{"_id":"654e7b6771633e46820aec54","slug":"kavi-sammelan-siddharthnagar-news-c-227-1-sdn1002-8093-2023-11-11","type":"story","status":"publish","title_hn":"Siddharthnagar News: मुंह छिपा कर जाने वाले, क्या तेरी दिली चाहत कुछ भी नहीं","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Siddharthnagar News: मुंह छिपा कर जाने वाले, क्या तेरी दिली चाहत कुछ भी नहीं
Sat, 11 Nov 2023 12:20 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Sat, 11 Nov 2023 12:20 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
फोटो-
डुमरियागंज में कवि सम्मेलन व मुशायरा का आयोजन
संवाद न्यूज एजेंसी
डुमरियागंज। नगर स्थित राजकीय कन्या इंटर कॉलेज परिसर में बृहस्पतिवार की रात एक शाम स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के नाम अखिल भारतीय कवि सम्मेलन एवं मुशायरा का आयोजन किया गयान्ठजिसमें देश के जाने-माने कवियों व शायरों ने अपनी रचनाओं से वाहवाही बटोरी।
कार्यक्रम की शुरुआत शायर सरफराज राही ने की। सुनाया कि मैंने जब नाते पाक के असार से बातें की हैं, यह लगा अहमदे मुख्तार से बातें की हैं। सलोनी उपाध्याय ने पढ़ा कि पट खोल ये माता मैं तेरे द्वार आई हूं, आंसुओं से लगा लो ये दरख्वास्त लाई हूं। शायर अकमल बलरामपुरी ने पढ़ा कि हमारे देश की मिट्टी तुझे मां भी कहते हैं, तेरे इस गोद में भी कई शैतान बाकी हैं। मंजू गौतम ने पढ़ा कि मुंह छुपा कर जाने वाले क्या दिली चाहत कुछ भी नहीं है।
कवि महेश श्रीवास्तव ने अपने अंदाज में एक से बढ़कर एक शेर पढ़ते हुए खूब तालियां बटोरीं। उन्होंने पढ़ा कि दिल को मेरे खरबूजे जैसा काट देना, एक-एक टुकड़ा हसीनों में बांट देना। शायरा गुले साहिबा फतेहपुरी ने गीत सुनाया कि पास इस तरह के अंधेरे कि उजाले भी रहे, मेरा मस्जिद भी रहे शिवाला भी रहे। जहर की आग घोल के देने वाले तेरे होठों पर प्यार का प्याला भी रहे।
विज्ञापन
कवि पंकज सिद्धार्थ ने सुनाया कि मोहब्बत का सफर मेरा अगर आसान हो जाए तो सारी जिंदगी तुझ पर मेरी कुर्बान हो जाए। सलोनी उपाध्याय ने सुनाया कि एक रोटी कमाई है, एक रोटी बनाई है, मुख में भी राम नहीं मन में भी राम नहीं।
कवि ज्ञानेंद्र द्विवेदी ने माहौल को और खुशनुमा बनाते हुए अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं। उन्होंने पढ़ा कि टुकड़े-टुकड़े इतने टुकड़े, टुकड़ों से पूछ रहा हूं मेरा हिंदुस्तान कहां है। युवा शायर जमील अख्तर जैतपुरी ने पढ़ा कि दिल की उल्फत की खुशबू महकने लगी, बस यही बात सबको खटकने लगी।
आखिरी दौर के मुशायरा में सरफराज, अरुणेश विश्वकर्मा, बलराम त्रिपाठी, जमील, डॉ. रामकृष्ण लाल जगमग, शहर अंजुम ने भी अपनी रचनाएं पेश कीं। कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. रामकृष्ण लाल जगमग व संचालन राम प्रकाश गौतम ने किया।
विज्ञापन
डुमरियागंज में कवि सम्मेलन व मुशायरा का आयोजन
संवाद न्यूज एजेंसी
डुमरियागंज। नगर स्थित राजकीय कन्या इंटर कॉलेज परिसर में बृहस्पतिवार की रात एक शाम स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के नाम अखिल भारतीय कवि सम्मेलन एवं मुशायरा का आयोजन किया गयान्ठजिसमें देश के जाने-माने कवियों व शायरों ने अपनी रचनाओं से वाहवाही बटोरी।
कार्यक्रम की शुरुआत शायर सरफराज राही ने की। सुनाया कि मैंने जब नाते पाक के असार से बातें की हैं, यह लगा अहमदे मुख्तार से बातें की हैं। सलोनी उपाध्याय ने पढ़ा कि पट खोल ये माता मैं तेरे द्वार आई हूं, आंसुओं से लगा लो ये दरख्वास्त लाई हूं। शायर अकमल बलरामपुरी ने पढ़ा कि हमारे देश की मिट्टी तुझे मां भी कहते हैं, तेरे इस गोद में भी कई शैतान बाकी हैं। मंजू गौतम ने पढ़ा कि मुंह छुपा कर जाने वाले क्या दिली चाहत कुछ भी नहीं है।
विज्ञापन
कवि महेश श्रीवास्तव ने अपने अंदाज में एक से बढ़कर एक शेर पढ़ते हुए खूब तालियां बटोरीं। उन्होंने पढ़ा कि दिल को मेरे खरबूजे जैसा काट देना, एक-एक टुकड़ा हसीनों में बांट देना। शायरा गुले साहिबा फतेहपुरी ने गीत सुनाया कि पास इस तरह के अंधेरे कि उजाले भी रहे, मेरा मस्जिद भी रहे शिवाला भी रहे। जहर की आग घोल के देने वाले तेरे होठों पर प्यार का प्याला भी रहे।
विज्ञापन
कवि पंकज सिद्धार्थ ने सुनाया कि मोहब्बत का सफर मेरा अगर आसान हो जाए तो सारी जिंदगी तुझ पर मेरी कुर्बान हो जाए। सलोनी उपाध्याय ने सुनाया कि एक रोटी कमाई है, एक रोटी बनाई है, मुख में भी राम नहीं मन में भी राम नहीं।
कवि ज्ञानेंद्र द्विवेदी ने माहौल को और खुशनुमा बनाते हुए अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं। उन्होंने पढ़ा कि टुकड़े-टुकड़े इतने टुकड़े, टुकड़ों से पूछ रहा हूं मेरा हिंदुस्तान कहां है। युवा शायर जमील अख्तर जैतपुरी ने पढ़ा कि दिल की उल्फत की खुशबू महकने लगी, बस यही बात सबको खटकने लगी।
आखिरी दौर के मुशायरा में सरफराज, अरुणेश विश्वकर्मा, बलराम त्रिपाठी, जमील, डॉ. रामकृष्ण लाल जगमग, शहर अंजुम ने भी अपनी रचनाएं पेश कीं। कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. रामकृष्ण लाल जगमग व संचालन राम प्रकाश गौतम ने किया।