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बाढ़ से जनजीवन बेहाल
ब्यूरो अमर उजाला/सिद्धार्थनगर
Updated Mon, 01 Aug 2016 11:03 PM IST
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बाढ़
- फोटो : अमर उजाला
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सिद्धार्थनगर। राप्ती नदी का पानी खतरे के निशान से नीचे आने के बाद भी डुमरियागंज क्षेत्र में बाढ़ की स्थिति बनी हुई है। दर्जनों गांवों में पानी घुसा हुआ है और लोगों का घर से निकलना मुश्किल हो रहा है। इटवा क्षेत्र में भी राप्ती नदी का असर दिख रहा है।
ग्राम बेेलवा निवासी नंदा सोनी, कृष्णा सोनी, भोला सोनी, विजय कुमार, रिंकू तिवारी, मिठाईलाल आदि के घरो में बाढ़ का पानी भरा हुआ है। इससे परिवार के लोग दहशत में है। उधर बिजौरा में पूर्व माध्यमिक विद्यालय व प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के अलावा चौराहे पर बना मंदिर पानी से पूरी तरह घिरा है।
वहीं स्वास्थ्य विभाग द्वारा एएनएम सेंटर बिजौरा में सोमवार को बाढ़ स्वास्थ्य शिविर लगाया है। रमवापुर जगतराम में एएनएम सेंटर, मिनी सचिवालय व सरकारी विद्यालय पानी से घिरा हुआ है। इसके अलावा गांव के घप्पू, धीरज, टिंकू, खदेरु, रामू आदि के घर के चारों तरफ पानी भरा हुआ है।
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बाढ़ के पानी के चलते कुछ परिवार के लोग अपना घर बार छोड़कर विद्यालय में बच्चों सहित शरण लिए हुए हैं। रमवापुर जगत राम, केसवाजोत, जहदा मुस्तहकम, गोपिया, सिसवा, बेव मुस्तहकम, असनहरा, कठौतिया, जुड़वनिया, चंदनजोत, डिवलीडीह चौबे, तेनुई, नेहुतुआ, बीरपुर कोहल आदि गांव बाढ़ के पानी से पूरी तरह घिरे हुए हैं। सिसई से बेव व असनहर तक का रास्ता पानी मेें इस कदर डूबा हुआ है कि लोगों का आना-जाना मुश्किल हो रहा है।
बांध टूटने से धान की फसल हुई बरबाद
बांसी। असोगवा-नगवा बांध टूटने के बाद आसपास के इलाकों में भारी तबाही मची। सबसे ज्यादा नुकसान धान की फसल को हुआ है। किसानों की सैकड़ों एकड़ फसल बाढ़ के पानी से तबाह हो गई है। किसानों का कहना है कि यदि अधिकारियों ने समय रहते बांध का दुरुस्त करने का काम किया होता तो इतनी बदतर हालत नहीं होती।
बांध टूटने से तीन दर्जन से अधिक गांवों की फसल पानी में डूबने से बरबाद हो चुकी है। ग्रामीण इस बर्बादी का जिम्मेदार सिंचाई विभाग को मान रहे हैं। क्षेत्र निवासी किसान जुगानी, राम प्रसाद, रामदास, उमेश, शिव चरन, नरसिंह आदि का कहना है कि बांध टूटने के बाद सिंचाई विभाग के अधिकारी बजट न होने का रोना रो रहे थे तथा इनका कहना था कि चार वर्ष से बांध के रख रखाव का बजट नही आया।
खून पसीने की कमाई को बरबाद करने के बाद अब बजट कहां से आ गया और बांध को ठीक करने का काम किया जा रहा है। किसानों का कहना है कि बांध के टूटने व उनके फसल की बरबादी के लिए सिंचाई विभाग के अभियंता जिम्मेदार हैं। किसानों ने इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध र्कावाई की मांग की है।
स्कूलों में लटक रहा ताला
बांसी। बाढ़ के चलते तहसील क्षेत्र की प्राथमिक शिक्षा भी प्रभावित हो रही है। विद्यालयों में पानी घुसने के कारण वहां ताला लगा है और बच्चों का पठन-पाठन बंद है। बांसी के 18 प्राथमिक विद्यालय व छह पूर्व माध्यमिक विद्यालय बाढ़ के पानी से घिर जाने से बंद पड़े हैं। पांच दिन पूर्व असोगवा-नगवा बांध के टूटने से विकास खंड बांसी के तीन दर्जन से अधिक गांव बाढ़ के पानी से घिरे हुए हैं।
इसका सीधा असर प्राथमिक शिक्षा पर पड़ा है। हालत यह है कि पानी से घिरे होने के कारण प्राथमिक विद्यालय कदमहवा, हाटा, तड़वल घाट, भुजराई, नवडीहवा, बकुआ, सूपा बख्शी, तारा गुजरौलिया, बभनीताल, टेकापार, नगवा, मुड़िला राजा, भगौतापुर, कोडऱी, बलुआ, कम्हरिया खुर्द, कटहा, वहोरवा घाट तथा पूर्व माध्यमिक विद्यालय हाटा, तड़वल घाट, मुड़िला राजा, बलुआ, पिपरहिया व पकरडीहा बंद पड़े हैं।
यह विद्यालय चारों तरफ पानी से घिरे हुए हैं तथा इन विद्यालयों पर जाने वाले रास्ते भी जलमग्न हैं। विकास खंड बांसी के सह समन्वयक शिव कुमार राय ने बताया कि बाढ़ का पानी हटने के बाद शिक्षण कार्य शुरू होगा।
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ग्राम बेेलवा निवासी नंदा सोनी, कृष्णा सोनी, भोला सोनी, विजय कुमार, रिंकू तिवारी, मिठाईलाल आदि के घरो में बाढ़ का पानी भरा हुआ है। इससे परिवार के लोग दहशत में है। उधर बिजौरा में पूर्व माध्यमिक विद्यालय व प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के अलावा चौराहे पर बना मंदिर पानी से पूरी तरह घिरा है।
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वहीं स्वास्थ्य विभाग द्वारा एएनएम सेंटर बिजौरा में सोमवार को बाढ़ स्वास्थ्य शिविर लगाया है। रमवापुर जगतराम में एएनएम सेंटर, मिनी सचिवालय व सरकारी विद्यालय पानी से घिरा हुआ है। इसके अलावा गांव के घप्पू, धीरज, टिंकू, खदेरु, रामू आदि के घर के चारों तरफ पानी भरा हुआ है।
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बाढ़ के पानी के चलते कुछ परिवार के लोग अपना घर बार छोड़कर विद्यालय में बच्चों सहित शरण लिए हुए हैं। रमवापुर जगत राम, केसवाजोत, जहदा मुस्तहकम, गोपिया, सिसवा, बेव मुस्तहकम, असनहरा, कठौतिया, जुड़वनिया, चंदनजोत, डिवलीडीह चौबे, तेनुई, नेहुतुआ, बीरपुर कोहल आदि गांव बाढ़ के पानी से पूरी तरह घिरे हुए हैं। सिसई से बेव व असनहर तक का रास्ता पानी मेें इस कदर डूबा हुआ है कि लोगों का आना-जाना मुश्किल हो रहा है।
बांध टूटने से धान की फसल हुई बरबाद
बांसी। असोगवा-नगवा बांध टूटने के बाद आसपास के इलाकों में भारी तबाही मची। सबसे ज्यादा नुकसान धान की फसल को हुआ है। किसानों की सैकड़ों एकड़ फसल बाढ़ के पानी से तबाह हो गई है। किसानों का कहना है कि यदि अधिकारियों ने समय रहते बांध का दुरुस्त करने का काम किया होता तो इतनी बदतर हालत नहीं होती।
बांध टूटने से तीन दर्जन से अधिक गांवों की फसल पानी में डूबने से बरबाद हो चुकी है। ग्रामीण इस बर्बादी का जिम्मेदार सिंचाई विभाग को मान रहे हैं। क्षेत्र निवासी किसान जुगानी, राम प्रसाद, रामदास, उमेश, शिव चरन, नरसिंह आदि का कहना है कि बांध टूटने के बाद सिंचाई विभाग के अधिकारी बजट न होने का रोना रो रहे थे तथा इनका कहना था कि चार वर्ष से बांध के रख रखाव का बजट नही आया।
खून पसीने की कमाई को बरबाद करने के बाद अब बजट कहां से आ गया और बांध को ठीक करने का काम किया जा रहा है। किसानों का कहना है कि बांध के टूटने व उनके फसल की बरबादी के लिए सिंचाई विभाग के अभियंता जिम्मेदार हैं। किसानों ने इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध र्कावाई की मांग की है।
स्कूलों में लटक रहा ताला
बांसी। बाढ़ के चलते तहसील क्षेत्र की प्राथमिक शिक्षा भी प्रभावित हो रही है। विद्यालयों में पानी घुसने के कारण वहां ताला लगा है और बच्चों का पठन-पाठन बंद है। बांसी के 18 प्राथमिक विद्यालय व छह पूर्व माध्यमिक विद्यालय बाढ़ के पानी से घिर जाने से बंद पड़े हैं। पांच दिन पूर्व असोगवा-नगवा बांध के टूटने से विकास खंड बांसी के तीन दर्जन से अधिक गांव बाढ़ के पानी से घिरे हुए हैं।
इसका सीधा असर प्राथमिक शिक्षा पर पड़ा है। हालत यह है कि पानी से घिरे होने के कारण प्राथमिक विद्यालय कदमहवा, हाटा, तड़वल घाट, भुजराई, नवडीहवा, बकुआ, सूपा बख्शी, तारा गुजरौलिया, बभनीताल, टेकापार, नगवा, मुड़िला राजा, भगौतापुर, कोडऱी, बलुआ, कम्हरिया खुर्द, कटहा, वहोरवा घाट तथा पूर्व माध्यमिक विद्यालय हाटा, तड़वल घाट, मुड़िला राजा, बलुआ, पिपरहिया व पकरडीहा बंद पड़े हैं।
यह विद्यालय चारों तरफ पानी से घिरे हुए हैं तथा इन विद्यालयों पर जाने वाले रास्ते भी जलमग्न हैं। विकास खंड बांसी के सह समन्वयक शिव कुमार राय ने बताया कि बाढ़ का पानी हटने के बाद शिक्षण कार्य शुरू होगा।