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बांध के गैप से कई गांवों में मची तबाही, सड़कें डूबीं
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बांसी नगर क्षेत्र के बांध से रिसाव रोकते लोग। संवाद
- फोटो : SIDDHARTHNAGAR
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बांध के गैप से कई गांवों में मची तबाही, सड़कें डूबीं
बांसी। राप्ती नदी के उत्तरी पश्चिमी तट पर बने बीडी बांध के गैप नहीं भरे जाने से करीब 35 गांव जलमग्न हो गए हैं, फसलें डूब गई हैं। इससे बांसी-इटवा सड़क, जिग्निहवा-चेतिया मार्ग, जिग्निहवा-गोठवा मार्ग सहित कई सड़कों पर आवागमन ठप है। लोग घर में कैद हैं। उनके सामने रोजगार व पेट भरने और पशुओं के चारे का संकट खड़ा हो गया है।
बाढ़ की विभीषिका से बचाने के लिए तीन दशक पूर्व बांसी-डुमरियागंज बांध का निर्माण किया गया था। मझवन से गोठवा घाट व बिमौवा-मगरगाहा के बीच एक-एक किमी तक का गैप होने के कारण बांध का निर्माण निरर्थक साबित हो रहा है। बीते साल आई बाढ़ में इन गैप से आए पानी से तीन दर्जन से अधिक गांव जलमग्न हो गए, गांव व घर में पानी भर गया था। किसानों की सारी मेहनत बर्बाद हो गई थी। एक महीने तक लोगों को घर से निकलने के लिए नाव का सहारा लेना पड़ा था।
पशुओं के समक्ष चारे का संकट खड़ा हो गया था और लोग संक्रामक रोगों का शिकार हो गए थे। इसके बावजूद, बांध में स्थित गैप को भरने का काम नहीं हुआ, जिस कारण इस वर्ष भी लोग बाढ़ की तबाही झेल रहे हैं। ग्रामीण राम प्रताप, जवाहर दूबे, भोला सिंह, राघवेंद्र तिवारी का कहना है कि सिंचाई विभाग की उदासीनता के कारण गैप नहीं भरा गया। उनका कहना है कि कई बार क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों व सिंचाई विभाग से बांध बनाए जाने की मांग की गई।
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गैप से आए नदी के पानी से मझवन कलां, गोठवा घाट, हडहा, गदूरहिया, जनकपुर, मऊ, धूसिया, मंझारी, सिहोरिया, पीपरा, निबिहवा, तेलौरा, बनौली, मेचुका, जाल्हेखोर, सिंघिया, भैसठ, कोल्हुई, अमघटी, बिमौवा खुर्द, बिमोआ बुजुर्ग, मगरगाहा, भटोली, रमटिकरा, डडवाढडी, महुआ, अतरमू, जाजरगठिया आदि गांव बांध में स्थित गैप से आए बाढ़ के पानी से जलमग्न हो गए हैं। सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता आरके सिंह ने बताया कि प्राप्त बजट के अनुसार, बांधों के गैप भरे गए हैं। बांधों के गैप भरने का कार्य जारी है।
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बांसी। राप्ती नदी के उत्तरी पश्चिमी तट पर बने बीडी बांध के गैप नहीं भरे जाने से करीब 35 गांव जलमग्न हो गए हैं, फसलें डूब गई हैं। इससे बांसी-इटवा सड़क, जिग्निहवा-चेतिया मार्ग, जिग्निहवा-गोठवा मार्ग सहित कई सड़कों पर आवागमन ठप है। लोग घर में कैद हैं। उनके सामने रोजगार व पेट भरने और पशुओं के चारे का संकट खड़ा हो गया है।
बाढ़ की विभीषिका से बचाने के लिए तीन दशक पूर्व बांसी-डुमरियागंज बांध का निर्माण किया गया था। मझवन से गोठवा घाट व बिमौवा-मगरगाहा के बीच एक-एक किमी तक का गैप होने के कारण बांध का निर्माण निरर्थक साबित हो रहा है। बीते साल आई बाढ़ में इन गैप से आए पानी से तीन दर्जन से अधिक गांव जलमग्न हो गए, गांव व घर में पानी भर गया था। किसानों की सारी मेहनत बर्बाद हो गई थी। एक महीने तक लोगों को घर से निकलने के लिए नाव का सहारा लेना पड़ा था।
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पशुओं के समक्ष चारे का संकट खड़ा हो गया था और लोग संक्रामक रोगों का शिकार हो गए थे। इसके बावजूद, बांध में स्थित गैप को भरने का काम नहीं हुआ, जिस कारण इस वर्ष भी लोग बाढ़ की तबाही झेल रहे हैं। ग्रामीण राम प्रताप, जवाहर दूबे, भोला सिंह, राघवेंद्र तिवारी का कहना है कि सिंचाई विभाग की उदासीनता के कारण गैप नहीं भरा गया। उनका कहना है कि कई बार क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों व सिंचाई विभाग से बांध बनाए जाने की मांग की गई।
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गैप से आए नदी के पानी से मझवन कलां, गोठवा घाट, हडहा, गदूरहिया, जनकपुर, मऊ, धूसिया, मंझारी, सिहोरिया, पीपरा, निबिहवा, तेलौरा, बनौली, मेचुका, जाल्हेखोर, सिंघिया, भैसठ, कोल्हुई, अमघटी, बिमौवा खुर्द, बिमोआ बुजुर्ग, मगरगाहा, भटोली, रमटिकरा, डडवाढडी, महुआ, अतरमू, जाजरगठिया आदि गांव बांध में स्थित गैप से आए बाढ़ के पानी से जलमग्न हो गए हैं। सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता आरके सिंह ने बताया कि प्राप्त बजट के अनुसार, बांधों के गैप भरे गए हैं। बांधों के गैप भरने का कार्य जारी है।