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Siddharthnagar News: बाढ़ हर साल बनाती है कर्जदार...चार माह झेलते हैं दर्द

Sat, 13 Jul 2024 01:48 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर Updated Sat, 13 Jul 2024 01:48 AM IST
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Flood makes one a debtor every year...suffers pain for four months
भनवापुर के मछिया मुस्तहकम में पन्नेलाल के घर में भरा पानी छत पर आशियाना बना कर कर रहे गुजारा। स
किसानों के अरमानों पर बाढ़ ने फेरा पानी, सैकड़ों एकड़ धान की फसल बर्बाद
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पानी रहने तक रोजगार, दवाई और पढ़ाई पर भी रहता है संकट

भनवापुर ब्लॉक क्षेत्र के 70 प्रतिशत किसान कर चुके हैं धान की रोपाई

संवाद न्यूज एजेंसी

भनवापुर। ब्लॉक क्षेत्र में नेपाल से पानी छोड़े जाने के कारण बलराम जिले से होकर सिद्धार्थनगर जिले के सिंगार में प्रवेश करने वाली राप्ती नदी के तबाही का मंजर हर साल लोगों को झेलना पड़ता है। करीब डेढ़ दशक से अधर में लटका शाहपुर-भोजपुर बांध का निर्माण कार्य पूरा हो जाता तो राप्ती के कहर को नहीं झेलना पड़ता। एक सप्ताह से राप्ती के बाढ़ की तबाही झेल रहे किसानों के अरमानों पर पानी फेर दिया है।
क्षेत्र में सैकड़ों एकड़ धान की फसल की रोपाई के तत्काल बाद आई बाढ़ ने किसानों की चिंता बढ़ाने में कोई कमी नहीं छोड़ी है। रोपाई के दौरान खाद, बीज, पानी के साथ ही मजदूरों को रोपाई की मजदूरी भी देना काफी अखर रहा है। हजारों एकड़ फसल बाढ़ की भेंट चढ़ जाती है। चार माह रोजी-रोटी का संकट हो जाता है। बाढ़ का पानी जबतक गांव में रहता है। बाजार आने-जाने से लेकर दवा इलाज के लिए परेशान होना पड़ता है। लेकिन इस समस्या का निजात के लिए कभी कोई उपाय नहीं किया गया, नतीजा बाढ़ का दंश हर साल झेल रहे हैं।
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बोले बाढ़ प्रभावित क्षेत्र के किसान

बाढ़ प्रभावित क्षेत्र के धनोहरा गांव निवासी प्रहलाद यादव ने बताया कि बाढ़ आने के दो दिन पहले धान की रोपाई की थी, जिसकी मजदूरी भी नहीं दे पाया। सोचा था एक दो दिनों में कहीं से जुगाड़ कर मजदूरी दे देंगे, मगर बाढ़ के पानी में डूबे धान के फसल की उम्मीद भी खत्म हो गई है। अब बाढ़ हटने के बाद व्यवस्था कर मजदूरी देंगे। क्षेत्र के बिलरिया गांव निवासी चंद्र प्रकाश ने कहा कि हर साल हम लोग राप्ती के कहर को झेलते हैं, जिसमें जहां घरों में पानी भर जाने के कारण रहन सहन में दो से तीन सप्ताह तक परेशानी उठानी पड़ती है। घर की जमा पूंजी लगा कर धान की रोपाई कराई थी, जो एक सप्ताह से बाढ़ में डूबी है।
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पेंड़रियाजीत गांव निवासी शिव पूजन ने बताया कि शासन व प्रशासन के द्वारा अगर समय रहते बाढ़ के निजात का उपाय किया जाता तो समस्या खत्म हो जाती। बढ़या गांव निवासी तपानाथ पांडेय ने बताया कि अक्तूबर 2022 में आई बाढ़ के दौरान फसलें पकने की कगार पर थी। किसान अपना फसल बीमा करा लिए थे, जिसका मुआवजा मिल जाने से कुछ राहत मिल गया था। इस बार अभी धान की रोपाई करा कर फसल बीमा के बारे में सोच रहे थे कि राप्ती के तांडव का शिकार हो गए है।
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