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कहीं कैंपेनियन वोट की बदौलत तो नहीं हुआ प्रमुख चुनाव में खेल
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वोटिंग में बढ़ गए निरक्षर, अक्षम बीडीसी सदस्य
कैंपेनियन वोटरों का बढ़ना बन गया है चर्चा का विषय
कई ब्लॉकों में एक-तिहाई से अधिक बनाए गए थे कैंपेनियन वोटर
परमात्मा शुक्ल
सिद्धार्थनगर। ब्लॉक प्रमुख चुनाव पर नजर डाले तो कई ब्लॉकों में अचानक निरक्षर और शरीर से अक्षम क्षेत्र पंचायत सदस्यों (बीडीसी) की तादाद बढ़ गई। जिन ब्लॉकों में मतदान हुआ, वहां के एक-तिहाई से अधिक सदस्यों ने सहयोगी की मदद ली। अचानक ऐसे सदस्यों में हुई बढ़ोत्तरी चुनाव के बाद चर्चा का विषय बना हुआ है।
सामान्य निर्वाचन प्रक्रिया के तहत मतदान के दौरान सिर्फ शरीर से अक्षम लोगों को मतदान करने के सहयोगी (कैंपेनियन वोटर) दिए जाते हैं, क्योंकि इसमें बैलेट पेपर पर चुनाव चिह्न बने होते हैं तो इसे निरक्षर भी समझ जाते हैं। जबकि जिला पंचायत अध्यक्ष अथवा ब्लॉक प्रमुख चुनाव में निरक्षर एवं शरीर से अक्षम (देखने अथवा हाथ व पैर से अक्षम) व्यक्ति को भी सहयोगी दिया जाता है। जिले के 10 ब्लॉकों में प्रमुख पद के चुनाव में अधिकांश स्थानों पर एक-तिहाई से अधिक मतदाताओं के कैंपेनियन वोट (मतदान के लिए सहयोगी) डाले गए। इतनी बड़ी तादाद में मतदान के लिए सहयोगी लिए जाने से सवाल खड़ा हो रहा है। विपक्ष ने सत्ताधारी प्रत्याशियों पर फर्जी तरीके से कैंपेनियन बना मतदान करा चुनाव में हेराफेरी करने का आरोप लगाया है। जिला निर्वाचन अधिकारी/डीएम दीपक मीणा ने कहा कि सभी एआरओ को नियमानुसार सदस्यों को मतदान के लिए कैंपेनियन बनाने का निर्देश दिया गया था। जहां निर्धारित समय में आए आवेदनों को निस्तारित किया गया।
फर्जी कैंपेनियन बनाने का आरोप
नौगढ़ ब्लॉक में निर्दल प्रमुख प्रत्याशी रही प्रियंका सिंह ने विपक्ष पर फर्जी कैंपेनियन वोट बनाकर चुनाव हराने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि उनके पास मौजूद सदस्यों तक के कैंपेनियन बनाकर मतदान करा दिया गया। सदस्यों की पर्याप्त संख्या के बावजूद हेराफेरी करने उन्हें हराकर विपक्ष ने चुनाव जीता है।
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यहां बने इतने कैंपेनियन
ब्लॉक प्रमुख चुनाव में बढ़नी में सभी 73 मतदाताओं की सापेक्ष 40 कैंपेनियन बनाए गए। जोगिया में सभी 66 सदस्यों के सापेक्ष 31 कैंपेनियन बनाए गए। शोहरतगढ़ में 61 सदस्यों के सापेक्ष 30 कैंपेनियन बनाए गए। डुमरियागंज में 115 के सापेक्ष 70, नौगढ़ में 69 के सापेक्ष 30, भनवापुर में 93 के सापेक्ष 45, बांसी में 76 के सापेक्ष 16 और खेसरहा में 96 के सापेक्ष 35 से अधिक कैंपेनियन बनाए गए।
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कैंपेनियन वोटरों का बढ़ना बन गया है चर्चा का विषय
कई ब्लॉकों में एक-तिहाई से अधिक बनाए गए थे कैंपेनियन वोटर
परमात्मा शुक्ल
सिद्धार्थनगर। ब्लॉक प्रमुख चुनाव पर नजर डाले तो कई ब्लॉकों में अचानक निरक्षर और शरीर से अक्षम क्षेत्र पंचायत सदस्यों (बीडीसी) की तादाद बढ़ गई। जिन ब्लॉकों में मतदान हुआ, वहां के एक-तिहाई से अधिक सदस्यों ने सहयोगी की मदद ली। अचानक ऐसे सदस्यों में हुई बढ़ोत्तरी चुनाव के बाद चर्चा का विषय बना हुआ है।
सामान्य निर्वाचन प्रक्रिया के तहत मतदान के दौरान सिर्फ शरीर से अक्षम लोगों को मतदान करने के सहयोगी (कैंपेनियन वोटर) दिए जाते हैं, क्योंकि इसमें बैलेट पेपर पर चुनाव चिह्न बने होते हैं तो इसे निरक्षर भी समझ जाते हैं। जबकि जिला पंचायत अध्यक्ष अथवा ब्लॉक प्रमुख चुनाव में निरक्षर एवं शरीर से अक्षम (देखने अथवा हाथ व पैर से अक्षम) व्यक्ति को भी सहयोगी दिया जाता है। जिले के 10 ब्लॉकों में प्रमुख पद के चुनाव में अधिकांश स्थानों पर एक-तिहाई से अधिक मतदाताओं के कैंपेनियन वोट (मतदान के लिए सहयोगी) डाले गए। इतनी बड़ी तादाद में मतदान के लिए सहयोगी लिए जाने से सवाल खड़ा हो रहा है। विपक्ष ने सत्ताधारी प्रत्याशियों पर फर्जी तरीके से कैंपेनियन बना मतदान करा चुनाव में हेराफेरी करने का आरोप लगाया है। जिला निर्वाचन अधिकारी/डीएम दीपक मीणा ने कहा कि सभी एआरओ को नियमानुसार सदस्यों को मतदान के लिए कैंपेनियन बनाने का निर्देश दिया गया था। जहां निर्धारित समय में आए आवेदनों को निस्तारित किया गया।
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फर्जी कैंपेनियन बनाने का आरोप
नौगढ़ ब्लॉक में निर्दल प्रमुख प्रत्याशी रही प्रियंका सिंह ने विपक्ष पर फर्जी कैंपेनियन वोट बनाकर चुनाव हराने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि उनके पास मौजूद सदस्यों तक के कैंपेनियन बनाकर मतदान करा दिया गया। सदस्यों की पर्याप्त संख्या के बावजूद हेराफेरी करने उन्हें हराकर विपक्ष ने चुनाव जीता है।
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यहां बने इतने कैंपेनियन
ब्लॉक प्रमुख चुनाव में बढ़नी में सभी 73 मतदाताओं की सापेक्ष 40 कैंपेनियन बनाए गए। जोगिया में सभी 66 सदस्यों के सापेक्ष 31 कैंपेनियन बनाए गए। शोहरतगढ़ में 61 सदस्यों के सापेक्ष 30 कैंपेनियन बनाए गए। डुमरियागंज में 115 के सापेक्ष 70, नौगढ़ में 69 के सापेक्ष 30, भनवापुर में 93 के सापेक्ष 45, बांसी में 76 के सापेक्ष 16 और खेसरहा में 96 के सापेक्ष 35 से अधिक कैंपेनियन बनाए गए।