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Siddharthnagar News: ऐतिहासिक च्योर्टेन बौद्ध मंदिर स्मारक संरचना मिली
Sun, 03 Mar 2024 10:56 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Sun, 03 Mar 2024 10:56 PM IST
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खुनुवां। सीमा से सटे नेपाल के कपिलवस्तु जिले के प्राचीन शाक्य गणराज्य की राजधानी तिलौराकोट के पूर्वी विहार क्षेत्र की खुदाई के दौरान च्योर्टेन पाया गया था। एक महीने पहले तिलौराकोट के पूर्वी बिहार क्षेत्र में पुरातत्वविदों की ओर से की गई खुदाई के दौरान ऐतिहासिक और पुरातात्विक संरचना मिली थी।
लुंबिनी विकास निधि के पुरातत्व अधिकारी हिमाल उप्रेती के अनुसार च्योर्टेन तिलौराकोट के पूर्वी विहार क्षेत्र की खुदाई के दौरान मिली थी। उन्होंने कहा कि चूंकि पिछले साल की खुदाई में जो स्तूप मिला था, उस पर पोस्टहोल, टाइल्स और गजुर मिले थे। ऐसे च्योरटेन को नेपाल के उत्तरी हिस्से में देखा जा सकता है। उन्होंने कहा कि बौद्ध धर्म के प्रचार-प्रसार के दौरान यहां के च्योरटेन को देखकर हिमालय क्षेत्र में इसका निर्माण हुआ माना जाता है।
पुरातत्व विभाग के मुख्य पुरातत्व अधिकारी भास्कर ग्यावली के अनुसार खुदाई के दौरान मिली संरचनाओं का निर्माण कब हुआ, इसका पता लगाने के लिए रेडियो कार्बन मापकर तिथि निर्धारित की जाएगी और इसके लिए मिट्टी का नमूना प्रयोगशाला में भेजा गया है। जिस तरह हीनयान और महायान में पूजा के लिए स्तूप बनाए जाते हैं, उसी तरह हिमालयी बौद्ध तीर्थ यात्री पूजा के लिए च्योरटेन का निर्माण करते हैं। बौद्ध धर्म के जानकारों के मुताबिक इसे आम भाषा में माने कहा जाता है। लेकिन तिब्बती भाषा में इसे च्योर्टेन कहा जाता है। नेपाल के हिमालयी क्षेत्र में बौद्ध तीर्थ यात्रियों ने जगह-जगह च्योरटेन का निर्माण किया है।
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पूर्वी बिहार क्षेत्र में खुदाई से मिट्टी के बर्तन, कोयला, हड्डी, टाइल, तांबे के सिक्कों के टुकड़े मिले हैं। नेपाल सरकार की ओर से तिलौराकोट को विरासत स्थल के रूप में सूचीबद्ध करने के लिए अंतिम नामांकन दस्तावेज यूनेस्को विश्व विरासत केंद्र को प्रस्तुत किया गया है। 1996 में यूनेस्को ने तिलौराकोट को संभावित विश्व धरोहर स्थल के रूप में सूचीबद्ध किया।
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लुंबिनी विकास निधि के पुरातत्व अधिकारी हिमाल उप्रेती के अनुसार च्योर्टेन तिलौराकोट के पूर्वी विहार क्षेत्र की खुदाई के दौरान मिली थी। उन्होंने कहा कि चूंकि पिछले साल की खुदाई में जो स्तूप मिला था, उस पर पोस्टहोल, टाइल्स और गजुर मिले थे। ऐसे च्योरटेन को नेपाल के उत्तरी हिस्से में देखा जा सकता है। उन्होंने कहा कि बौद्ध धर्म के प्रचार-प्रसार के दौरान यहां के च्योरटेन को देखकर हिमालय क्षेत्र में इसका निर्माण हुआ माना जाता है।
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पुरातत्व विभाग के मुख्य पुरातत्व अधिकारी भास्कर ग्यावली के अनुसार खुदाई के दौरान मिली संरचनाओं का निर्माण कब हुआ, इसका पता लगाने के लिए रेडियो कार्बन मापकर तिथि निर्धारित की जाएगी और इसके लिए मिट्टी का नमूना प्रयोगशाला में भेजा गया है। जिस तरह हीनयान और महायान में पूजा के लिए स्तूप बनाए जाते हैं, उसी तरह हिमालयी बौद्ध तीर्थ यात्री पूजा के लिए च्योरटेन का निर्माण करते हैं। बौद्ध धर्म के जानकारों के मुताबिक इसे आम भाषा में माने कहा जाता है। लेकिन तिब्बती भाषा में इसे च्योर्टेन कहा जाता है। नेपाल के हिमालयी क्षेत्र में बौद्ध तीर्थ यात्रियों ने जगह-जगह च्योरटेन का निर्माण किया है।
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पूर्वी बिहार क्षेत्र में खुदाई से मिट्टी के बर्तन, कोयला, हड्डी, टाइल, तांबे के सिक्कों के टुकड़े मिले हैं। नेपाल सरकार की ओर से तिलौराकोट को विरासत स्थल के रूप में सूचीबद्ध करने के लिए अंतिम नामांकन दस्तावेज यूनेस्को विश्व विरासत केंद्र को प्रस्तुत किया गया है। 1996 में यूनेस्को ने तिलौराकोट को संभावित विश्व धरोहर स्थल के रूप में सूचीबद्ध किया।