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दिनभर छितराए बादल, शाम को झूम के बरसे
ब्यूरो/अमर उजाला सिद्धार्थनगर
Updated Fri, 15 Jul 2016 10:59 PM IST
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चबूतरे पर लेटकर झमाझम बारिश का आनंद लेता किशोर।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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सिद्धार्थनगर। तीखी धूप और तेज उमस के बीच परेशान लोगों के लिए शुक्रवार की देर शाम राहत की बरसात हुई। झमाझम बारिश ने न सिर्फ तन भिगोया, बल्कि लोगों के मन को भी प्रफुल्लित कर दिया। खुशी से झूमते युवा, बच्चे बारिश का आनंद लेते नजर आए। उधर, रोपाई के बाद से आसमान निहार रहे खेतिहर वर्ग भी झूम उठा है। धान की फसल के लिए बारिश संजीवनी बताई जा रही है।
गुरुवार रात हल्की बारिश के बाद सुबह धूप के कारण उमस जोरों पर थी। दोपहर में धूप के तेवर अप्रैल-मई की गर्मी का अहसास करा रहे थे। दिनभर हलकान हुए लोगों को शाम करीब साढ़े 6 बजे तब राहत मिली, जब मेघों ने कृपा बरसानी शुरू की। झमाझम बारिश से हर कोई झूम उठा।
सबसे ज्यादा उत्साह बच्चों और युवाओं में नजर आया। बारिश में भीगते हुए कोई बाइक से फर्राटे भरता दिखा तो कोई छत-आंगन में नहाने में तल्लीन हो गया। करीब डेढ़ घंटे तक बारिश का क्रम जारी रहा। तेज बारिश से निचले इलाकों में जलजमाव की नौबत आ गई है।
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उधर, सूखते खेत-खलिहान में भी पानी पहुंच गया है। जानकारों की मानें तो रोपाई के बाद से ही किसान बारिश का इंतजार कर रहे थे, मगर उन्हें निराशा ही मिली थी। सिंचाई संसाधन न होने से उनकी चिंताएं बढ़ रही थी। बारिश में थोड़ा और विलंब होता तो फसल प्रभावित होने की आशंका बढ़ जाती। बहरहाल, बारिश के बाद खेतिहर वर्ग भी पूरे उत्साह से खेती में जुट गया है।
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गुरुवार रात हल्की बारिश के बाद सुबह धूप के कारण उमस जोरों पर थी। दोपहर में धूप के तेवर अप्रैल-मई की गर्मी का अहसास करा रहे थे। दिनभर हलकान हुए लोगों को शाम करीब साढ़े 6 बजे तब राहत मिली, जब मेघों ने कृपा बरसानी शुरू की। झमाझम बारिश से हर कोई झूम उठा।
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सबसे ज्यादा उत्साह बच्चों और युवाओं में नजर आया। बारिश में भीगते हुए कोई बाइक से फर्राटे भरता दिखा तो कोई छत-आंगन में नहाने में तल्लीन हो गया। करीब डेढ़ घंटे तक बारिश का क्रम जारी रहा। तेज बारिश से निचले इलाकों में जलजमाव की नौबत आ गई है।
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उधर, सूखते खेत-खलिहान में भी पानी पहुंच गया है। जानकारों की मानें तो रोपाई के बाद से ही किसान बारिश का इंतजार कर रहे थे, मगर उन्हें निराशा ही मिली थी। सिंचाई संसाधन न होने से उनकी चिंताएं बढ़ रही थी। बारिश में थोड़ा और विलंब होता तो फसल प्रभावित होने की आशंका बढ़ जाती। बहरहाल, बारिश के बाद खेतिहर वर्ग भी पूरे उत्साह से खेती में जुट गया है।