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जिला पंचायत अध्यक्ष के वित्तीय व प्रशासनिक अधिकार पर लगी रोक
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पूर्व में गठित त्रिस्तरीय समिति बहाल हुई, हाईकोर्ट के निर्णय पर शासन का निर्णय
अमर उजाला ब्यूरो
सिद्धार्थनगर। लगभग नौ माह बाद एक बार पुन: हाईकोर्ट के निर्णय पर शासन ने पूर्व में गठित त्रिस्तरीय समिति को बहाल कर दिया है। ऐसे में तत्काल प्रभाव से अध्यक्ष के वित्तीय एवं प्रशासनिक अधिकारों पर रोक लगा दी है। जांच से अध्यक्ष के मुक्त होने तक वित्तीय एवं प्रशासनिक अधिकारों के संचालन के लिए त्रिस्तरीय समिति को कार्य करने का अधिकार दिया है।
जिला पंचायत अध्यक्ष गरीब दास डुमरियागंज से सपा के टिकट पर विधानसभा चुनाव लड़ चुके राम कुमार यादव उर्फ चिनकू यादव के करीबी हैं। मार्च 2019 के प्रथम सप्ताह में भी जिला पंचायत सदस्यों की शिकायत पर हुई जांच में जिला पंचायत अध्यक्ष द्वारा अनियमित भुगतान व अन्य गड़बड़ियों से संबंधित जिलाधिकारी की रिपोर्ट पर शासन ने निर्णय लिया था। इस आदेश के खिलाफ उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर दी गई थी। इसके बाद उच्च न्यायालय की ओर से पुन: त्रिस्तरीय समिति को बहाल करने का निर्णय सुनाया। लिहाजा उत्तर प्रदेश शासन पंचायती राज अनुभाग-2 प्रमुख सचिव अनुराग कुमार श्रीवास्तव की ओर से जारी पत्र के अनुसार पूर्व में गठित त्रिस्तरीय समिति में शामिल जिला पंचायत सदस्य किसमाती, सुजाता सिंह, कुसुमलता शामिल हैं। शासन के इस निर्णय की भनक लगते ही भाजपा व समर्थकों में खुशी की लहर दौड़ गई। इस मामले की अंतिम जांच में आरोपों से मुक्त होने तक जिला पंचायत अध्यक्ष पद की वित्तीय एवं प्रशासनिक शक्तियों तथा कृत्यों के प्रयोग व संपादन पर रोक लगाते हुए अंतिम जांच के लिए मंडलायुक्त बस्ती को जांच अधिकारी नियुक्त किया है। शुक्रवार को देरशाम त्रिस्तरीय समिति के सदस्यों को अपर मुख्य अधिकारी हरिओम नारायन चंद ने पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई।
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अमर उजाला ब्यूरो
सिद्धार्थनगर। लगभग नौ माह बाद एक बार पुन: हाईकोर्ट के निर्णय पर शासन ने पूर्व में गठित त्रिस्तरीय समिति को बहाल कर दिया है। ऐसे में तत्काल प्रभाव से अध्यक्ष के वित्तीय एवं प्रशासनिक अधिकारों पर रोक लगा दी है। जांच से अध्यक्ष के मुक्त होने तक वित्तीय एवं प्रशासनिक अधिकारों के संचालन के लिए त्रिस्तरीय समिति को कार्य करने का अधिकार दिया है।
जिला पंचायत अध्यक्ष गरीब दास डुमरियागंज से सपा के टिकट पर विधानसभा चुनाव लड़ चुके राम कुमार यादव उर्फ चिनकू यादव के करीबी हैं। मार्च 2019 के प्रथम सप्ताह में भी जिला पंचायत सदस्यों की शिकायत पर हुई जांच में जिला पंचायत अध्यक्ष द्वारा अनियमित भुगतान व अन्य गड़बड़ियों से संबंधित जिलाधिकारी की रिपोर्ट पर शासन ने निर्णय लिया था। इस आदेश के खिलाफ उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर दी गई थी। इसके बाद उच्च न्यायालय की ओर से पुन: त्रिस्तरीय समिति को बहाल करने का निर्णय सुनाया। लिहाजा उत्तर प्रदेश शासन पंचायती राज अनुभाग-2 प्रमुख सचिव अनुराग कुमार श्रीवास्तव की ओर से जारी पत्र के अनुसार पूर्व में गठित त्रिस्तरीय समिति में शामिल जिला पंचायत सदस्य किसमाती, सुजाता सिंह, कुसुमलता शामिल हैं। शासन के इस निर्णय की भनक लगते ही भाजपा व समर्थकों में खुशी की लहर दौड़ गई। इस मामले की अंतिम जांच में आरोपों से मुक्त होने तक जिला पंचायत अध्यक्ष पद की वित्तीय एवं प्रशासनिक शक्तियों तथा कृत्यों के प्रयोग व संपादन पर रोक लगाते हुए अंतिम जांच के लिए मंडलायुक्त बस्ती को जांच अधिकारी नियुक्त किया है। शुक्रवार को देरशाम त्रिस्तरीय समिति के सदस्यों को अपर मुख्य अधिकारी हरिओम नारायन चंद ने पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई।
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