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वायरल बुखार के मरीजों में कोरोना का भय
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वायरल बुखार के मरीजों में कोरोना का भय
सिद्धार्थनगर। बदलते मौसम के बीच वायरल बुखार भी तेजी से लोगों को चपेट में ले रहा है। बुखार के मरीजों के शरीर का तापमान अधिक होने और कोरोना से मिलते-जुलते लक्षण के कारण लोगों की चिंता बढ़ रही है, क्योंकि आसपास के कुछ जिलों में कोरोना संक्रमण के केस मिले हैं।
संयुक्त जिला चिकित्सालय में इस तरह के पांच सौ से ज्यादा मरीज प्रतिदिन पहुंच रहे हैं। सुबह आठ से दोपहर दो बजे तक ओपीडी के समय मरीजों का आना लगा रहता है। इसके अलावा अस्पतालों में भी दिखाने के लिए सैकड़ों की संख्या में मरीज पहुंच रहे हैं।
मरीज देखने वाले डॉक्टर भी कोरोना संक्रमण के प्रति सतर्कता बरतते हुए नजर आ रहे हैं। मौसम में आए बदलाव का सीधा असर लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। वातावरण में उमस बढ़ने से अस्पताल में मरीजों की संख्या में इजाफा होने लगा है। अस्पताल में चाहे दवा वितरण काउंटर हो या फिर डॉक्टर का कक्ष, सभी जगह भीड़ बढ़ने से मरीजों को इलाज कराने में परेशानी उठानी पड़ रही है। इसके अलावा मौसम में बदलाव के साथ ही वायरल फीवर, उल्टी-दस्त, डायरिया और पेटदर्द की बीमारी ने दस्तक दी है।
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जिला अस्पताल के फिजीशियन डॉ. सीबी चौधरी ने बताया कि ओपीडी में लक्षण के आधार पर मरीजों को करोना जांच का सुझाव दिया जा रहा है। बुखार में दवा से आराम नहीं मिलता है तो कोरोना जांच कराने की नौबत आती है। फिलहाल गनीमत है कि जिले में कोरोना के एक भी पॉजिटिव केस नहीं हैं।
ये बीमारियां भी हैं...
जिला अस्पताल के नाक, कान एवं गला रोग विशेषज्ञ डॉ. संजय शर्मा ने बताया कि बुखार, डायरिया के साथ ही बारिश के मौसम में नाक बहना, नाक में खुजली होना, कानों में अजीब सी आवाज गूंजना, आंखों से पानी आना और छींके आना जैसे होते हैं। यदि समय पर इलाज न किया जाए या इसके लक्षणों को पहचानकर तुरंत डॉक्टर से संपर्क न किया जाए तो यह अस्थमा, सूखी खांसी और निमोनिया जैसे रोगों को जन्म दे सकती है। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. शैलेंद्र कुमार ने बताया कि टाइफाइड बुखार से 10 से 15 साल के बच्चे ज्यादा पीड़ित हैं। बच्चों के बीमार होने से अभिभावकों को परेशानी बढ़ गई है। इन बीमारियों से बचने के लिए अपने बच्चों को बारिश में न सिर्फ भींगने से बचाएं, बल्कि उबले हुए पानी का इस्तेमाल करें।
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सिद्धार्थनगर। बदलते मौसम के बीच वायरल बुखार भी तेजी से लोगों को चपेट में ले रहा है। बुखार के मरीजों के शरीर का तापमान अधिक होने और कोरोना से मिलते-जुलते लक्षण के कारण लोगों की चिंता बढ़ रही है, क्योंकि आसपास के कुछ जिलों में कोरोना संक्रमण के केस मिले हैं।
संयुक्त जिला चिकित्सालय में इस तरह के पांच सौ से ज्यादा मरीज प्रतिदिन पहुंच रहे हैं। सुबह आठ से दोपहर दो बजे तक ओपीडी के समय मरीजों का आना लगा रहता है। इसके अलावा अस्पतालों में भी दिखाने के लिए सैकड़ों की संख्या में मरीज पहुंच रहे हैं।
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मरीज देखने वाले डॉक्टर भी कोरोना संक्रमण के प्रति सतर्कता बरतते हुए नजर आ रहे हैं। मौसम में आए बदलाव का सीधा असर लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। वातावरण में उमस बढ़ने से अस्पताल में मरीजों की संख्या में इजाफा होने लगा है। अस्पताल में चाहे दवा वितरण काउंटर हो या फिर डॉक्टर का कक्ष, सभी जगह भीड़ बढ़ने से मरीजों को इलाज कराने में परेशानी उठानी पड़ रही है। इसके अलावा मौसम में बदलाव के साथ ही वायरल फीवर, उल्टी-दस्त, डायरिया और पेटदर्द की बीमारी ने दस्तक दी है।
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जिला अस्पताल के फिजीशियन डॉ. सीबी चौधरी ने बताया कि ओपीडी में लक्षण के आधार पर मरीजों को करोना जांच का सुझाव दिया जा रहा है। बुखार में दवा से आराम नहीं मिलता है तो कोरोना जांच कराने की नौबत आती है। फिलहाल गनीमत है कि जिले में कोरोना के एक भी पॉजिटिव केस नहीं हैं।
ये बीमारियां भी हैं...
जिला अस्पताल के नाक, कान एवं गला रोग विशेषज्ञ डॉ. संजय शर्मा ने बताया कि बुखार, डायरिया के साथ ही बारिश के मौसम में नाक बहना, नाक में खुजली होना, कानों में अजीब सी आवाज गूंजना, आंखों से पानी आना और छींके आना जैसे होते हैं। यदि समय पर इलाज न किया जाए या इसके लक्षणों को पहचानकर तुरंत डॉक्टर से संपर्क न किया जाए तो यह अस्थमा, सूखी खांसी और निमोनिया जैसे रोगों को जन्म दे सकती है। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. शैलेंद्र कुमार ने बताया कि टाइफाइड बुखार से 10 से 15 साल के बच्चे ज्यादा पीड़ित हैं। बच्चों के बीमार होने से अभिभावकों को परेशानी बढ़ गई है। इन बीमारियों से बचने के लिए अपने बच्चों को बारिश में न सिर्फ भींगने से बचाएं, बल्कि उबले हुए पानी का इस्तेमाल करें।