{"_id":"6a2717ac3cb43c3e8908b832","slug":"life-is-drowning-in-mismanagement-breath-is-being-held-in-search-of-resources-siddharthnagar-news-c-227-1-sgkp1033-159443-2026-06-09","type":"story","status":"publish","title_hn":"Siddharthnagar News: बदइंतजामी में डूब रही जिंदगी, संसाधनों की तलाश में थम रही सांस","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Siddharthnagar News: बदइंतजामी में डूब रही जिंदगी, संसाधनों की तलाश में थम रही सांस
Tue, 09 Jun 2026 12:57 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Tue, 09 Jun 2026 12:57 AM IST
विज्ञापन
डुमरियागंज राप्ती नदी में नहाने गऐ युवक के डूबने की खबर पर मौके पर लगी ग्रामीणों की भीड। फाइल फ
- फोटो : मोनिका कुमारी
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सिद्धार्थनगर। भीषण गर्मी के कारण लोग नदी और तालाबों में नहाने के लिए ज्यादा उतरने लगे हैं। वहीं, रील की दीवानगी ने युवाओं को इस ओर आकर्षित किया है। ऐसे में हादसों में डूबकर उनकी जान जा रही है। पिछले दो दिन में एक बालक और एक युवक की दो अलग-अलग हादसों में डूबकर मौत हो गई। यहां डूबने वालों को बचाना बड़ी चुनौती है।
स्थानीय स्तर पर कोई ऐसी व्यवस्था या प्रशिक्षित गोताखोर नहीं हैं, जिससे लोगों की जान बचाने में मदद मिल सके। डूबने की खबर के बाद संसाधनों की तलाश शुरू होती है और इस बीच बीत रहा हर लम्हा डूबने वाले को मौत के करीब ले जाता है। गहरे पानी में डूब रहे लोगों की तलाश के लिए एसडीआरएफ को जब तक बुलाया जाता है, तबतक बहुत देर हो चुकी होती है।
नेपाल बाॅर्डर से लगे जिले में पहाड़ से निकलने वाली नदियों और नालों का जाल फैला है। राप्ती, बूढ़ी राप्ती, कूड़ा, घोंघी, बानगंगा, घोराही सहित 10 से अधिक नदी और नाले नेपाल से होकर आते हैं। इसमें बरसात में तो उफान और बाढ़ के हालत बने ही रहते हैं। इसके लिए अलावा अन्य दिनों में भी इनमें पानी घटता-बढ़ता रहता है। जनपद में नदी और नालों को दायरा करीब एक हजार किलोमीटर में फैला हुआ है। ऐसे में गर्मी में राहत पाने के लिए आने वालों के लिए नदी और नाले जानलेवा साबित हो रहे हैं।
विज्ञापन
मुख्य नदी के घाट जहां लोग अधिक जाते हैं, वहां प्रशासन ने एहतियात के तौर पर बोर्ड आदि लगवा रखे हैं, जिससे लोग इन घटनाओं से बच सकें। मगर, वहां पहुंचने के बाद लोगों को बोर्ड की जगह नदी और झील के साथ गर्मी से राहत नजर आती है, जिससे बोर्ड की अनदेखी कर लोग छलांग लगा देते हैं।
जनपद बाढ़ प्रभावित है और हर साल गर्मी में डूबने से मौत होती है। ऐसे में कुछ ठोस व्यवस्था की जरूरत है।
विज्ञापन
स्थानीय स्तर पर कोई ऐसी व्यवस्था या प्रशिक्षित गोताखोर नहीं हैं, जिससे लोगों की जान बचाने में मदद मिल सके। डूबने की खबर के बाद संसाधनों की तलाश शुरू होती है और इस बीच बीत रहा हर लम्हा डूबने वाले को मौत के करीब ले जाता है। गहरे पानी में डूब रहे लोगों की तलाश के लिए एसडीआरएफ को जब तक बुलाया जाता है, तबतक बहुत देर हो चुकी होती है।
विज्ञापन
नेपाल बाॅर्डर से लगे जिले में पहाड़ से निकलने वाली नदियों और नालों का जाल फैला है। राप्ती, बूढ़ी राप्ती, कूड़ा, घोंघी, बानगंगा, घोराही सहित 10 से अधिक नदी और नाले नेपाल से होकर आते हैं। इसमें बरसात में तो उफान और बाढ़ के हालत बने ही रहते हैं। इसके लिए अलावा अन्य दिनों में भी इनमें पानी घटता-बढ़ता रहता है। जनपद में नदी और नालों को दायरा करीब एक हजार किलोमीटर में फैला हुआ है। ऐसे में गर्मी में राहत पाने के लिए आने वालों के लिए नदी और नाले जानलेवा साबित हो रहे हैं।
विज्ञापन
मुख्य नदी के घाट जहां लोग अधिक जाते हैं, वहां प्रशासन ने एहतियात के तौर पर बोर्ड आदि लगवा रखे हैं, जिससे लोग इन घटनाओं से बच सकें। मगर, वहां पहुंचने के बाद लोगों को बोर्ड की जगह नदी और झील के साथ गर्मी से राहत नजर आती है, जिससे बोर्ड की अनदेखी कर लोग छलांग लगा देते हैं।
जनपद बाढ़ प्रभावित है और हर साल गर्मी में डूबने से मौत होती है। ऐसे में कुछ ठोस व्यवस्था की जरूरत है।