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दहशत और दर्द में कट रहे बाढ़ पीड़ितों के दिन-रात
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डुमरियागंज-चंद्रदीप मार्ग पर बाढ़ के पानी में जान जोखिम में डालकर जा रहे ग्रामीण। संवाद
- फोटो : SIDDHARTHNAGAR
दहशत और दर्द में कट रहे बाढ़ पीड़ितों के दिन-रात
औराताल। वैसे तो बनगाई और सुकरौली गांव के लोग कमोबेश हर साल बाढ़ का दर्द झेलते हैं, लेकिन इस बार त्रासदी की सारी हदें टूट गईं। चारों तरफ से पानी से घिरा गांव, घर में बाढ़ का पानी भरने से लोगों का जीवन दूभर हो गया है। एक तरफ जहरीले कीड़े-मकोड़ों व मकान ढहने की दहशत, दूसरी तरफ भीगने से खाद्य सामग्री और कपड़ों के सड़ने से खाने-पहनने की किल्लत हो गई है। बाढ़ पीड़ितों के दिन-रात दहशत और दर्द के बीच कट रहे हैं।
राप्ती नदी के उफान से डुमरियागंज क्षेत्र के बनगाई और सुकरौली गांव डूब गया है। पानी भरने से कुछ घर ढह गए हैं। लोग खुद तो छत पर समय काट रहे हैं, लेकिन मवेशियों को रहने के लिए जगह नहीं है। बाइक और अन्य वाहन घर और परिसर में डूबे हुए हैं। मदन चंद, श्याम सुंदर, रामप्रकाश, राम सजीवन यादव के घर में चार फीट पानी भरा हुआ है। गांव तक जाने के लिए नाव का सहारा है और रास्ते में लगभग 10 फीट पानी भरा हुआ है।
गांव के बुजुर्गों ने बताया कि बाढ़ तो लगभग हर साल आती है, लेकिन इतनी भयंकर बाढ़ कभी नहीं आई। गांव के बुजुर्ग अध्यापक रामबोध पांडेय ने बताया कि इस बार की बाढ़ बहुत ही भयानक है। राम सुरेमन, मदन चंद का घर गिर गया है। राम प्रकाश का घर डूब गया है। राम जियावन यादव के बरामदे में पानी भरा है। गांव वालों ने बताया कि सरकारी मदद के नाम पर एक दिन दवाइयां मिली हैं। उसके अलावा किसी प्रकार की कोई सहायता नहीं मिली है। सर्वेश पांडेय ने बताया कि गांव और नदी के बीच में अगर एक सहायक बांध बन जाता तो उन्हें हर वर्ष बाढ़ की त्रासदी नहीं झेलनी पड़ती।
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औराताल। वैसे तो बनगाई और सुकरौली गांव के लोग कमोबेश हर साल बाढ़ का दर्द झेलते हैं, लेकिन इस बार त्रासदी की सारी हदें टूट गईं। चारों तरफ से पानी से घिरा गांव, घर में बाढ़ का पानी भरने से लोगों का जीवन दूभर हो गया है। एक तरफ जहरीले कीड़े-मकोड़ों व मकान ढहने की दहशत, दूसरी तरफ भीगने से खाद्य सामग्री और कपड़ों के सड़ने से खाने-पहनने की किल्लत हो गई है। बाढ़ पीड़ितों के दिन-रात दहशत और दर्द के बीच कट रहे हैं।
राप्ती नदी के उफान से डुमरियागंज क्षेत्र के बनगाई और सुकरौली गांव डूब गया है। पानी भरने से कुछ घर ढह गए हैं। लोग खुद तो छत पर समय काट रहे हैं, लेकिन मवेशियों को रहने के लिए जगह नहीं है। बाइक और अन्य वाहन घर और परिसर में डूबे हुए हैं। मदन चंद, श्याम सुंदर, रामप्रकाश, राम सजीवन यादव के घर में चार फीट पानी भरा हुआ है। गांव तक जाने के लिए नाव का सहारा है और रास्ते में लगभग 10 फीट पानी भरा हुआ है।
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गांव के बुजुर्गों ने बताया कि बाढ़ तो लगभग हर साल आती है, लेकिन इतनी भयंकर बाढ़ कभी नहीं आई। गांव के बुजुर्ग अध्यापक रामबोध पांडेय ने बताया कि इस बार की बाढ़ बहुत ही भयानक है। राम सुरेमन, मदन चंद का घर गिर गया है। राम प्रकाश का घर डूब गया है। राम जियावन यादव के बरामदे में पानी भरा है। गांव वालों ने बताया कि सरकारी मदद के नाम पर एक दिन दवाइयां मिली हैं। उसके अलावा किसी प्रकार की कोई सहायता नहीं मिली है। सर्वेश पांडेय ने बताया कि गांव और नदी के बीच में अगर एक सहायक बांध बन जाता तो उन्हें हर वर्ष बाढ़ की त्रासदी नहीं झेलनी पड़ती।
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