की याद में मनाए जाने वाले माह-ए-मुहर्रम की दो तारीख को हल्लौर में कई स्थानों पर मजलिस मातम कर लोगों ने नजराना-ए-अकीदत को पेश किया।
हल्लौर के अली हसन स्थित इमामबाड़ा में मजलिसों का दौर चल रहा है। सामाजिक दूरी का पालन करते हुए मजलिस में मौलाना जमाल हैदर ने कर्बला के शहीदों की शान पेश की। उन्होंने इमामबाड़ा बाबुल बाबा में भी मजलिस पढ़ी। मौलाना जमाल हैदर ने खिताब करते हुए कहा कि इमाम हुसैन अलै की शहादत इंसानियत का पैगाम देती है। इस्लाम में किसी भूखे की भूख मिटाने से पहले उसका धर्म को नहीं पूछा जाता। इस्लाम में किसी पर जुल्म करने वाला मुसलमान नहीं हो सकता।
मजलिस के पहले हैदर-ए-कर्रार ने मरसिया पढ़ी। मजलिस में अरशी रिजवी, मोहम्मद, औन, वीरू, आफताब, कैफी ताकीब, अमन, इरफान, जहीन हैदर, मोहम्मद आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन
हल्लौर। कर्बला में 72 साथियों के साथ शहादत देने वाले हजरत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम की याद में मनाए जाने वाले माह-ए-मुहर्रम की दो तारीख को हल्लौर में कई स्थानों पर मजलिस मातम कर लोगों ने नजराना-ए-अकीदत को पेश किया।
हल्लौर के अली हसन स्थित इमामबाड़ा में मजलिसों का दौर चल रहा है। सामाजिक दूरी का पालन करते हुए मजलिस में मौलाना जमाल हैदर ने कर्बला के शहीदों की शान पेश की। उन्होंने इमामबाड़ा बाबुल बाबा में भी मजलिस पढ़ी। मौलाना जमाल हैदर ने खिताब करते हुए कहा कि इमाम हुसैन अलै की शहादत इंसानियत का पैगाम देती है। इस्लाम में किसी भूखे की भूख मिटाने से पहले उसका धर्म को नहीं पूछा जाता। इस्लाम में किसी पर जुल्म करने वाला मुसलमान नहीं हो सकता।
विज्ञापन
मजलिस के पहले हैदर-ए-कर्रार ने मरसिया पढ़ी। मजलिस में अरशी रिजवी, मोहम्मद, औन, वीरू, आफताब, कैफी ताकीब, अमन, इरफान, जहीन हैदर, मोहम्मद आदि मौजूद रहे।