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Siddharthnagar News: घोड़े की सवारी कर पधारेगी मां जगदम्बे, हाथी की सवारी से करेंगी प्रस्थान
Sat, 04 May 2024 03:00 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Sat, 04 May 2024 03:00 AM IST
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सिद्धार्थनगर। हिंदू धर्म में नवरात्र व्रत का विशेष महत्व है। हिंदू मान्यताओं के अनुसार वर्ष में मुख्य रूप से दो बार नवरात्र आते हैं। जिनमे चैत्र नवरात्र और अश्वनी मास की शारदीय नवरात्र शामिल है। इस बार चैत्र नवरात्रि 9 अप्रैल से शुरू हो रही है। यह 17 अप्रैल तक चलेगी। इस बार मां भगवती जगदम्बे आदि शक्ति घोड़े की सवारी से पृथ्वी पर पधार रहीं हैं। जिसका फल उत्तम नहीं है। मां हाथी की सवारी से करेंगी प्रस्थान जिसका फल उत्तम है।
इस बार के नवरात्रि महापर्व को लेकर ज्योतिष के विद्वान मिलाजुला फल बता रहे हैं। जनपद मुख्यालय पर स्थित जय मां वैष्णो देवी ज्योतिष तंत्र अनुष्ठान एवं परामर्श केंद्र के आचार्य योगेश पांडे ने कहा कि इस बार चैत्र नवरात्रि 9 अप्रैल दिन मंगलवार से शुरू होकर 17 अप्रैल बुधवार तक चलेगा। मां जगत जननी जगदंबा घोड़े की सवारी करते हुए आएंगी, वहीं हाथी की सवारी कर प्रस्थान करेंगी। आचार्य योगेश पाण्डेय ने कहा कि इस बार चैत नवरात्रि व्रत का पर्व पूरे नौ दिनों तक चला।
आचार्य योगेश पांडे शास्त्रों का हवाला देते हुए कहे की संवत्सर का प्रथम दिन चैत्र शुक्ल प्रतिपदा मंगलवार 9 अप्रैल से प्रारंभ हो रहा है, जो बहुत ही पुनीत दिवस है। इसी दिन ब्रह्मा ने सृष्टि की रचना की थी। इसलिए आज के दिन को हम सनातनी धर्मी महा उत्सव के रूप में मनाते हैं।
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नौ दिनों तक चलेगा नवरात्रि व्रत
आचार्य योगेश पांडे ने कहा कि महा अष्टमी 16 अप्रैल मंगलवार को होगी। घर-घर कि जाने वाली नवमी की पूजा 16 अप्रैल को की जाएगी। इसे भवानी उत्पत्ति के साथ बसियउरा योग के रूप में भी मनाते हैं। महानवमी 17 अप्रैल बुधवार को है। नवरात्र की समाप्ति से संबंधित हवन पूजन नवमी तिथि पर्यन्त 17 अप्रैल बुधवार को शाम 5:25 बजे के अंदर शास्त्र विधान से कर लिया जाना उत्तम रहेगा।
घोड़े की सवारी से मिलते हैं ये संकेत
आचार्य योगेश पांडे ने कहा कि शास्त्रों की माने तो अगर नवरात्र में मां दुर्गा घोड़े पर सवार होकर पृथ्वी मंडल पर आती है तो इससे छात्र भांग स्तुरगम कहा जाता है। मां दुर्गा के घोड़े के वाहन को शुभ नहीं माना जाता है। ऐसा कहा जाता है की मां दुर्गा के घोड़े पर सवार होकर आने से प्राकृतिक आपदाएं बढ़ सकती हैं ।
कलश स्थापना का शुभ समय
आचार्य योगेश पांडे ने कहा कि शास्त्र विधान के अनुसार 9 अप्रैल को कलश स्थापना शुभ समय सुबह 6:05 से लेकर 10:20 तक है। इस समय में कलश स्थापना करना विशेष शुभ कार्य होगा। उन्होंने कहा इसके अलावा 9 अप्रैल को दोपहर 11:55 बजे से लेकर दोपहर के 12:50 बजे के मध्य अभिजीत मुहूर्त में भी कलश स्थापना करने का विशेष मुहूर्त है। इस समय में किया गया कलश स्थापना घर परिवार के कल्याण के लिए उत्तमकारी फलकारी साबित होगा।
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इस बार के नवरात्रि महापर्व को लेकर ज्योतिष के विद्वान मिलाजुला फल बता रहे हैं। जनपद मुख्यालय पर स्थित जय मां वैष्णो देवी ज्योतिष तंत्र अनुष्ठान एवं परामर्श केंद्र के आचार्य योगेश पांडे ने कहा कि इस बार चैत्र नवरात्रि 9 अप्रैल दिन मंगलवार से शुरू होकर 17 अप्रैल बुधवार तक चलेगा। मां जगत जननी जगदंबा घोड़े की सवारी करते हुए आएंगी, वहीं हाथी की सवारी कर प्रस्थान करेंगी। आचार्य योगेश पाण्डेय ने कहा कि इस बार चैत नवरात्रि व्रत का पर्व पूरे नौ दिनों तक चला।
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आचार्य योगेश पांडे शास्त्रों का हवाला देते हुए कहे की संवत्सर का प्रथम दिन चैत्र शुक्ल प्रतिपदा मंगलवार 9 अप्रैल से प्रारंभ हो रहा है, जो बहुत ही पुनीत दिवस है। इसी दिन ब्रह्मा ने सृष्टि की रचना की थी। इसलिए आज के दिन को हम सनातनी धर्मी महा उत्सव के रूप में मनाते हैं।
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नौ दिनों तक चलेगा नवरात्रि व्रत
आचार्य योगेश पांडे ने कहा कि महा अष्टमी 16 अप्रैल मंगलवार को होगी। घर-घर कि जाने वाली नवमी की पूजा 16 अप्रैल को की जाएगी। इसे भवानी उत्पत्ति के साथ बसियउरा योग के रूप में भी मनाते हैं। महानवमी 17 अप्रैल बुधवार को है। नवरात्र की समाप्ति से संबंधित हवन पूजन नवमी तिथि पर्यन्त 17 अप्रैल बुधवार को शाम 5:25 बजे के अंदर शास्त्र विधान से कर लिया जाना उत्तम रहेगा।
घोड़े की सवारी से मिलते हैं ये संकेत
आचार्य योगेश पांडे ने कहा कि शास्त्रों की माने तो अगर नवरात्र में मां दुर्गा घोड़े पर सवार होकर पृथ्वी मंडल पर आती है तो इससे छात्र भांग स्तुरगम कहा जाता है। मां दुर्गा के घोड़े के वाहन को शुभ नहीं माना जाता है। ऐसा कहा जाता है की मां दुर्गा के घोड़े पर सवार होकर आने से प्राकृतिक आपदाएं बढ़ सकती हैं ।
कलश स्थापना का शुभ समय
आचार्य योगेश पांडे ने कहा कि शास्त्र विधान के अनुसार 9 अप्रैल को कलश स्थापना शुभ समय सुबह 6:05 से लेकर 10:20 तक है। इस समय में कलश स्थापना करना विशेष शुभ कार्य होगा। उन्होंने कहा इसके अलावा 9 अप्रैल को दोपहर 11:55 बजे से लेकर दोपहर के 12:50 बजे के मध्य अभिजीत मुहूर्त में भी कलश स्थापना करने का विशेष मुहूर्त है। इस समय में किया गया कलश स्थापना घर परिवार के कल्याण के लिए उत्तमकारी फलकारी साबित होगा।