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फर्जीवाड़ा : एसटीएफ की पकड़ में आए 29 फर्जी शिक्षक, जल्द होंगे बर्खास्त
Thu, 11 Jan 2024 11:29 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Thu, 11 Jan 2024 11:29 PM IST
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दूसरे के प्रमाण पत्र पर नौकरी करने वाले 121 फर्जी शिक्षकों का दर्ज हो चुका है केस, खा चुके हैं जेल की हवा
44.61 करोड़ वेतन ले चुके हैं 50 फर्जी शिक्षक, रिकवरी नहीं
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। बेसिक शिक्षा विभाग में फर्जीवाड़ा करके शिक्षक बने 29 जालसाजों पर जल्द ही बड़ी कार्रवाई होगी। एसटीएफ की ओर से की गई जांच में फर्जीवाड़े की पुष्टि हुई है। जल्द ही बर्खास्त करने के साथ केस दर्ज कराया जाएगा। इनकी बर्खास्तगी के बाद जिले में फर्जी दस्तावेज के सहारे पकड़े गए शिक्षकों की संख्या 150 हो जाएगी। क्योंकि अब तक जिले में 121 फर्जी शिक्षकों को बर्खास्त करके केस दर्ज कराया जा चुका है। इसमें अधिकांश जेल की हवा खा चुके हैं। विभागीय शिथिलता का नतीजा है कि अभी मात्र 50 शिक्षकों पर 44.61 करोड़ वेतन लेने की पुष्टि हुई है, जिनकी रिकवरी की फाइल आगे नहीं बढ़ पाई है।
बेसिक शिक्षा विभाग में विभागीय जिम्मेदार और शिक्षा माफिया की गठजोड़ इतनी तगड़ी थी कि मेहनत करने वाले मारे फिर रहे थे और फर्जीवाड़ा करके दूसरे की डिग्री पर नौकरी दिलाने का खेल जारी रहा। फर्जी दस्तावेज के सहारे नौकरी हासिल करने का सिलसिला बहुत पुराना है। लगभग पांच साल पहले एसटीएफ ने जब जिले में फर्जी शिक्षक भर्ती का भंडाफोड़ किया तो पता चला कि वर्ष 1990 से यहां फर्जीवाड़े का खेल चल रहा है। दूसरे के दस्तावेज पर दूसरा व्यक्ति नौकरी कर रहा है। जांच का दायरा बढ़ता गया और फर्जीवाड़ा करने वालों की लिस्ट लंबी होती चली गई। अब इनकी संख्या 121 पहुंच गई है। जिन्हें बर्खास्त किया गया। विभागीय जिम्मेदारों के तहरीर पर अलग- अलग थानों में धोखाधड़ी सहित अन्य धारा में केस दर्ज किया गया। इसमें गिरफ्तारी करके जेल भेज भी गए। जल्द ही यह आकड़ा डेढ़ शतक यानी 150 को पूरा कर लेगा, क्योंकि फर्जीवाड़े की जांच कर रही है।
एसटीएफ ने प्रदेश के 48 जनपदों 382 फर्जी शिक्षकों को चिह्नित कर दिया है। इसमें सिद्धार्थनगर जनपद में अकेले 29 शिक्षक मिले हैं जो फर्जी दस्तावेज के सहारे नौैकरी हासिल किए हैं। जल्द ही इनके खिलाफ केस दर्ज और बर्खास्तगी की कार्रवाई शुरू होगी। हालांकि अभी विभागीय जिम्मेदार जानकारी होने से इन्कार कर रहे हैं।
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अभी 50 शिक्षकों के वेतन का हो पाया है आंकलन
एक रिपोर्ट के मुताबिक लंबे समय से कार्य करने वाले 50 शिक्षकों को दिया गया वेतन का हिसाब कर पाया है। इन्हें वेतन मद में 4,4618118 रुपये का भुगतान दिया गया है। विभाग ने इनसे वेतन रिकवरी की कार्रवाई शुरू की पर जिम्मेदारों की लापरवाही से यह अभी तक परवान नहीं चढ़ सका है। इनकी सूची बेसिक शिक्षा विभाग के वित्त एवं लेखाधिकारी कार्यालय से बनकर तैयार है पर इसे अग्रिम कार्रवाई के लिए डीएम को नहीं भेजा जा सका है।
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25-30 वर्ष पहले से ही नौकरी कर रहे थे फर्जी शिक्षक
विभाग से मिली जानकारी के अनुसार जनपद में फर्जी प्रमाण पत्र के आधार पर अब तक जिले में 121 शिक्षकों को बर्खास्त किया गया है। इनमें 20 ऐसे फर्जी शिक्षक पाए गए हैं, जिनकी तैनाती 1990 या उसके बाद हुई थी। यह 25 से 30 वर्ष पहले से ही नौकरी कर रहे थे। इनका आंकड़ा तैयार किया गया है। यह पीएफ धारक भी हैं, जबकि 47 फर्जी शिक्षकों के वेतन भुगतान की राशि को जोड़ा जाना है।
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पुलिस को छका चुके हैं शिक्षक
फर्जीवाड़ा करने के नौकरी हासिल करने वाले शिक्षकों को पकड़ने में बड़ी मशक्त मशक्कत करनी पड़ रही है। दस्तावेज के आधार पर जिस पते पर मुकदमा दर्ज हुआ है। वहां पहुंचने के बाद पता चला यहां पर इस नाम कोई व्यक्ति नहीं है। इसी सप्ताह एक फर्जी शिक्षक पकड़ा गया था। उसके खिलाफ 2019 में फर्जीवाड़ा करने का केस दर्ज हुआ था। लेकिन दिए गए प्रमाण पत्र के पते पर मिल ही नहीं रहता था। वह बस्ती जनपद के कप्तानगंज थाना क्षेत्र का रहने वाला था। बड़ी मशक्कत के बाद चार साल बाद पकड़ा गया। इसी प्रकार अन्य मामलों में पुलिस को गिरफ्तारी में जूझना पड़ा।
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अभिलेख के जांच में पकड़ा गया फर्जीवाड़ा
2017 में हुई काउंसिलिंग के तहत 15 दिन पर शिक्षकों की भर्ती शुरू हुई थी। इसमें 300 से अधिक पदों के लिए काउंसिलिंग थी, 87 लोगों ने काउंसिलिंग कराई। देर रात कानपुर देहात निवासी बबलू और राहुल दो चचेरे भाई काउंसिलिंग कराने पहुंचे गए। देर होने का हवाला दिया। प्रमाण पत्र की जांच हुई तो पुराने और नये अभिलेख के पते में अंतर मिला। जब आवेदन फार्म पर दिए गए नंबर पर काल किया गया तो जिसकी दस्तावेज था, वह फिरोजाबाद और मुरादाबाद में कार्यरत होने की जानकारी दिए। फर्जीवाड़े के मामले में दोनों पर बीएसए ने केस दर्ज करवाया और जेल गए।
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बोले जिम्मेदार
फर्जी दस्तावेज के सहारे नौकरी करने वाले शिक्षक चिह्नित हुए हैं, इसकी हमें जानकारी नहीं है। एसटीएफ मामले की जांच कर रही है। उनकी ओर से चिह्नित लोगों की रिपोर्ट आएगी तो केस दर्ज करवाकर कार्रवाई की जाएगी।
-देवेंद्र कुमार पांडेय, बीएसए
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44.61 करोड़ वेतन ले चुके हैं 50 फर्जी शिक्षक, रिकवरी नहीं
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। बेसिक शिक्षा विभाग में फर्जीवाड़ा करके शिक्षक बने 29 जालसाजों पर जल्द ही बड़ी कार्रवाई होगी। एसटीएफ की ओर से की गई जांच में फर्जीवाड़े की पुष्टि हुई है। जल्द ही बर्खास्त करने के साथ केस दर्ज कराया जाएगा। इनकी बर्खास्तगी के बाद जिले में फर्जी दस्तावेज के सहारे पकड़े गए शिक्षकों की संख्या 150 हो जाएगी। क्योंकि अब तक जिले में 121 फर्जी शिक्षकों को बर्खास्त करके केस दर्ज कराया जा चुका है। इसमें अधिकांश जेल की हवा खा चुके हैं। विभागीय शिथिलता का नतीजा है कि अभी मात्र 50 शिक्षकों पर 44.61 करोड़ वेतन लेने की पुष्टि हुई है, जिनकी रिकवरी की फाइल आगे नहीं बढ़ पाई है।
बेसिक शिक्षा विभाग में विभागीय जिम्मेदार और शिक्षा माफिया की गठजोड़ इतनी तगड़ी थी कि मेहनत करने वाले मारे फिर रहे थे और फर्जीवाड़ा करके दूसरे की डिग्री पर नौकरी दिलाने का खेल जारी रहा। फर्जी दस्तावेज के सहारे नौकरी हासिल करने का सिलसिला बहुत पुराना है। लगभग पांच साल पहले एसटीएफ ने जब जिले में फर्जी शिक्षक भर्ती का भंडाफोड़ किया तो पता चला कि वर्ष 1990 से यहां फर्जीवाड़े का खेल चल रहा है। दूसरे के दस्तावेज पर दूसरा व्यक्ति नौकरी कर रहा है। जांच का दायरा बढ़ता गया और फर्जीवाड़ा करने वालों की लिस्ट लंबी होती चली गई। अब इनकी संख्या 121 पहुंच गई है। जिन्हें बर्खास्त किया गया। विभागीय जिम्मेदारों के तहरीर पर अलग- अलग थानों में धोखाधड़ी सहित अन्य धारा में केस दर्ज किया गया। इसमें गिरफ्तारी करके जेल भेज भी गए। जल्द ही यह आकड़ा डेढ़ शतक यानी 150 को पूरा कर लेगा, क्योंकि फर्जीवाड़े की जांच कर रही है।
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एसटीएफ ने प्रदेश के 48 जनपदों 382 फर्जी शिक्षकों को चिह्नित कर दिया है। इसमें सिद्धार्थनगर जनपद में अकेले 29 शिक्षक मिले हैं जो फर्जी दस्तावेज के सहारे नौैकरी हासिल किए हैं। जल्द ही इनके खिलाफ केस दर्ज और बर्खास्तगी की कार्रवाई शुरू होगी। हालांकि अभी विभागीय जिम्मेदार जानकारी होने से इन्कार कर रहे हैं।
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अभी 50 शिक्षकों के वेतन का हो पाया है आंकलन
एक रिपोर्ट के मुताबिक लंबे समय से कार्य करने वाले 50 शिक्षकों को दिया गया वेतन का हिसाब कर पाया है। इन्हें वेतन मद में 4,4618118 रुपये का भुगतान दिया गया है। विभाग ने इनसे वेतन रिकवरी की कार्रवाई शुरू की पर जिम्मेदारों की लापरवाही से यह अभी तक परवान नहीं चढ़ सका है। इनकी सूची बेसिक शिक्षा विभाग के वित्त एवं लेखाधिकारी कार्यालय से बनकर तैयार है पर इसे अग्रिम कार्रवाई के लिए डीएम को नहीं भेजा जा सका है।
25-30 वर्ष पहले से ही नौकरी कर रहे थे फर्जी शिक्षक
विभाग से मिली जानकारी के अनुसार जनपद में फर्जी प्रमाण पत्र के आधार पर अब तक जिले में 121 शिक्षकों को बर्खास्त किया गया है। इनमें 20 ऐसे फर्जी शिक्षक पाए गए हैं, जिनकी तैनाती 1990 या उसके बाद हुई थी। यह 25 से 30 वर्ष पहले से ही नौकरी कर रहे थे। इनका आंकड़ा तैयार किया गया है। यह पीएफ धारक भी हैं, जबकि 47 फर्जी शिक्षकों के वेतन भुगतान की राशि को जोड़ा जाना है।
पुलिस को छका चुके हैं शिक्षक
फर्जीवाड़ा करने के नौकरी हासिल करने वाले शिक्षकों को पकड़ने में बड़ी मशक्त मशक्कत करनी पड़ रही है। दस्तावेज के आधार पर जिस पते पर मुकदमा दर्ज हुआ है। वहां पहुंचने के बाद पता चला यहां पर इस नाम कोई व्यक्ति नहीं है। इसी सप्ताह एक फर्जी शिक्षक पकड़ा गया था। उसके खिलाफ 2019 में फर्जीवाड़ा करने का केस दर्ज हुआ था। लेकिन दिए गए प्रमाण पत्र के पते पर मिल ही नहीं रहता था। वह बस्ती जनपद के कप्तानगंज थाना क्षेत्र का रहने वाला था। बड़ी मशक्कत के बाद चार साल बाद पकड़ा गया। इसी प्रकार अन्य मामलों में पुलिस को गिरफ्तारी में जूझना पड़ा।
अभिलेख के जांच में पकड़ा गया फर्जीवाड़ा
2017 में हुई काउंसिलिंग के तहत 15 दिन पर शिक्षकों की भर्ती शुरू हुई थी। इसमें 300 से अधिक पदों के लिए काउंसिलिंग थी, 87 लोगों ने काउंसिलिंग कराई। देर रात कानपुर देहात निवासी बबलू और राहुल दो चचेरे भाई काउंसिलिंग कराने पहुंचे गए। देर होने का हवाला दिया। प्रमाण पत्र की जांच हुई तो पुराने और नये अभिलेख के पते में अंतर मिला। जब आवेदन फार्म पर दिए गए नंबर पर काल किया गया तो जिसकी दस्तावेज था, वह फिरोजाबाद और मुरादाबाद में कार्यरत होने की जानकारी दिए। फर्जीवाड़े के मामले में दोनों पर बीएसए ने केस दर्ज करवाया और जेल गए।
बोले जिम्मेदार
फर्जी दस्तावेज के सहारे नौकरी करने वाले शिक्षक चिह्नित हुए हैं, इसकी हमें जानकारी नहीं है। एसटीएफ मामले की जांच कर रही है। उनकी ओर से चिह्नित लोगों की रिपोर्ट आएगी तो केस दर्ज करवाकर कार्रवाई की जाएगी।
-देवेंद्र कुमार पांडेय, बीएसए