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Siddharthnagar News: जाति संबंधी विवादों के निस्तारण में बरतें पारदर्शिता
Sat, 28 Feb 2026 01:50 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Sat, 28 Feb 2026 01:50 AM IST
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पडरौना। विकास भवन सभागार में शुक्रवार को जनपदीय जाति प्रमाण पत्र सत्यापन समिति की बैठक हुई। इसमें कुल पांच मामलों की सुनवाई हुई। बैठक में डीएम ने अधिकारियों को जाति संबंधी विवादों के निस्तारण में पूरी पारदर्शिता बरतने की सलाह दी, ताकि सही तथ्य सामने आ सके।
डीएम महेंद्र सिंह ने जाति संबंधी विवादों की सुनवाई करते हुए कहा कि प्रत्येक मामले में पक्ष एवं विपक्ष को गंभीरता से सुनते हुए संबंधित तहसीलदारों को निर्देश दिया कि जाति संबंधी विवादों का निस्तारण पूरी पारदर्शिता एवं सामाजिक-प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत किया जाए। जाति प्रमाण पत्र के लिए प्राप्त आवेदनों एवं विवादित प्रकरणों में तहसीलदार स्वयं स्थलीय जांच करें। आवेदक के पारिवारिक, सामाजिक एवं वैवाहिक संबंधों को ध्यान में रखते हुए शासनादेश के अनुरूप निर्णय लें। डीएम कहा कि यदि किसी आवेदन को स्वीकृत अथवा निरस्त किया जाता है, तो उसके स्पष्ट एवं ठोस कारण अभिलेखों में अंकित करें, ताकि भविष्य में किसी प्रकार की भ्रांति न रहे। उन्होंने कहा कि जाति प्रमाण पत्र से संबंधित प्रकरणों में वादी या प्रतिवादी जनता दर्शन या समाधान दिवस में शिकायत करते हैं, जबकि यह निर्धारित प्रक्रिया नहीं है। ऐसे मामलों के निस्तारण के लिए शासन की तरफ से स्पष्ट अपील की व्यवस्था निर्धारित की गई है। उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यक्ति का जाति प्रमाण पत्र निर्गत नहीं हो रहा है अथवा किसी अन्य के प्रमाण पत्र पर आपत्ति है, तो वह निर्धारित प्रारूप पर जनपदीय जाति प्रमाण पत्र सत्यापन समिति के समक्ष अपील कर सकता है। समिति के निर्णय से असंतुष्ट होने पर मंडलीय जाति प्रमाण पत्र सत्यापन समिति के समक्ष अपील की जा सकती है।उन्होंने कहा कि जाति प्रमाण पत्र से जुड़े सभी मामलों का निस्तारण निर्धारित वैधानिक प्रक्रिया के अनुरूप ही किया जाएगा।
इस दौरान एडीएम न्यायीक प्रेम कुमार राय, जिला समाज कल्याण अधिकारी रमाशंकर यादव आदि मौजूद रहे।
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डीएम महेंद्र सिंह ने जाति संबंधी विवादों की सुनवाई करते हुए कहा कि प्रत्येक मामले में पक्ष एवं विपक्ष को गंभीरता से सुनते हुए संबंधित तहसीलदारों को निर्देश दिया कि जाति संबंधी विवादों का निस्तारण पूरी पारदर्शिता एवं सामाजिक-प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत किया जाए। जाति प्रमाण पत्र के लिए प्राप्त आवेदनों एवं विवादित प्रकरणों में तहसीलदार स्वयं स्थलीय जांच करें। आवेदक के पारिवारिक, सामाजिक एवं वैवाहिक संबंधों को ध्यान में रखते हुए शासनादेश के अनुरूप निर्णय लें। डीएम कहा कि यदि किसी आवेदन को स्वीकृत अथवा निरस्त किया जाता है, तो उसके स्पष्ट एवं ठोस कारण अभिलेखों में अंकित करें, ताकि भविष्य में किसी प्रकार की भ्रांति न रहे। उन्होंने कहा कि जाति प्रमाण पत्र से संबंधित प्रकरणों में वादी या प्रतिवादी जनता दर्शन या समाधान दिवस में शिकायत करते हैं, जबकि यह निर्धारित प्रक्रिया नहीं है। ऐसे मामलों के निस्तारण के लिए शासन की तरफ से स्पष्ट अपील की व्यवस्था निर्धारित की गई है। उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यक्ति का जाति प्रमाण पत्र निर्गत नहीं हो रहा है अथवा किसी अन्य के प्रमाण पत्र पर आपत्ति है, तो वह निर्धारित प्रारूप पर जनपदीय जाति प्रमाण पत्र सत्यापन समिति के समक्ष अपील कर सकता है। समिति के निर्णय से असंतुष्ट होने पर मंडलीय जाति प्रमाण पत्र सत्यापन समिति के समक्ष अपील की जा सकती है।उन्होंने कहा कि जाति प्रमाण पत्र से जुड़े सभी मामलों का निस्तारण निर्धारित वैधानिक प्रक्रिया के अनुरूप ही किया जाएगा।
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इस दौरान एडीएम न्यायीक प्रेम कुमार राय, जिला समाज कल्याण अधिकारी रमाशंकर यादव आदि मौजूद रहे।