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Siddharthnagar News: ककरहवा बॉर्डर बनेगा बुद्ध सर्किट का नया गेटवे, लुंबिनी-वाराणसी के बीच पांच सूत्रीय समझौता

Thu, 09 Jul 2026 03:01 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर Updated Thu, 09 Jul 2026 03:01 AM IST
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Kakrahwa border to become the new gateway to the Buddhist Circuit; five-point agreement reached between Lumbini and Varanasi.
लुंबिनी होटल एसोसिएशन और वाराणसी टूरिज्म गिल्ड के बीच हुआ करार
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पर्यटन प्रवेश द्वार के रूप में विकसित होगा करिदह-ककरहवा चेकपोस्ट, लुंबिनी-वाराणसी बस सेवा फिर शुरू कराने पर भी सहमति
सिद्धार्थनगर/कपिलवस्तु। भारत-नेपाल सीमा के ककरहवा बॉर्डर से होकर बुद्ध सर्किट के धार्मिक पर्यटन को नई रफ्तार मिलने की उम्मीद जगी है। नेपाल के लुंबिनी होटल एसोसिएशन और वाराणसी टूरिज्म गिल्ड के बीच हुए पांच सूत्रीय समझौते (एमओयू) में करिदह-ककरहवा सीमा चौकी को लुंबिनी के प्रमुख अंतरराष्ट्रीय पर्यटन प्रवेश द्वार के रूप में विकसित करने पर सहमति बनी है। साथ ही करीब चार दशक पहले बंद हो चुकी लुंबिनी-वाराणसी सीधी बस सेवा को दोबारा शुरू कराने और संयुक्त धार्मिक पर्यटन पैकेज तैयार करने की दिशा में भी पहल होगी। यदि यह समझौता धरातल पर उतरता है तो सिद्धार्थनगर, लुंबिनी और पूरे बुद्ध सर्किट के पर्यटन और स्थानीय कारोबार को नई गति मिल सकती है।
लुंबिनी में आयोजित तीन दिवसीय ट्रैवल मार्ट के समापन पर लुंबिनी होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष लीलामणि शर्मा पौडेल और वाराणसी टूरिज्म गिल्ड के अध्यक्ष सुभाष कपूर ने समझौते पर हस्ताक्षर किए। इसका उद्देश्य बुद्ध की जन्मस्थली लुंबिनी और भारत की सांस्कृतिक एवं धार्मिक नगरी वाराणसी के बीच पर्यटन सहयोग को औपचारिक रूप देना है।
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समझौते के अनुसार लुंबिनी आने वाले भारतीय श्रद्धालुओं और पर्यटकों को कम से कम एक रात वहां ठहरने के लिए प्रेरित किया जाएगा। इससे स्थानीय होटल उद्योग और पर्यटन कारोबार को मजबूती मिलने की उम्मीद है। अभी बड़ी संख्या में पर्यटक लुंबिनी का भ्रमण कर उसी दिन लौट जाते हैं।
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एमओयू का सबसे अहम बिंदु भारत-नेपाल सीमा पर स्थित करिदह-ककरहवा चेकपोस्ट को लुंबिनी का प्रमुख पर्यटन प्रवेश द्वार विकसित करना है। इसके लिए दोनों संगठन नेपाल और भारत की संघीय, प्रांतीय तथा स्थानीय सरकारों से समन्वय कर आवश्यक पहल करेंगे। इससे ककरहवा बॉर्डर से पर्यटकों की आवाजाही बढ़ने और सिद्धार्थनगर की पर्यटन संभावनाओं को नई पहचान मिलने की उम्मीद है।
समझौते में करीब 40 वर्ष पहले बंद हुई लुंबिनी-वाराणसी सीधी बस सेवा को फिर शुरू कराने का भी प्रस्ताव शामिल है। साथ ही लुंबिनी को भारत के प्रमुख बौद्ध और हिंदू तीर्थस्थलों से जोड़ने वाली परिवहन सेवाओं की संभावनाओं का संयुक्त अध्ययन किया जाएगा।
दोनों संगठन नेपाल के बौद्ध तीर्थस्थलों और भारत के बौद्ध और हिंदू धार्मिक स्थलों को जोड़ते हुए संयुक्त धार्मिक पर्यटन पैकेज तैयार करेंगे। मीडिया, सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स और पर्यटन क्षेत्र से जुड़े प्रतिनिधियों के नियमित भ्रमण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिससे दोनों देशों के धार्मिक पर्यटन का व्यापक प्रचार-प्रसार हो सके।

तीन दिवसीय ट्रैवल मार्ट में वाराणसी, दिल्ली, लखनऊ सहित भारत के विभिन्न शहरों से ट्रैवल एजेंसियों, टूर ऑपरेटरों और होटल उद्योग के करीब 40 प्रतिनिधियों ने भाग लिया। लुंबिनी होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष लीलामणि शर्मा पौडेल ने कहा कि निजी क्षेत्र की यह पहल भविष्य में भारत और नेपाल के बीच धार्मिक पर्यटन को नई दिशा देगी और बुद्ध सर्किट को वैश्विक पहचान दिलाने में मददगार होगी।
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ये है पांच सूत्रीय समझौता
- भारतीय श्रद्धालुओं और पर्यटकों को लुंबिनी में कम से कम एक रात ठहरने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।
- करिदह-ककरहवा सीमा चौकी को लुंबिनी का प्रमुख पर्यटन प्रवेश द्वार बनाने के लिए दोनों देशों की सरकारों से समन्वय किया जाएगा।
- करीब चार दशक पहले बंद हुई लुंबिनी-वाराणसी सीधी बस सेवा को फिर शुरू कराने का प्रयास होगा।
- नेपाल के बौद्ध और भारत के बौद्ध और हिंदू तीर्थस्थलों को जोड़ते हुए संयुक्त धार्मिक पर्यटन पैकेज तैयार किए जाएंगे।
- मीडिया, सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स और पर्यटन क्षेत्र के प्रतिनिधियों के संयुक्त भ्रमण के जरिए दोनों देशों के धार्मिक पर्यटन का प्रचार किया जाएगा।
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सिद्धार्थनगर के लिए इसलिए अहम है यह समझौता
- ककरहवा बॉर्डर को अंतरराष्ट्रीय पर्यटन प्रवेश द्वार के रूप में विकसित करने की दिशा में ठोस पहल।
- बुद्ध सर्किट में सिद्धार्थनगर की रणनीतिक भूमिका और मजबूत होगी।
- होटल, रेस्टोरेंट, टैक्सी, ट्रैवल एजेंसी और स्थानीय व्यापार को मिलेंगे नए अवसर।
- लुंबिनी आने वाले विदेशी और भारतीय पर्यटकों की आवाजाही बढ़ने से सीमा क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को मिलेगा होगा।
- लुंबिनी-श्रावस्ती-कपिलवस्तु-कुशीनगर-वाराणसी धार्मिक सर्किट को नई गति मिलने की संभावना।
- बस सेवा शुरू होने पर भारत-नेपाल के बीच धार्मिक यात्राएं अधिक सुगम होंगी।हेडिंग के कुछ दमदार विकल्प
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