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Siddharthnagar News: लुटने से बचने के लिए समितियों पर मारामारी
Thu, 14 Nov 2024 11:36 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Thu, 14 Nov 2024 11:36 PM IST
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साधन सहकारी समिति घोसियारी में खाद मिलने का इंतजार करते किसान।
तुलसियापुर। गेहूं, आलू, सरसों, मंसूरी की बुआई के सीजन साथ ही डीएपी खाद के लिए मारामारी शुरू हो गई। समिति और निजी दुकान पर प्रति बोरी 300 रुपये का अंतर है। ऐसे में लुटने से बचने के लिए किसान समितियों के चक्कर काट रहे हैं। वहीं जिले मे सीमा पार खाद की तस्करी धड़ल्ले से जारी है और किसान परेशान हो रहे हैं।
किसानों ने आरोप लगाया कि किसानों को जरूरत के अनुसार खाद नहीं मिल रहा है। किसानों का आरोप है कि समितियों पर उन्हें डीएपी खाद के दो से तीन बोरी के साथ 600 रुपये की कीमत की नैनो स्प्रे डीएपी की बोतल दे रहे हैं।
ऐसे में न चाहते हुए भी किसानों को मजबूरी में नैनो डीएपी की बोतल लेनी पड़ रही है। किसान रामबरन, सुखदेव, राममिलन, रंजीत, रामदयाल, राम सुमेर आदि का कहना है कि प्राइवेट दुकानदारों के पास डीएपी खाद नहीं है। समितियों पर डीएपी आ रही है और बंट भी रही है, लेकिन वह दो या तीन बोरी के साथ नैनो डीएपी ले जाने के लिए विवश कर रहे हैं।
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एक बोरी डीएपी खाद की कीमत 1350 रुपया है। उसके साथ नैनो डीएपी लेने पर 600 रुपये और ले रहे हैं। कुल मिलाकर एक बोरी डीएपी की कीमत 1550 से 1650 रुपये पड़ रही है। किसानों का कहना है कि डीएपी की किल्लत से फसल की बुवाई प्रभावित हो रही है।
इस संबंध में साधन सहकारी समितियों के सचिवों का कहना है कि बगैर नैनो डीएपी लिए आगे से ही डीएपी नहीं मिल रहा है। इसके कारण नैनो डीएपी ले आना और उसे किसानों में बेचना मजबूरी हो गई है।
किसानों का कहना है कि उन्हें हर छमाही में खाद की समस्या से दो चार होना पड़ता है लेकिन समस्या का हल कोई नहीं करता है। समस्या को कोई हल निकलता दिखाई भी नहीं पड़ता। किसान के भाग्य में तो लाइन में ही लगना लिखा हुआ है। डीएपी खाद के बिना वे गेहूं की बुआई नहीं कर पा रहे हैं। उनकी बुआई पिछड़ती जा रही है।
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किसानों ने आरोप लगाया कि किसानों को जरूरत के अनुसार खाद नहीं मिल रहा है। किसानों का आरोप है कि समितियों पर उन्हें डीएपी खाद के दो से तीन बोरी के साथ 600 रुपये की कीमत की नैनो स्प्रे डीएपी की बोतल दे रहे हैं।
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ऐसे में न चाहते हुए भी किसानों को मजबूरी में नैनो डीएपी की बोतल लेनी पड़ रही है। किसान रामबरन, सुखदेव, राममिलन, रंजीत, रामदयाल, राम सुमेर आदि का कहना है कि प्राइवेट दुकानदारों के पास डीएपी खाद नहीं है। समितियों पर डीएपी आ रही है और बंट भी रही है, लेकिन वह दो या तीन बोरी के साथ नैनो डीएपी ले जाने के लिए विवश कर रहे हैं।
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एक बोरी डीएपी खाद की कीमत 1350 रुपया है। उसके साथ नैनो डीएपी लेने पर 600 रुपये और ले रहे हैं। कुल मिलाकर एक बोरी डीएपी की कीमत 1550 से 1650 रुपये पड़ रही है। किसानों का कहना है कि डीएपी की किल्लत से फसल की बुवाई प्रभावित हो रही है।
इस संबंध में साधन सहकारी समितियों के सचिवों का कहना है कि बगैर नैनो डीएपी लिए आगे से ही डीएपी नहीं मिल रहा है। इसके कारण नैनो डीएपी ले आना और उसे किसानों में बेचना मजबूरी हो गई है।
किसानों का कहना है कि उन्हें हर छमाही में खाद की समस्या से दो चार होना पड़ता है लेकिन समस्या का हल कोई नहीं करता है। समस्या को कोई हल निकलता दिखाई भी नहीं पड़ता। किसान के भाग्य में तो लाइन में ही लगना लिखा हुआ है। डीएपी खाद के बिना वे गेहूं की बुआई नहीं कर पा रहे हैं। उनकी बुआई पिछड़ती जा रही है।