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Siddharthnagar News: सिंह नहीं, हाथी पर सवार होकर आएंगी देवी, बढ़ेगी सुख-समृद्धि

Wed, 11 Oct 2023 01:23 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर Updated Wed, 11 Oct 2023 01:23 AM IST
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Goddess will come riding on an elephant, not a lion, happiness and prosperity will increase
सिद्धार्थनगर। इस साल नवरात्र की शुरुआत 15 अक्तूबर रविवार से शुरू हो रही है। आचार्य अच्युत रामानुजाचार्य ने बताया कि रविवार से नवरात्र शुरू होने से इस बार माता सिंह के बजाय हाथी पर सवार होकर आएंगी। सनातन धर्म में प्रतिवर्ष सवारी का विशेष महत्व होता है। मान्यता है कि हाथी पर माता का आगमन समाज के लिए अत्यंत शुभ होगा। नवरात्र का समापन 23 अक्तूबर सोमवार को होगा।
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हिंदू धर्म में शारदीय नवरात्र का विशेष महत्व है। इस दौरान घट स्थापना और नौ दिनों तक मां दुर्गा के नौ रूपों की उपासना की जाती है। ऐसा माना गया है कि मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा करने से सुख-समृद्धि और ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है। आचार्य अच्युत रामानुजाचार्य ने बताया कि इस साल शारदीय नवरात्र की शुरुआत 15 अक्तूबर रविवार से शुरू हो रही है और इसका समापन 23 अक्तूबर सोमवार के दिन में होगा। उसके अगले दिन यानी 24 अक्तूबर, मंगलवार के दिन दशहरा विजयादशमी मनाई जाएगी। इस बार शेरा वाली मां शेर पर नहीं बल्कि हाथी पर सवार होकर आगमन करेंगी। यह बहुत ही शुभ संकेत है। मां दुर्गा का हाथी पर सवार होकर आना बारिश और खेती के लिए बहुत अच्छा माना जाता है। ऐसे में चारों ओर हरियाली ही हरियाली होगी। इसके साथ ही अन्न का खूब उत्पादन होगा।
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नौ दिनों तक चलता है शारदीय नवरात्र का उत्सव
शारदीय नवरात्र के मुख्य दिन को प्रतिपदा कहा जाता है और अंतिम दिन को महानवमी कहा जाता है। शारदीय नवरात्रि का त्योहार मां दुर्गा और उनके नौ अलग-अलग अवतारों को समर्पित है। मां दुर्गा में आस्था रखने वाले सभी लोग और भक्त उत्सव के नौ दिनों के दौरान देवी के अवतार की विधिवत पूजा करते हैं।
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इस दिन होगी इस देवी की पूजा
आचार्य अच्युत रामानुजाचार्य ने बताया कि 15 को घटस्थापना, शैलपुत्री की पूजा, 16 को ब्रह्मचारिणी की पूजा, 17 चंद्र घंटा की पूजा, 18 को कूष्मांडा की पूजा, 19 को स्कंदमाता पूजा की जाएगी। वहीं 20 को कात्यायनी की पूजा, 21 को सरस्वती की पूजा, कालरात्रि पूजा सप्तमी, 22 को दुर्गा अष्टमी महागौरी, 23 को महानवमी की पूजा की जाएगी। वहीं नवरात्र पारण, दुर्गा प्रतिमाओं का विसर्जन 24 अक्टूबर को किया जाएगा।

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क्या कहता है देवी पुराण
आचार्य अच्युत रामानुजाचार्य ने बताया कि देवी भागवत पुराण में मां दुर्गा की सवारियों के बारे में विस्तार से बताया गया है। इस विषय में देवी पुराण में एक श्लोक भी मिलता है जो इस प्रकार है -शशिसूर्ये गजारूढ़ा शनिभौमे तुरंगमे। गुरौ शुक्रे दोलायां बुधे नौका प्रकीर्तिता॥ इस श्लोक का अर्थ है कि जब नवरात्र सोमवार और रविवार से शुरू होता है तो मां दुर्गा का वाहन हाथी होता है। वहीं, अगर नवरात्र मंगलवार और शनिवार से शुरू होती है तो मां का वाहन घोड़ा माना जाता है। लेकिन, अगर नवरात्र की शुरुआत गुरुवार या शुक्रवार से होती है तो मां दुर्गा डोली में बैठकर आती हैं। बुधवार के दिन कलश स्थापना होने से मां दुर्गा नाव पर सवार होकर आती हैं।
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