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मर्यादित जीवन ही होता है सर्वश्रेष्ठ

Sun, 02 Apr 2017 10:17 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला सिद्धार्थनगर
ब्यूरो/अमर उजाला सिद्धार्थनगर Updated Sun, 02 Apr 2017 10:17 PM IST
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Lived life is the best
चेतिया में चल रही राम कथा में मौजूद श्रद्धालु। - फोटो : अमर उजाला
मिश्रौलिया। चेतिया कस्बा स्थित राधा-कृष्ण मंदिर परिसर में चल रही नौ दिवसीय संगीतमय श्रीरामकथा के चौथे दिन बाल संत स्वरूपानंद ने श्रीराम के जन्म का प्रसंग सुनाया। साथ ही मर्यादित जीवन का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि भगवान राम ने पृथ्वी पर बढ़ रहे पाप को खत्म करने के लिए ही जन्म लिया था। हर युग में प्रभु ऐसे ही अवतार लेकर धरती पर आते हैं। उन्होंने मर्यादित जीवन का महत्व बताया। कहा कि बेटियों को मर्यादा में रहना चाहिए। मर्यादा ही उनका गहना है। हमेशा मां-बाप का कहना मानना चाहिए।
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बेटा में दोष आने पर तो एक कुल खराब होता है, लेकिन अगर बेटी में कोई दोष आ जाए तो सात कुल खराब हो जाता है। अगर बेटी मर्यादा में रहती है तो आने वाले सात कुल ठीक हो जाते हैं। कथा के दौरान राकेश गुप्ता, वंदना गुप्ता, गुड्डू सिंह, राकेश अग्रहरि, जयहिंद, भुवाल, मुन्नू गुप्ता, नान्हक राम, प्रकाश चौरसिया, अमित, अभिषेक, डब्लू यादव, शांतेश्वर नाथ त्रिपाठी, चंदू सिंह, राधेश्याम गुप्ता, राममोहन मिश्रा, भोला बाबा, राघव सिंह, अमर, गोगो भार्गव, मोल्हू वर्मा, रामअचल वर्मा और अखिलेश आदि मौजूद रहे।
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