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Siddharthnagar News: ईंधन महंगा, बढ़ा रोजमर्रा का खर्च चालकों और कारोबारियों की चिंता बढ़ी
Fri, 22 May 2026 12:53 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Fri, 22 May 2026 12:53 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
भनवापुर। पेट्रोल-डीजल और सीएनजी की कीमतों में बढ़ोतरी का असर अब स्थानीय स्तर पर भी दिखाई देने लगा है। ईंधन महंगा होने से वाहन चालकों, छोटे कारोबारियों और आम उपभोक्ताओं की चिंता बढ़ गई है।
स्थानीय स्तर पर वाहन स्वामियों का कहना है कि पेट्रोल 98.79 रुपये, डीजल 92.09 रुपये प्रति लीटर और सीएनजी 97.30 रुपये प्रति किलोग्राम पहुंचने के बाद रोजमर्रा का खर्च बढ़ गया है। पहले से रसोई गैस, बिजली और खाद्य वस्तुओं की महंगाई झेल रहे लोगों के लिए यह अतिरिक्त बोझ बन रहा है।
वाहन चालक अंचल श्रीवास्तव ने बताया कि ईंधन महंगा होने से परिचालन लागत बढ़ गई है। पहले नौ से दस रुपये प्रति किलोमीटर की दर से यात्रियों को ले जाते थे, लेकिन अब 13 से 15 रुपये प्रति किलोमीटर तक किराया लेना पड़ रहा है।
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ऑटो चालक रामशंकर ने कहा कि डीजल-पेट्रोल की बढ़ी कीमतों ने कमाई और खर्च का संतुलन बिगाड़ दिया है। पहले कम दूरी के लिए पांच रुपये प्रति सवारी भी ले लेते थे, लेकिन अब घाटे से बचने के लिए न्यूनतम किराया 10 रुपये करना पड़ रहा है।
व्यापारी चंदन अग्रहरि का कहना है कि ईंधन महंगा होने का असर सिर्फ परिवहन तक सीमित नहीं रहता बल्कि बाहर से आने वाले सामान की लागत पर भी पड़ता है। इससे बाजार में कई वस्तुओं के दाम बढ़ने की आशंका रहती है।
व्यापारी प्रेम अग्रहरि ने बताया कि सीएनजी के दाम में पहले भी बढ़ोतरी हुई थी लेकिन किराये में बदलाव नहीं किया गया।
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भनवापुर। पेट्रोल-डीजल और सीएनजी की कीमतों में बढ़ोतरी का असर अब स्थानीय स्तर पर भी दिखाई देने लगा है। ईंधन महंगा होने से वाहन चालकों, छोटे कारोबारियों और आम उपभोक्ताओं की चिंता बढ़ गई है।
स्थानीय स्तर पर वाहन स्वामियों का कहना है कि पेट्रोल 98.79 रुपये, डीजल 92.09 रुपये प्रति लीटर और सीएनजी 97.30 रुपये प्रति किलोग्राम पहुंचने के बाद रोजमर्रा का खर्च बढ़ गया है। पहले से रसोई गैस, बिजली और खाद्य वस्तुओं की महंगाई झेल रहे लोगों के लिए यह अतिरिक्त बोझ बन रहा है।
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वाहन चालक अंचल श्रीवास्तव ने बताया कि ईंधन महंगा होने से परिचालन लागत बढ़ गई है। पहले नौ से दस रुपये प्रति किलोमीटर की दर से यात्रियों को ले जाते थे, लेकिन अब 13 से 15 रुपये प्रति किलोमीटर तक किराया लेना पड़ रहा है।
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ऑटो चालक रामशंकर ने कहा कि डीजल-पेट्रोल की बढ़ी कीमतों ने कमाई और खर्च का संतुलन बिगाड़ दिया है। पहले कम दूरी के लिए पांच रुपये प्रति सवारी भी ले लेते थे, लेकिन अब घाटे से बचने के लिए न्यूनतम किराया 10 रुपये करना पड़ रहा है।
व्यापारी चंदन अग्रहरि का कहना है कि ईंधन महंगा होने का असर सिर्फ परिवहन तक सीमित नहीं रहता बल्कि बाहर से आने वाले सामान की लागत पर भी पड़ता है। इससे बाजार में कई वस्तुओं के दाम बढ़ने की आशंका रहती है।
व्यापारी प्रेम अग्रहरि ने बताया कि सीएनजी के दाम में पहले भी बढ़ोतरी हुई थी लेकिन किराये में बदलाव नहीं किया गया।
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