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Siddharthnagar News: नदी में विलीन हो रहे खेत, गांव पर मंडरा बाढ़ का खतरा
Sun, 16 Jun 2024 12:47 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Sun, 16 Jun 2024 12:47 AM IST
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- बांसी क्षेत्र में राप्ती हर साल मचाती है तबाही
- क्षेत्र के मेचुका सहित अन्य गांव के पास कटान
संवाद न्यूज एजेंसी
बांसी। क्षेत्र में राप्ती नदी की कटान से काफी संख्या में किसान भूमिहीन होने के कगार पर पहुंच चुके हैं। राप्ती नदी के उत्तरी पश्चिमी छोर पर बांसी-डुमरियागंज बांध के निकट बसे मेचुका गांव के किसानों के 300 बीघा से अधिक खेत कटकर नदी में विलीन हो चुके हैं। ये लगभग एक दशक से जारी है। इस दौरान किसान विभाग से कटान रोकने की गुहार लगा रहे हैं, लेकिन अभी तक कोई कारगर पहल नहीं हुआ। परिणाम ये है कि लगातार कटान जारी है और किसान भूमिहीन होने के कगार पर पहुंच चुके हैं।
बांसी क्षेत्र के राप्ती नदी के तट पर मेचुका मोड़ के पास कई वर्षों से कटान जारी है। कटान से नदी दिशा बदल रही है और किसानों के खेत कट रहे हैं। ग्रामीणों के अनुसार बेचन सिंह, वीरेंद्र सिंह, अशोक सिंह, शिवकुमार, संजय सिंह, मंगल सिंह, भोला सिंह, रमेश कुमार, योगेंद्र सिंह, चंद्रभान सिंह आदि के खेत नदी में विलीन हो चुके हैं। वहीं गदुरहिया गांव के राम कला, झिनक, दाहू तेलौरा गांव के पूर्णमासी के खेत भी नदी में समा चुके हैं।
कृषक प्रताप नारायण सिंह का कहना है कि कई वर्ष से खेत कटकर नदी में गिर रहा है। कटान को रोकने के लिए कई बार विभागीय अभियंताओं से मांग किया गया कि ठोकर, कटर आदि बनाकर कटान को रोका जाए, लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया, जिसका परिणाम है कि लगातार कटान जारी है। हर वर्ष बाढ़ में खेत कटकर नदी में विलीन हो रहे हैं। वहीं कृषक सुशील सिंह का कहना है कि इसी तरह कटान जारी रहा तो कुछ किसान भूमिहीन हो जाएंगे। किसानों की मांग पर सिंचाई विभाग ने कटान रोकने के लिए कुछ काम किया है जो निरर्थक है, इसके बावजूद कटान जारी है। किसानों ने विभाग से कटान रोकने का स्थायी इंतजाम की मांग की है।
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ग्राम प्रधान सुजीत सिंह का कहना है कि उनके परिवार का खेत नदी में कट चुका है। साथ ही ग्रामसभा का भी लगभग तीन बीघा खेत कटकर नदी में विलीन हो चुका है। इनका कहना है कि यदि इसी रफ्तार से कटान जारी रहा तो किसान भूमिहीन हो जाऐंगे।
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- क्षेत्र के मेचुका सहित अन्य गांव के पास कटान
संवाद न्यूज एजेंसी
बांसी। क्षेत्र में राप्ती नदी की कटान से काफी संख्या में किसान भूमिहीन होने के कगार पर पहुंच चुके हैं। राप्ती नदी के उत्तरी पश्चिमी छोर पर बांसी-डुमरियागंज बांध के निकट बसे मेचुका गांव के किसानों के 300 बीघा से अधिक खेत कटकर नदी में विलीन हो चुके हैं। ये लगभग एक दशक से जारी है। इस दौरान किसान विभाग से कटान रोकने की गुहार लगा रहे हैं, लेकिन अभी तक कोई कारगर पहल नहीं हुआ। परिणाम ये है कि लगातार कटान जारी है और किसान भूमिहीन होने के कगार पर पहुंच चुके हैं।
बांसी क्षेत्र के राप्ती नदी के तट पर मेचुका मोड़ के पास कई वर्षों से कटान जारी है। कटान से नदी दिशा बदल रही है और किसानों के खेत कट रहे हैं। ग्रामीणों के अनुसार बेचन सिंह, वीरेंद्र सिंह, अशोक सिंह, शिवकुमार, संजय सिंह, मंगल सिंह, भोला सिंह, रमेश कुमार, योगेंद्र सिंह, चंद्रभान सिंह आदि के खेत नदी में विलीन हो चुके हैं। वहीं गदुरहिया गांव के राम कला, झिनक, दाहू तेलौरा गांव के पूर्णमासी के खेत भी नदी में समा चुके हैं।
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कृषक प्रताप नारायण सिंह का कहना है कि कई वर्ष से खेत कटकर नदी में गिर रहा है। कटान को रोकने के लिए कई बार विभागीय अभियंताओं से मांग किया गया कि ठोकर, कटर आदि बनाकर कटान को रोका जाए, लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया, जिसका परिणाम है कि लगातार कटान जारी है। हर वर्ष बाढ़ में खेत कटकर नदी में विलीन हो रहे हैं। वहीं कृषक सुशील सिंह का कहना है कि इसी तरह कटान जारी रहा तो कुछ किसान भूमिहीन हो जाएंगे। किसानों की मांग पर सिंचाई विभाग ने कटान रोकने के लिए कुछ काम किया है जो निरर्थक है, इसके बावजूद कटान जारी है। किसानों ने विभाग से कटान रोकने का स्थायी इंतजाम की मांग की है।
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ग्राम प्रधान सुजीत सिंह का कहना है कि उनके परिवार का खेत नदी में कट चुका है। साथ ही ग्रामसभा का भी लगभग तीन बीघा खेत कटकर नदी में विलीन हो चुका है। इनका कहना है कि यदि इसी रफ्तार से कटान जारी रहा तो किसान भूमिहीन हो जाऐंगे।