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जिला अस्पताल में दवा की कमी से प्रभावित हो रहा इलाज

Wed, 08 Jun 2022 12:24 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Wed, 08 Jun 2022 12:24 AM IST
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jila aspataal mein dava kee kamee se prabhaavit ho raha ilaaj
जिला अस्पताल में दवा की कमी से प्रभावित हो रहा इलाज
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पेट दर्द और बच्चों के इलाज की दवाइयों की है कमी
मरीजों को बाहर से खरीदनी पड़ रही हैं दवाएं
सिद्धार्थनगर। माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज से संबद्घ संयुक्त जिला अस्पताल में दवाइयों की कमी से मरीजों का इलाज प्रभावित हो रहा है। ओपीडी के साथ ही अस्पताल में भर्ती मरीजों को भी पूरी दवा नहीं मिल पा रही है, जबकि गर्मी के मौसम में मरीजों की संख्या बढ़ गई है।
जिला अस्पताल की ओपीडी में मंगलवार को 1186 मरीजों का पंजीयन हुआ, जबकि 136 भर्ती थे। 24 घंटे में भर्ती मरीजों की संख्या 94 रही। अस्पताल में दवा की कमी है। थोड़ी-थोड़ी आवश्यक दवा मंगाकर काम चलाया जा रहा है। बताया जा रहा है कि मरीजों के इलाज के लिए परेशान परिजन खुद ही दवा खरीद रहे हैं ताकि उनके मरीज की तबीयत ठीक हो जाए। इसी प्रकार ओपीडी में जिन्हें अस्पताल के अंदर से पूरी दवा नहीं मिली, वे बाहर से दवा खरीदने को मजबूर हुए।
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पेट के इलाज की दवा नहीं
जिला अस्पताल में गर्मी के कारण उल्टी-दस्त के मरीज बढ़ गए हैं। पेट के इलाज में उपयोगी मेट्रोनिडाजोल इंजेक्शन नहीं है। गैस की दवा ओम्प्राजोल, डायजिन नहीं है, जबकि एसीलाक भी कम मात्रा में है। एंटी एलर्जिक सिटर्जिन नहीं है। पीआईसीयू में भर्ती बच्चों के लिए झटका की दवा मेडाजोलाम व फेनीटोइन नहीं है। इसी प्रकार खांसी की सिरप भी नहीं है।
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रात 11 बजे डॉक्टर ने मांगी दवा
जिला अस्पताल के पीडियाट्रिक आईसीयू के ड्यूटी पर तैनात डॉ. शैलेंद्र ने सोमवार रात करीब 11 बजे सीएमएस डॉ. नीना वर्मा को बताया कि अस्पताल में झटका में उपयोगी मेडाजोलाम नहीं है। उन्होंने एक निजी अस्पताल से दवा मंगाने को कहा। उस दौरान अस्पताल में 13 बच्चे भर्ती थे, जिनमें 10 बच्चों को बुखार के कारण झटका आ रहा था। इस मामले में सीएमएस डॉ. नीना वर्मा ने बताया कि मेडिकल कॉलेज प्रशासन से दवा की मांग की गई है।
पर्ची की फोटो ली और बाहर से खरीदी दवा
जिला अस्पताल में मैंने डॉक्टर को दिखाया तो उन्होंने चार प्रकार की दवाएं लिखीं। मुझे सिर्फ दो प्रकार की दवा मिली। पर्ची दवा काउंटर पर जमा है। फोटो ले लिया हूं अब मेडिकल स्टोर से दवा खरीदूंगा।

झीनक, जोगिया
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पर्ची बनवाने, डॉक्टर को दिखाने और दवा काउंटर पर लाइन लगाने में तीन घंटे का समय लगा, लेकिन पूरी दवा नहीं मिली। पता होता कि पूरी दवा नहीं मिलेगी तो लाइन में लगकर समय नहीं बर्बाद करता। पर्ची के अनुसार तीन प्रकार की दवा नहीं मिली है।
चंद्र प्रकाश, देवलहवा
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वर्जन--
दवा की आपूर्ति नहीं आई है। इस कारण आवश्यक दवाइयों को स्थानीय स्तर पर खरीदने की प्रक्रिया शुरू की गई है। दो दिन के अंदर दवाइयां उपलब्ध हो जाएंगी।
- डॉ. सलिल श्रीवास्तव, प्राचार्य
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