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...तो एक एडीओ पंचायत होगा सौ ग्राम पंचायतों का प्रशासक
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...तो एक एडीओ पर सौ ग्राम पंचायतों का होगा कार्यभार
25 दिसंबर को पंचायतों के कार्यकाल खत्म होने के बाद की स्थिति पर असमंजस
प्रधानों के कार्यकाल बढ़ाने का भी शासन ले सकता है निर्णय
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। एक तरफ पंचायत चुनाव की तिथि तो दूसरी तरफ प्रधानों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद की स्थिति पर असमंजस बना हुआ है। लोगों में ग्राम प्रधान का कार्यकाल समाप्त होने के बाद वाली स्थिति के संबंध में कयासबाजी शुरू हो गई है। कई ब्लॉकों में सौ से अधिक गांवों के मात्र एक एडीओ पंचायत के प्रशासक नियुक्त होने पर विकास कार्यों के प्रभावित होने की भी चर्चा तेज होने लगी है। विभागीय अधिकारी शासन के निर्देशों का इंतजार करते दिख रहे हैं।
पंचायत चुनाव की तैयारी के मद्देनजर चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूची का पुनरीक्षण कार्य कराया जा रहा है, जो 29 दिसंबर को अंतिम मतदाता सूची के प्रकाशन के साथ समाप्त होगा। इसी बीच 25 दिसंबर को ही ग्राम पंचायतों का कार्यकाल समाप्त हो जाएगा। कार्यकाल समाप्त होने के बाद गांवों में प्रशासक की नियुक्ति के आसार पर लोगों के बीच कयासबाजी शुरू हो गई है। नियमानुसार ग्राम पंचायतों के प्रशासक पद पर संबंधित ब्लॉक के एडीओ पंचायत को ही नियुक्त किया जाता है। ऐसे में जिले के 14 ब्लॉकों के 1139 ग्राम पंचायतों में प्रशासकों की नियुक्ति करना भी टेढ़ी खीर साबित होगी।
जिले के कई ब्लॉकों में 40 से 80 ग्राम पंचायतें हैं। वहीं, डुमरियागंज और भनवापुर आदि ब्लॉकों में सौ से अधिक ग्राम पंचायतें हैं। लोगों का कहना है कि ऐसे में ब्लॉक में तैनात एकमात्र एडीओ पंचायत के सौ से अधिक गांवों का प्रशासक पद संभालना मुश्किल होगा जिससे गांव के विकास कार्य प्रभावित हो सकते हैं।
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क्षेत्र पंचायतों के एसडीएम होंगे प्रशासक
अगर निर्धारित समय के भीतर पंचायत चुनाव नहीं होते हैं तो त्रिस्तरीय पंचायत पदों पर प्रशासकों की नियुक्ति संभव है। इसमें जिला पंचायत के प्रशासक पद पर डीएम, ब्लॉकों के प्रशासक संबंधित क्षेत्र एसडीएम होंगे। ऐसे में जिले के पांच तहसीलों के प्रत्येक एसडीएम को तीन से पांच ब्लॉकों के प्रशासक पद की जिम्मेदारी संभालनी पड़ सकती है।
कार्यकाल बढ़ाने पर भी हो रही कयासबाजी
निर्धारित समय में चुनाव न होने पर प्रशासकों की नियुक्ति के इतर कार्यकाल बढ़ाने पर भी चर्चा हो रही है। प्रधान संगठन इसकी मांग भी कर रहा है। शासन द्वारा पंचायत चुनाव कराने तक तीन से छह माह तक पंचायतों का कार्यकाल बढ़ाया भी जा सकता है। डीपीआरओ आदर्श कहते हैं कि शासन से इस संबंध में अभी कोई निर्देश नहीं मिला है। निर्देश मिलने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
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25 दिसंबर को पंचायतों के कार्यकाल खत्म होने के बाद की स्थिति पर असमंजस
प्रधानों के कार्यकाल बढ़ाने का भी शासन ले सकता है निर्णय
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। एक तरफ पंचायत चुनाव की तिथि तो दूसरी तरफ प्रधानों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद की स्थिति पर असमंजस बना हुआ है। लोगों में ग्राम प्रधान का कार्यकाल समाप्त होने के बाद वाली स्थिति के संबंध में कयासबाजी शुरू हो गई है। कई ब्लॉकों में सौ से अधिक गांवों के मात्र एक एडीओ पंचायत के प्रशासक नियुक्त होने पर विकास कार्यों के प्रभावित होने की भी चर्चा तेज होने लगी है। विभागीय अधिकारी शासन के निर्देशों का इंतजार करते दिख रहे हैं।
पंचायत चुनाव की तैयारी के मद्देनजर चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूची का पुनरीक्षण कार्य कराया जा रहा है, जो 29 दिसंबर को अंतिम मतदाता सूची के प्रकाशन के साथ समाप्त होगा। इसी बीच 25 दिसंबर को ही ग्राम पंचायतों का कार्यकाल समाप्त हो जाएगा। कार्यकाल समाप्त होने के बाद गांवों में प्रशासक की नियुक्ति के आसार पर लोगों के बीच कयासबाजी शुरू हो गई है। नियमानुसार ग्राम पंचायतों के प्रशासक पद पर संबंधित ब्लॉक के एडीओ पंचायत को ही नियुक्त किया जाता है। ऐसे में जिले के 14 ब्लॉकों के 1139 ग्राम पंचायतों में प्रशासकों की नियुक्ति करना भी टेढ़ी खीर साबित होगी।
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जिले के कई ब्लॉकों में 40 से 80 ग्राम पंचायतें हैं। वहीं, डुमरियागंज और भनवापुर आदि ब्लॉकों में सौ से अधिक ग्राम पंचायतें हैं। लोगों का कहना है कि ऐसे में ब्लॉक में तैनात एकमात्र एडीओ पंचायत के सौ से अधिक गांवों का प्रशासक पद संभालना मुश्किल होगा जिससे गांव के विकास कार्य प्रभावित हो सकते हैं।
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क्षेत्र पंचायतों के एसडीएम होंगे प्रशासक
अगर निर्धारित समय के भीतर पंचायत चुनाव नहीं होते हैं तो त्रिस्तरीय पंचायत पदों पर प्रशासकों की नियुक्ति संभव है। इसमें जिला पंचायत के प्रशासक पद पर डीएम, ब्लॉकों के प्रशासक संबंधित क्षेत्र एसडीएम होंगे। ऐसे में जिले के पांच तहसीलों के प्रत्येक एसडीएम को तीन से पांच ब्लॉकों के प्रशासक पद की जिम्मेदारी संभालनी पड़ सकती है।
कार्यकाल बढ़ाने पर भी हो रही कयासबाजी
निर्धारित समय में चुनाव न होने पर प्रशासकों की नियुक्ति के इतर कार्यकाल बढ़ाने पर भी चर्चा हो रही है। प्रधान संगठन इसकी मांग भी कर रहा है। शासन द्वारा पंचायत चुनाव कराने तक तीन से छह माह तक पंचायतों का कार्यकाल बढ़ाया भी जा सकता है। डीपीआरओ आदर्श कहते हैं कि शासन से इस संबंध में अभी कोई निर्देश नहीं मिला है। निर्देश मिलने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।