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संशोधित - जिला कारागार में बंदियों तक हवाला के जरिए पहुंचता है पैसा
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संशोधित
कमीशन लेकर जेल में बंदियों तक पहुंचाई जाती है रकम
इस रकम से जेल में अपने लिए सुविधाएं जुटाते हैं बंदी
एक राष्ट्रीयकृत बैंक के खाते में मंगवाई जाती है परिजनों से रकम
जेल में एक नंबरदार रखता है बंदियों को दिए जाने वाले धन का हिसाब-किताब
खुद को बंदीरक्षक बताने वाले और बंदी के परिजन के बीच बातचीत का ऑडियो हुआ वायरल
ऐहतेशाम उद्दीन अहमद
सिद्धार्थनगर। जिला कारागार में बंदियों के खर्च के लिए एक रैकेट के जरिए रकम पहुंचती है। बंदियों तक यह रकम एक राष्ट्रीयकृत बैंक की ब्रांच में एक महिला के खाते में ट्रांसफर किए जाने के बाद पहुंचती है। इस खेल में जेल के कई कर्मचारी शामिल हैं। ‘अमर उजाला’ को इस संबंध में बातचीत का ऑडियो मिला है। इन ऑडियो में खुद को जेल कर्मचारी बताने वाला व्यक्ति बंदी के भाई को बैंक खाता नंबर देकर रुपये जमा करवाने को कह रहा है। बातचीत में उक्त व्यक्ति आपत्तिजनक बातें भी करता सुनाई दिया। हालांकि जेल अधीक्षक राकेश सिंह ने ऑडियो किसी जेल कर्मचारी का नहीं, किसी बंदी की होना बताया।
जिला कारागार में देवरिया के दो सगे भाई बंद हैं। खुद को कारागार का बंदीरक्षक बताने वाले एक व्यक्ति ने इस बंदी के देवरिया में रहने वाले भाई को फोन कर बताया कि उसकी तबीयत खराब हो गई है। कारागार में घटिया इलाज होता है, इसलिए बाहर से इलाज कराना होगा। भाई ने इलाज कराने को कहा तो फोन करने वाले ने धन की मांग की। उसने भाई को एक राष्ट्रीयकृत बैंक की एक ब्रांच का एक खाता नंबर दिया और इसमें रकम जमा कराने को कहा। बातचीत में बताया कि इस खाते में अन्य बंदियों के परिजन भी धन डालते हैं। ऑडियो जून के अंतिम सप्ताह का बताया जा रहा है।
कमीशन काट कर बंदियों को मिलती है रकम
आडियो सुनने से पता चला कि बंदियों तक धन कमीशन काट कर पहुंचाया जाता है। कारागार सूत्रों के अनुसार बैंक खाता जिस महिला का है उसका करीबी रिश्तेदार कारागार में बंद है, एटीएम इस रिश्तेदार के पास ही है। जब खाते में धन ट्रांसफर किया जाता है तो एटीएम से निकाल कर 10 से 20 फीसदी कमीशन काटकर बंदी तक रकम पहुंचाई जाती है।
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कोट
एक ऑडियो वायरल हुआ है, इसमें जो व्यक्ति खुद को बंदीरक्षक कह रहा है वह संभवत: बंदीरक्षक नहीं है। फोन करने वाला 99 फीसदी 11 जून को रिहा हुआ एक बंदी है। जांच कर रहा हूं, महिला का खाता नंबर भी उसी बंदी की पत्नी का होने की संभावना है। जांच में सब स्पष्ट हो जाएगा। - राकेश सिंह अधीक्षक जिला कारागार, सिद्धार्थनगर
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कमीशन लेकर जेल में बंदियों तक पहुंचाई जाती है रकम
इस रकम से जेल में अपने लिए सुविधाएं जुटाते हैं बंदी
एक राष्ट्रीयकृत बैंक के खाते में मंगवाई जाती है परिजनों से रकम
जेल में एक नंबरदार रखता है बंदियों को दिए जाने वाले धन का हिसाब-किताब
खुद को बंदीरक्षक बताने वाले और बंदी के परिजन के बीच बातचीत का ऑडियो हुआ वायरल
ऐहतेशाम उद्दीन अहमद
सिद्धार्थनगर। जिला कारागार में बंदियों के खर्च के लिए एक रैकेट के जरिए रकम पहुंचती है। बंदियों तक यह रकम एक राष्ट्रीयकृत बैंक की ब्रांच में एक महिला के खाते में ट्रांसफर किए जाने के बाद पहुंचती है। इस खेल में जेल के कई कर्मचारी शामिल हैं। ‘अमर उजाला’ को इस संबंध में बातचीत का ऑडियो मिला है। इन ऑडियो में खुद को जेल कर्मचारी बताने वाला व्यक्ति बंदी के भाई को बैंक खाता नंबर देकर रुपये जमा करवाने को कह रहा है। बातचीत में उक्त व्यक्ति आपत्तिजनक बातें भी करता सुनाई दिया। हालांकि जेल अधीक्षक राकेश सिंह ने ऑडियो किसी जेल कर्मचारी का नहीं, किसी बंदी की होना बताया।
जिला कारागार में देवरिया के दो सगे भाई बंद हैं। खुद को कारागार का बंदीरक्षक बताने वाले एक व्यक्ति ने इस बंदी के देवरिया में रहने वाले भाई को फोन कर बताया कि उसकी तबीयत खराब हो गई है। कारागार में घटिया इलाज होता है, इसलिए बाहर से इलाज कराना होगा। भाई ने इलाज कराने को कहा तो फोन करने वाले ने धन की मांग की। उसने भाई को एक राष्ट्रीयकृत बैंक की एक ब्रांच का एक खाता नंबर दिया और इसमें रकम जमा कराने को कहा। बातचीत में बताया कि इस खाते में अन्य बंदियों के परिजन भी धन डालते हैं। ऑडियो जून के अंतिम सप्ताह का बताया जा रहा है।
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कमीशन काट कर बंदियों को मिलती है रकम
आडियो सुनने से पता चला कि बंदियों तक धन कमीशन काट कर पहुंचाया जाता है। कारागार सूत्रों के अनुसार बैंक खाता जिस महिला का है उसका करीबी रिश्तेदार कारागार में बंद है, एटीएम इस रिश्तेदार के पास ही है। जब खाते में धन ट्रांसफर किया जाता है तो एटीएम से निकाल कर 10 से 20 फीसदी कमीशन काटकर बंदी तक रकम पहुंचाई जाती है।
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एक ऑडियो वायरल हुआ है, इसमें जो व्यक्ति खुद को बंदीरक्षक कह रहा है वह संभवत: बंदीरक्षक नहीं है। फोन करने वाला 99 फीसदी 11 जून को रिहा हुआ एक बंदी है। जांच कर रहा हूं, महिला का खाता नंबर भी उसी बंदी की पत्नी का होने की संभावना है। जांच में सब स्पष्ट हो जाएगा। - राकेश सिंह अधीक्षक जिला कारागार, सिद्धार्थनगर