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Siddharthnagar News: बेसमेंट में अस्पताल और जांच केंद्र, खतरे में जान

Wed, 24 Jun 2026 11:17 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर Updated Wed, 24 Jun 2026 11:17 PM IST
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Hospitals and testing centers in basements, lives at risk
संवाद न्यूज एजेंसी
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सिद्धार्थनगर। लखनऊ कोचिंग सेंटर में हुए अग्निकांड में 15 बच्चों की जान गई और नौ झुलस गए। इस हादसे के बाद शासन सख्त है। सीएम योगी आदित्यनाथ ने बेसमेंट में अस्पताल और व्यवसायिक गतिविधियों पर पूरी तरह से रोक लगाने और जांच करने के निर्देश दिए हैं। जनपद का हाल जानने के लिए संवाद न्यूज एजेंसी की टीम ने मुख्यालय के अस्पतालों की पड़ताल की गई तो अधिकांश स्थानों पर सिलिंडर छोड़कर फायर सर्विस के मानकों की अनदेखी सामने आई।
पड़ताल में जिला मुख्यालय नौगढ़ के अलावा डुमरियागंज, इटवा, बांसी, शोहरतगढ़ तथा प्रमुख कस्बों और चौराहों पर संचालित कई अस्पतालों में फायर सेफ्टी के मानकों की खुलेआम अनदेखी पाई गई।
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अधिकांश स्थानों पर न तो आपातकालीन निकास की समुचित व्यवस्था है और न ही आग लगने की स्थिति से निपटने के पर्याप्त संसाधन मौजूद मिले। ऐसे में यदि किसी अस्पताल में आग या अन्य आपदा की घटना होती है तो मरीजों, तीमारदारों और स्वास्थ्यकर्मियों को बाहर निकालना बेहद मुश्किल हो सकता है।
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बेसमेंटर में अस्पताल, क्लिनिक, जांच और एक्स-रे केंद्रों का संचालन किया जा रहा था। यह अनदेखी यहां भी लोगों की जिंदगी को खतरे में डाल सकती है। अग्निशमन विभाग के आंकड़ों पर गौर करें तो 97 अस्पतालों ने एनओसी ले रखा है। मगर, यहां अगर आग लग जाए या अन्य आपात स्थिति में दम घुटने से कर बीमार व्यक्ति मर जाएगा।
वहीं, कुछ बहु मंजिला मकान में संचालित हो रहे हैं, जहां एसी कूलर के साथ तारों का जाल फैला हुआ है। ऐसे में इस गर्मी में यहां शाॅर्ट सर्किट से आग लगने से इन्कार नहीं किया जा सकता है। कमोबेश यही हाल तहसील मुख्यालयों का है।

जनपद में अस्पतालों की संख्या लगातार बढ़ रही हैं। आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं के नाम पर बड़ी संख्या में निजी अस्पताल और क्लीनिक बेसमेंट में संचालित हो रहे हैं लेकिन यहां मरीजों की सुरक्षा को लेकर कोई ध्यान नहीं है। बेसमेंट और दूसरे या तीसरे मंजिल पर संचालित इन अस्पतालों में आपात स्थिति में न तो भागने की व्यवस्था है और न ही कोई बाहर से जाकर बचा सकता है।
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