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लॉकडाउन में नेपाल में फंसे 120 मजदूर
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लॉकडाउन में नेपाल में फंसे 120 मजदूर
कपिलवस्तु में बच्चों के साथ फंसे हैं सभी लोग
मध्यप्रदेश के सागर जिले के हैं निवासी
अमर उजाला ब्यूरो
कपिलवस्तु। सीमा से सटे नेपाल के पकड़ी बाजार में लॉकडाउन के बाद 120 मजदूर फंस गए हैं। इनमें 40 बच्चे भी शामिल हैं। ऐसे में उन्हें कई प्रकार की समस्याओं से जूझना पड़ रहा है। सभी मजदूर मध्यप्रदेश के सागर जिले के मूल निवासी बताए जा रहे हैं। नेपाल के कपिलवस्तु जनपद की भारतीय सीमा से सटे पकड़ी थाना क्षेत्र स्थित साप्ताहिक बाजार पकड़ी और लबनी में लगभग 120 भारतीय मजदूर काम करते हैं। लॉकडाउन के कारण यह लोग फंस हैं। मजदूरों के अनुसार वे लोग भारत के मध्य प्रदेश के सागर जिले के तहसील व थाना मलथान कस्बे के रहने वाले हैं। यह लोग घूम-घूम कर हस्त निर्मित हंसिया, हथौड़ा, खुरपा, खुरपी आदि लोहे के सामान जगह-जगह बेचते थे। वर्तमान में लॉकडाउन के कारण वहां फंस गए हैं। हालांकि पकड़ी के बाजार व्यवस्थापन समिति व्यापारियों और ग्रामीणों ने इन लोगों के भोजन-पानी की व्यवस्था की है। पकड़ी और लबनी बाजार में फंसे भारतीयों में रमेश लोगडिय़ा, भूरे लोगडिय़ा, राम स्वरूप लोगडिय़ा, संतरा बाई लोगड़िया, मक्खन लोगड़िया, गौरा लोगड़िया, रामस बाई, गीता, गब्बर, सुमेर, राधा, मुकेश, गोलू, अमर, विष्णु लोगड़िया सहित 30 महिलाएं, 50 पुरुष और 40 बच्चे लोग शामिल हैं।
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कपिलवस्तु में बच्चों के साथ फंसे हैं सभी लोग
मध्यप्रदेश के सागर जिले के हैं निवासी
अमर उजाला ब्यूरो
कपिलवस्तु। सीमा से सटे नेपाल के पकड़ी बाजार में लॉकडाउन के बाद 120 मजदूर फंस गए हैं। इनमें 40 बच्चे भी शामिल हैं। ऐसे में उन्हें कई प्रकार की समस्याओं से जूझना पड़ रहा है। सभी मजदूर मध्यप्रदेश के सागर जिले के मूल निवासी बताए जा रहे हैं। नेपाल के कपिलवस्तु जनपद की भारतीय सीमा से सटे पकड़ी थाना क्षेत्र स्थित साप्ताहिक बाजार पकड़ी और लबनी में लगभग 120 भारतीय मजदूर काम करते हैं। लॉकडाउन के कारण यह लोग फंस हैं। मजदूरों के अनुसार वे लोग भारत के मध्य प्रदेश के सागर जिले के तहसील व थाना मलथान कस्बे के रहने वाले हैं। यह लोग घूम-घूम कर हस्त निर्मित हंसिया, हथौड़ा, खुरपा, खुरपी आदि लोहे के सामान जगह-जगह बेचते थे। वर्तमान में लॉकडाउन के कारण वहां फंस गए हैं। हालांकि पकड़ी के बाजार व्यवस्थापन समिति व्यापारियों और ग्रामीणों ने इन लोगों के भोजन-पानी की व्यवस्था की है। पकड़ी और लबनी बाजार में फंसे भारतीयों में रमेश लोगडिय़ा, भूरे लोगडिय़ा, राम स्वरूप लोगडिय़ा, संतरा बाई लोगड़िया, मक्खन लोगड़िया, गौरा लोगड़िया, रामस बाई, गीता, गब्बर, सुमेर, राधा, मुकेश, गोलू, अमर, विष्णु लोगड़िया सहित 30 महिलाएं, 50 पुरुष और 40 बच्चे लोग शामिल हैं।